इन 8 मिड-कैप फंड्स ने किया निराश, बेंचमार्क से पिछड़े; क्या आपके पोर्टफोलियो में भी है इनमें से कोई?
अगर आप मिड-कैप म्यूचुअल फंड में निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो Alpha को समझना बेहद जरूरी है. Value Research के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 8 मिड-कैप म्यूचुअल फंड ऐसे हैं, जिनका Alpha निगेटिव है. इनमें Taurus Mid Cap Fund का Alpha -7.20 के साथ सबसे कमजोर रहा, जबकि Franklin India Mid Cap Fund का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा है.

Mid-cap Mutual Fund: अगर आप मिड-कैप म्यूचुअल फंड में निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो सिर्फ अच्छे रिटर्न देखकर फैसला लेना सही नहीं होगा. किसी भी एक्टिवली मैनेज्ड फंड का प्रदर्शन उसके बेंचमार्क के मुकाबले कितना बेहतर या कमजोर रहा है, यह जानने के लिए Alpha एक अहम पैमाना माना जाता है. ताजा आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल भारत में 8 ऐसे मिड-कैप फंड हैं, जिनका Alpha निगेटिव है. इनमें टॉरस मिड कैप फंड का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा है, जिसका Alpha -7.20 दर्ज किया गया है. इसका मतलब है कि इस फंड ने अपने बेंचमार्क इंडेक्स की तुलना में काफी कमजोर प्रदर्शन किया है.
क्या होता है मिड-कैप फंड
मिड-कैप म्यूचुअल फंड को लार्ज-कैप और स्मॉल-कैप फंड के बीच का विकल्प माना जाता है. ये फंड मुख्य रूप से मध्यम आकार की कंपनियों में निवेश करते हैं. इन कंपनियों में बड़ी कंपनियों की तुलना में अधिक ग्रोथ की संभावना होती है, जबकि जोखिम स्मॉल-कैप कंपनियों के मुकाबले अपेक्षाकृत कम माना जाता है.
SEBI के नियमों के मुताबिक, हर मिड-कैप फंड को अपनी कुल संपत्ति का कम से कम 65 फीसदी हिस्सा मिड-कैप स्टॉक्स में निवेश करना अनिवार्य होता है. इसके बाद फंड मैनेजर अपने अनुभव और रणनीति के आधार पर अलग-अलग शेयरों का चयन करते हैं.
Alpha क्यों है महत्वपूर्ण
किसी भी एक्टिवली मैनेज्ड म्यूचुअल फंड का मूल्यांकन करने के लिए Alpha सबसे अहम संकेतकों में से एक है. यह बताता है कि किसी फंड मैनेजर ने बाजार के जोखिम को ध्यान में रखते हुए अपने बेंचमार्क की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है या नहीं.
- पॉजिटिव Alpha का मतलब है कि फंड ने बेंचमार्क से बेहतर रिटर्न दिया.
- जीरो Alpha का मतलब है कि फंड का प्रदर्शन लगभग बेंचमार्क के बराबर रहा.
- नेगेटिव Alpha का मतलब है कि फंड अपने बेंचमार्क से पीछे रह गया.
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी बेंचमार्क इंडेक्स ने 20 फीसदी रिटर्न दिया और फंड ने 12.8 फीसदी रिटर्न दिया, तो उसका Alpha -7.20 माना जाएगा.
ये हैं 8 मिड-कैप फंड, जिनका Alpha निगेटिव
वैल्यू रिसर्च के 30 जून 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, निम्नलिखित मिड-कैप फंड अपने बेंचमार्क से पीछे रहे हैं.
| क्रमांक | फंड का नाम | Alpha (%) |
|---|---|---|
| 1 | Taurus Mid Cap Fund | -7.20 |
| 2 | PGIM India Mid Cap Fund | -3.89 |
| 3 | UTI Midcap Fund | -3.62 |
| 4 | SBI Midcap Fund | -3.22 |
| 5 | Quant Mid Cap Fund | -1.01 |
| 6 | LIC MF Midcap Fund | -0.46 |
| 7 | DSP Midcap Fund | -0.20 |
| 8 | Franklin India Mid Cap Fund | -0.16 |
क्या नेगेटिव Alpha का मतलब नुकसान है
अक्सर निवेशक यह मान लेते हैं कि नेगेटिव Alpha का मतलब फंड ने नुकसान कराया है, जबकि ऐसा जरूरी नहीं है. नेगेटिव Alpha केवल यह बताता है कि फंड अपने बेंचमार्क से पीछे रहा, न कि उसने नकारात्मक रिटर्न दिया. उदाहरण के तौर पर, टॉरस मिड कैप फंड का Alpha -7.20 है, लेकिन इसके बावजूद इसने निवेशकों को अलग-अलग अवधियों में सकारात्मक रिटर्न दिया है. इस फंड का 3-year CAGR 11.87 फीसदी और 5-year CAGR 12.61 फीसदी रहा है. वहीं, 7-year में इसने 18.69 फीसदी और 10-year में 14.69 फीसदी का CAGR दिया है.
कम नेगेटिव Alpha वाला फंड दे सकता है बेहतर रिटर्न
दिलचस्प बात यह है कि फ्रैंकलिन इंडिया मिड कैप फंड का Alpha -0.16 है, लेकिन इसके रिटर्न टॉरस मिड कैप फंड से बेहतर रहे हैं. इस फंड ने 3-year में 18.16 फीसदी, 5-year में 15.68 फीसदी, 7-year में 18.88 फीसदी और 10-year में 15.03 फीसदी का CAGR दिया है.
निवेश से पहले केवल Alpha न देखें
विशेषज्ञों का मानना है कि Alpha किसी भी म्यूचुअल फंड के मूल्यांकन का एक महत्वपूर्ण पैमाना जरूर है, लेकिन निवेश का फैसला केवल इसी आधार पर नहीं करना चाहिए. निवेशकों को CAGR, रिस्क, एक्सपेंस रेशियो, पोर्टफोलियो क्वालिटी और फंड मैनेजर का ट्रैक रिकॉर्ड तथा अपने निवेश लक्ष्य को भी ध्यान में रखना चाहिए. लंबी अवधि में वही फंड बेहतर साबित होते हैं, जो लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के साथ जोखिम का भी संतुलित प्रबंधन करते हैं.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.