आप भी रोज ₹10-20 का Digital Gold खरीदते हैं? सरकार ला रही नया नियम, निवेशकों पर क्या होगा असर?
सरकार डिजिटल गोल्ड के लिए सख्त नियमों पर विचार कर रही है. प्रस्ताव के तहत डिजिटल गोल्ड की हर यूनिट के पीछे बराबर मात्रा में फिजिकल गोल्ड रखना जरूरी हो सकता है. RBI और SEBI की संयुक्त निगरानी की संभावना भी है. हालांकि, अभी प्रस्ताव आखिरी नहीं है. SEBI पहले ही डिजिटल गोल्ड को अपने Regulatory Framework से बाहर बताते हुए निवेशकों को चेतावनी दे चुका है.

डिजिटल गोल्ड को लेकर सरकार नियमों को सख्त करने पर विचार कर रही है. प्रस्ताव के तहत डिजिटल गोल्ड की हर यूनिट के पीछे उतनी ही मात्रा में फिजिकल गोल्ड यानी सोना मौजूद होना जरूरी किया जा सकता है. इसके अलावा Digital Gold Platforms पर RBI और SEBI की संयुक्त निगरानी की संभावना भी देखी जा रही है. हालांकि, अभी ये सभी प्रस्ताव चर्चा के स्तर पर हैं और RBI या SEBI की ओर से कोई आखिरी नियम जारी नहीं किया गया है.
हर डिजिटल गोल्ड के पीछे फिजिकल गोल्ड का प्रस्ताव
वित्त मंत्रालय ने Digital Gold को लेकर RBI, SEBI, बैंकों और दूसरे स्टेकहोल्डर से सुझाव मांगे हैं. Economic Times की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ऐसे नियमों पर विचार कर रही है, जिनके तहत निवेशकों को बेची गई Digital Gold की हर यूनिट के बराबर मात्रा में Physical Bullion मौजूद होना जरूरी होगा.
अभी Digital Gold में निवेशक 10, 20 या 100 रुपये जैसी छोटी रकम से भी सोना खरीद सकते हैं. Online Platform या उसका Bullion Partner आमतौर पर यह बताता है कि निवेशक के Digital Gold के बराबर सोना Vault में रखा गया है. नए नियम लागू होने पर इस Physical Backing को सिर्फ Platform और उसके Partner के बीच की व्यवस्था के बजाय Regulatory Requirement बनाया जा सकता है.
निवेशकों के लिए क्या बदलेगा?
अगर प्रस्तावित नियम लागू होते हैं तो डिजिटल गोल्ड में निवेश करने वालों के लिए Ownership, Custody, Audit, Redemption और Reporting को लेकर ज्यादा स्पष्टता आ सकती है यानी यह पता लगाने के लिए ज्यादा स्पष्ट व्यवस्था हो सकती है कि निवेशकों के Digital Gold के पीछे वास्तव में कितना Physical Gold मौजूद है और उसे किस तरह सुरक्षित रखा गया है.
Economic Times के मुताबिक, Stakeholders ने Digital Gold को Securities Contracts (Regulation) Act, 1956 के तहत सिक्युरिटी के तौर पर मान्यता देने का सुझाव भी दिया है. इंडस्ट्री के पास करीब 3 अरब डॉलर यानी लगभग 3 बिलियन डॉलर की एसेट होने का अनुमान है और औसत Transaction Size करीब 100 रुपये है.
SEBI पहले ही दे चुका है चेतावनी
यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब SEBI ने नवंबर 2025 में डिजिटल गोल्ड को लेकर निवेशकों को सावधान किया था. SEBI ने कहा था कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मिलने वाला डिजिटल गोल्ड और E-Gold, Gold ETF, Exchange-Traded Commodity Derivatives और Electronic Gold Receipts जैसे Regulated Gold Products से अलग है.
SEBI के मुताबिक, डिजिटल गोल्ड को न तो सिक्योरिटी के तौर पर नोटिफाई किया गया था और न ही यह Commodity Derivative के तौर पर Regulated था. ऐसे में यह SEBI के Regulatory Framework से बाहर था. SEBI ने यह भी साफ किया था कि डिजिटल गोल्ड में निवेश करने वालों को Securities Market Framework के तहत उपलब्ध Investor Protection Mechanisms नहीं मिलते. इसके साथ ही Counterparty और Operational Risks की भी बात कही गई थी.
Regulation आने पर क्या फायदा हो सकता है?
अगर प्रस्तावित फ्रेमवर्क लागू होता है तो डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म के लिए गोल्ड होल्डिंग और अकाउंटिंग में ज्यादा मानकीकरण आ सकता है. Physical Gold Backing की अनिवार्यता होने पर प्लेटफॉर्म को यह साबित करना पड़ सकता है कि ग्राहकों के नाम पर दिखाया गया गोल्ड वास्तव में तय Vaults में मौजूद है.
इसके अलावा Audit, Custody और Platform या किसी Intermediary के Financial Problems में फंसने की स्थिति में Investors के Gold को कैसे संभाला जाएगा, इसे लेकर भी ज्यादा स्पष्ट नियम बन सकते हैं. RBI और SEBI की संयुक्त निगरानी से Digital Gold और दूसरे Regulated Financial Products के बीच मौजूद Regulatory Gap कम हो सकता है. हालांकि, दोनों Regulators की जिम्मेदारियां किस तरह बांटी जाएंगी, यह अभी तय नहीं हुआ है.
इसे भी पढ़ें- सोमवार को शेयर बाजार में क्या होगा? GIFT Nifty से कच्चे तेल तक, ये संकेत तय करेंगे बाजार की चाल