15 अक्टूबर से लगेगा UPI पेमेंट पर चार्ज, क्या आपके म्यूचुअल फंड पर भी पड़ेगा असर?
अक्टूबर से कुछ खास यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.02 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू होने से खास म्यूचुअल फंड और ब्रोकिंग ट्रांज़ैक्शन पेमेंट पर असर पड़ेगा. म्यूचुअल फंड में एक बार के इन्वेस्टमेंट और ब्रोकर वॉलेट में पैसे भरने पर यह फीस लगेगी.

अगले महीने से कुछ खास UPI ट्रांजैक्शन पर 0.02 फीसदी का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा जिससे म्यूचुअल फंड और ब्रोकिंग से जुड़े पेमेंट पर असर पड़ेगा. चलिए आपको बताते हैं कि किन सेगमेंट पर सबसे ज्यादा और किन सेगमेंट्स पर सबसे कम असर पड़ने की संभावना है?
UPI ट्रांजैक्शन पर लगने वाला चार्ज
15 अक्टूबर से कुछ खास UPI ट्रांजैक्शन पर 0.02 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज लगेगा. यह चार्ज यूपीआई के जरिए एक बार के म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट, यूपीआई के जरिए डेट-मार्केट पेमेंट और ब्रोकर वॉलेट टॉप अप के लिए यूपीआई पेमेंट पर लागू होगा जिसमें ज्यादा से ज्यादा 300 रुपए का चार्ज लगेगा. इसका मतलब है कि 15 लाख से कम के पेमेंट पर ट्रांजैक्शन-साइज-लिंक्ड फीस लगेगी, जबकि 15 लाख से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 300 रुपए की फ्लैट फीस लगेगी.
Mutual Funds में कहां होता है UPI का इस्तेमाल?
इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, कई लोग कैपिटल मार्केट ट्रांजैक्शन के लिए यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं जिसमें म्यूचुअल फंड और स्टॉक मार्केट इन्वेस्टमेंट शामिल है. म्यूचुअल फंड इन्वेस्टर रेगुलर एसआईपी पेमेंट के लिए UPI मैंडेट का इस्तेमाल करते हैं, जबकि कुछ एक बार में एकमुश्त इन्वेस्टमेंट के लिए UPI का इस्तेमाल करते हैं. स्टॉकब्रोकिंग के मामले में, कई इन्वेस्टर स्टॉक या ETF खरीदने के लिए नेट बैंकिंग के बजाय UPI के जरिए अपने ब्रोकरेज अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करते हैं.
म्यूचुअल फंड इन्वेस्टर पर क्या पड़ेगा असर?
यूपीआई ऑटोपे के जरिए सेट किए गए म्यूचुअल फंड सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) पर 0.02 फीसदी UPI MDR का असर पड़ने की उम्मीद नहीं है क्योंकि रेगुलर मैंडेट को इस चार्ज से छूट दी गई है. यूपीआई के जरिए किए गए एक बार के म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट पर 0.02 फीसदी MDR लगेगा. इंडस्ट्री सूत्रों ने कहा कि असर कम होने की उम्मीद है और इंडस्ट्री लागत को इन्वेस्टर पर डालने के बजाय खुद उठाएगी.
इससे फंड हाउस को क्या खर्च आएगा?
इंडिविजुअल इन्वेस्टर द्वारा बार-बार UPI ट्रांजैक्शन करने पर फंड हाउस को ज्यादा लागत का सामना करना पड़ सकता है. उदाहरण के लिए, अगर कोई इन्वेस्टर हर महीने की शुरुआत में ओवरनाइट या लिक्विड फंड में 1 लाख रुपए डालता है और महीने के आखिर में रेगुलर खर्चों को पूरा करने के लिए निकाल लेता है और खरीदने के लिए यूपीआई का इस्तेमाल करता है तो फंड पर हर बार 0.02 फीसदी चार्ज लगेगा. 12 महीनों में यह 0.24 फीसदी प्लस जीएसटी होगा, जिससे लागत लगभग 0.29 फीसदी हो जाएगी. कुछ फंड हाउस इन्वेस्टर्स को नेट बैंकिंग या NEFT/RTGS जैसे दूसरे पेमेंट तरीकों का इस्तेमाल करने के लिए भी बढ़ावा दे सकते हैं.
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