नए लेबर कोड से घट सकती है आपकी इन-हैंड सैलरी, 15 लाख CTC पर हर महीने 7,928 रुपये तक असर
नए लेबर कोड से कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर बदल सकती है. बेसिक सैलरी बढ़ने पर PF योगदान बढ़ेगा, जिससे इन-हैंड सैलरी घट सकती है. 15 लाख रुपये CTC वाले कर्मचारी की मासिक टेक-होम सैलरी करीब 7,928 रुपये कम हो सकती है.

नए लेबर कोड के लागू होने के बाद कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव आया है. इसका सीधा असर उनकी इन-हैंड सैलरी पर पड़ सकता है. नए नियम के तहत PF, बोनस और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाओं की गणना के लिए वेतन में कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने का प्रावधान है. इससे कई कर्मचारियों का PF योगदान बढ़ सकता है और हर महीने हाथ में आने वाली रकम कम हो सकती है.
50% वेज नियम का क्या है मतलब?
नए लेबर कोड के तहत ‘वेज’ की गणना में कुछ खास घटकों को शामिल नहीं किया जाता है. इनमें HRA, नियोक्ता का PF या पेंशन योगदान, यात्रा भत्ता, ओवरटाइम, कमीशन और कुछ अन्य भुगतान शामिल हैं. अगर बाहर रखे गए घटकों की कुल राशि तय सीमा से ज्यादा हो जाती है, तो अतिरिक्त राशि को वेज का हिस्सा माना जा सकता है.
कंपनियां इस नियम का पालन करने के लिए सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव कर सकती हैं. कुछ कंपनियां बेसिक सैलरी बढ़ा सकती हैं, जबकि कुछ दूसरी सैलरी मदों को इस तरह एडजस्ट कर सकती हैं कि 50 प्रतिशत की शर्त पूरी हो जाए.
10 लाख CTC वालों पर कितना असर?
आंकड़ों के मुताबिक, 10 लाख रुपये सालाना CTC वाले कर्मचारी की अनुमानित मासिक इन-हैंड सैलरी पुराने स्ट्रक्चर में 70,667 रुपये थी. नए लेबर कोड के हिसाब से यह घटकर करीब 65,381 रुपये हो सकती है. यानी हर महीने करीब 5,286 रुपये की कमी का अनुमान है.
15 लाख CTC पर 7,928 रुपये तक कम हो सकती है सैलरी
15 लाख रुपये CTC वाले कर्मचारी के लिए असर और ज्यादा हो सकता है. अनुमान के अनुसार पुराने स्ट्रक्चर में 1,06,000 रुपये मासिक इन-हैंड सैलरी के मुकाबले नए नियमों के बाद यह करीब 98,072 रुपये रह सकती है. यानी हर महीने करीब 7,928 रुपये कम हाथ में आएंगे.
25 और 50 लाख CTC पर भी पड़ेगा असर
25 लाख रुपये CTC वाले कर्मचारी की अनुमानित मासिक इन-हैंड सैलरी 1,58,047 रुपये से घटकर 1,46,464 रुपये हो सकती है. यानी करीब 11,583 रुपये की मासिक कमी.
वहीं 50 लाख रुपये CTC वाले कर्मचारी की इन-हैंड सैलरी 2,77,949 रुपये से घटकर करीब 2,55,643 रुपये रह सकती है. इसमें करीब 22,305 रुपये महीने की कमी का अनुमान लगाया गया है.
कम इन-हैंड सैलरी का मतलब सिर्फ नुकसान नहीं
हालांकि हाथ में आने वाली रकम कम हो सकती है, लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है. ज्यादा PF योगदान का मतलब कर्मचारी की रिटायरमेंट सेविंग बढ़ सकती है. ग्रेच्युटी और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों की गणना भी ज्यादा वेज बेस पर हो सकती है.
ध्यान देने वाली बात यह है कि लेबर कोड ने सैलरी के टैक्स ट्रीटमेंट को नहीं बदला है. टैक्स की गणना अभी भी लागू आयकर नियमों के अनुसार ही होगी.
हर कर्मचारी पर असर एक जैसा नहीं
इन बदलावों का वास्तविक असर कंपनी की सैलरी स्ट्रक्चर पर निर्भर करेगा. इसलिए कर्मचारियों को अपनी कंपनी से यह पता करना चाहिए कि नए नियम के तहत बेसिक सैलरी, PF और दूसरे कंपोनेंट्स में क्या बदलाव किया गया है. ऊपर दिए गए आंकड़े एक विशेष सैलरी संरचना के आधार पर अनुमान हैं.
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