आ गया Nippon का नया NFO, कम रिस्क में बढ़िया रिटर्न देगा ये फंड, यहां समझें क्यों लगाएं पैसा?
Nippon इंडिया म्यूचुअल फंड ने 'इन्कम प्लस आर्बिट्राज ओम्नी फंड ऑफ फंड' NFO को लॉन्च किया है. ये फंड 17 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक खुला है. 24 महीने से ज्यादा निवेश रखने पर 12.5 फीसदी LTCG टैक्स लगता है.

निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड (NIMF) ने मौजूदा उतार-चढ़ाव वाले मार्केट में निवेश के लिए एक नया फंड ऑफर (NFO) पेश किया है. ‘निप्पॉन इंडिया इनकम प्लस आर्बिट्राज ओम्नी फंड ऑफ फंड’ कम उतार-चढ़ाव और बेहतर टैक्स-एफिशिएंसी के साथ बेहतर रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न देता है. यह NFO सब्सक्रिप्शन के लिए 17 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक खुला रहेगा.
‘निप्पॉन इंडिया इनकम प्लस आर्बिट्राज ओम्नी फंड ऑफ फंड’ अपने लगभग पूरे फंड (95 फीसदी से 100 फीसदी) का निवेश आर्बिट्राज म्यूचुअल फंड, एक्टिव और पैसिव डेट म्यूचुअल फंड के कॉम्बिनेशन में करेगा और ज्यादा से ज्यादा 5 फीसदी हिस्सा डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश किया जा सकता है. इस नए फंड में आर्बिट्राज फंड में कम से कम 35 फीसदी निवेश किया जाएगा, जबकि एक्टिव डेट फंड, पैसिव डेट फंड और मनी मार्केट में निवेश किसी भी समय 65 फीसदी से कम रहेगा.
टैक्स एफिशिएंट है ये फंड
निप्पॉन इंडिया इनकम प्लस आर्बिट्रेज ओम्नी फंड ऑफ फंड का नेचर और बनावट इसे टैक्स के लिहाज से बहुत फायदेमंद बनाती है. चूंकि यह फंड 65 फीसदी से कम निवेश करता है, इसलिए इसकी बनावट उन निवेशकों के लिए भी इसे टैक्स-एफिशिएंट बनाती है जिनका निवेश का समय कम से कम दो साल का है. अगर यूनिट्स को 24 महीने से ज्यादा समय तक रखा जाता है, तो मुनाफे पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स के तौर पर 12.5 फीसदी टैक्स लगता है, जबकि 24 महीने तक रखने पर टैक्स निवेशक के लागू स्लैब रेट के हिसाब से लगता है. इससे यह फंड ऑफ फंड उन निवेशकों के लिए खास तौर पर काम का है जो दो साल या उससे ज़्यादा समय के लिए निवेश करना चाहते हैं.
टैक्स के फायदे के अलावा ‘निप्पॉन इंडिया इनकम प्लस आर्बिट्रेज ओम्नी फंड ऑफ फंड्स’ शुद्ध डेट और आर्बिट्रेज फंड्स की तुलना में कई अन्य फायदे भी देता है. जहां डेट-ओरिएंटेड फंड्स मुख्य रूप से डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं और आर्बिट्रेज फंड्स हेज्ड इक्विटी पोजीशन के जरिए आर्बिट्रेज रणनीति अपनाते हैं, वहीं यह नया NFO इन दोनों का कॉम्बिनेशन एक ही पोर्टफोलियो में लाता है. फंड मैनेजर अंडरलाइंग स्कीम के चयन और एलोकेशन का फैसला लेता है, जिससे निवेशकों को एक ही निवेश समाधान के जरिए कई रणनीतियों का लाभ मिलता है.
कम रिस्क वाला फंड
इन्वेस्टर्स खुद अलग-अलग स्कीम के बीच स्विच किए बिना या ऐसे स्विच पर लगने वाले टैक्स का बोझ उठाए बिना कई तरह की अंडरलाइंग स्ट्रेटेजी का फायदा उठा सकते हैं. फंड मैनेजर जरूरत के हिसाब से ‘फंड ऑफ फंड’ में शामिल अंडरलाइंग स्कीम को रीबैलेंस कर सकता है. इस फंड का मकसद बेहतर रिटर्न देना भी है, क्योंकि डेट वाला हिस्सा बेहतर रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न देता है, जबकि आर्बिट्राज वाला हिस्सा इक्विटी मार्केट स्प्रेड का फायदा उठाता है.
यह निवेश का विकल्प उन निवेशकों के लिए बहुत अच्छा है जो ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव का जोखिम कम लेना चाहते हैं, एक्रूअल रिटर्न (समय के साथ मिलने वाला रिटर्न) चाहते हैं और जिनका निवेश का समय दो से तीन साल का है.
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