बचत के लिए कितनी सरकारी स्कीम रखें? PPF, NSC, KVP और SSY में पैसा लगाने से पहले जान लें ये बात

PPF, NSC, KVP और SSY सभी सरकारी समर्थन वाले फिक्स्ड इनकम विकल्प हैं, इसलिए सिर्फ डायवर्सिफिकेशन के लिए चारों में निवेश करना जरूरी नहीं है. ज्यादातर निवेशकों के लिए एक स्कीम पर्याप्त हो सकती है. अलग वित्तीय लक्ष्यों के लिए दो योजनाएं उपयोगी हो सकती हैं. PPF रिटायरमेंट, NSC पांच साल के लक्ष्य और SSY बेटी के भविष्य के लिए इस्तेमाल की जा सकती है.

बचत योजनाएं Image Credit: Money9live/Canva

निवेशकों के बीच अक्सर यह सोच रहती है कि अलग-अलग सरकारी छोटी बचत योजनाओं में पैसा बांटकर निवेश करने से पोर्टफोलियो ज्यादा सुरक्षित और डायवर्सिफाइड हो जाता है. लेकिन इन योजनाओं में निवेश करने से अलग-अलग एसेट क्लास जैसा डायवर्सिफिकेशन नहीं मिलता. PPF, NSC, KVP और SSY सभी मुख्य रूप से सरकारी समर्थन वाले फिक्स्ड इनकम विकल्प हैं. इनमें अंतर इनके मकसद, अवधि, टैक्स ट्रीटमेंट और पैसे निकालने की सुविधा को लेकर है.

यही वजह है कि ज्यादातर निवेशकों के लिए एक अच्छी तरह चुनी गई Small Savings Scheme काफी हो सकती है. हालांकि, अगर अलग-अलग योजनाएं अलग वित्तीय लक्ष्यों को पूरा कर रही हैं, तो एक से ज्यादा स्कीम रखना भी समझदारी हो सकती है.

पहले तय करें पैसा किस लक्ष्य के लिए है

किसी स्कीम को चुनने से पहले सिर्फ ब्याज दर की तुलना करना सही तरीका नहीं है. निवेशक को पहले तीन सवालों का जवाब देना चाहिए. पैसा किस काम के लिए चाहिए, कब चाहिए और क्या तब तक उसे बिना निकाले निवेश में रखा जा सकता है.

लंबी अवधि के लक्ष्य के लिए PPF को ज्यादा उपयुक्त माना गया है. खासतौर पर रिटायरमेंट जैसे लक्ष्य के लिए इसकी लंबी अवधि और टैक्स-फ्री रिटर्न इसे उपयोगी बनाते हैं. युवा नौकरीपेशा निवेशकों के लिए भी PPF एक शुरुआती विकल्प हो सकता है, क्योंकि लंबे समय तक टैक्स-फ्री कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है.

PPF किसके लिए बेहतर?

PPF लंबी अवधि के निवेश और रिटायरमेंट जैसे लक्ष्यों के लिए उपयोगी हो सकता है. इसकी लंबी लॉक-इन अवधि निवेशक को बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान लंबी अवधि की बचत निकालने से भी रोक सकती है.

हालांकि, PPF से तेजी से पैसा बढ़ाने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए. इसका मुख्य उद्देश्य लंबी अवधि में एक स्थिर फिक्स्ड इनकम कॉम्पोनेंट तैयार करना है.

NSC कब काम आ सकता है?

NSC उन निवेशकों के लिए ज्यादा उपयुक्त हो सकता है जिनका करीब पांच साल का कोई तय लक्ष्य है. इसमें सरकारी समर्थन वाला फिक्स्ड रिटर्न मिलता है और सेक्शन 80C के तहत टैक्स डिडक्शन का लाभ भी मिलता है. हालांकि, NSC पर मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल होता है.

इसलिए सिर्फ ज्यादा ब्याज दर देखकर NSC चुनना जरूरी नहीं है. निवेशक को यह भी देखना चाहिए कि टैक्स कटने के बाद वास्तविक रिटर्न कितना रह जाता है.

KVP की भूमिका क्यों सीमित है?

KVP का इस्तेमाल अपेक्षाकृत सीमित जरूरतों के लिए किया जा सकता है. यह ऐसे निवेशक के लिए उपयुक्त हो सकता है जिसने सेक्शन 80C की सीमा पहले ही पूरी कर ली है, उसे आगे टैक्स प्लानिंग की जरूरत नहीं है और वह एक तय अवधि में अनुमानित रकम बनाना चाहता है.

अगर PPF या कोई दूसरा निवेश पहले से उसी लक्ष्य को पूरा कर रहा है, तो सिर्फ पोर्टफोलियो में एक और सरकारी स्कीम जोड़ने से बहुत ज्यादा फायदा नहीं मिल सकता.

SSY बाकी योजनाओं से अलग क्यों है?

SSY यानी सुकन्या समृद्धि योजना बाकी विकल्पों से अलग है, क्योंकि इसका उद्देश्य पात्र बेटी के भविष्य के लिए बचत करना है. बेटी की शिक्षा या शादी जैसे लंबे समय के लक्ष्य के लिए माता-पिता इसे अलग निवेश बकेट के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं.

यही वजह है कि एक ही परिवार में PPF और SSY दोनों रखना समझदारी हो सकती है. PPF माता-पिता के रिटायरमेंट के लिए इस्तेमाल हो सकता है, जबकि SSY बेटी के भविष्य के लिए अलग लक्ष्य पूरा कर सकती है.

सिर्फ ब्याज दर देखकर फैसला न करें

Small Savings Schemes में निवेश करते समय सिर्फ विज्ञापित ब्याज दर को आधार बनाना सही तरीका नहीं है. टैक्स और लिक्विडिटी भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं. PPF और SSY से मिलने वाला रिटर्न टैक्स-फ्री है, जबकि NSC और KVP पर मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल है. बैंक एफडी पर भी आम तौर पर टैक्स लगता है. वहीं डेट म्यूचुअल फंड बाजार से जुड़े होते हैं और इनमें सरकारी गारंटी नहीं होती.

इसलिए निवेशक को पोस्ट-टैक्स रिटर्न, पैसे की जरूरत पड़ने पर निकासी की सुविधा, जोखिम और निवेश की अवधि को साथ में देखना चाहिए.

इमरजेंसी के पैसे के लिए ये स्कीमें सही नहीं

लिक्विडिटी इन योजनाओं का एक बड़ा अंतर है. Small Savings Schemes में आम तौर पर बैंक एफडी और डेट फंड की तुलना में पैसे निकालने के ज्यादा प्रतिबंध होते हैं. PPF में तय अवधि के बाद ही आंशिक निकासी की सुविधा मिलती है. NSC और KVP को मुख्य रूप से मैच्योरिटी तक रखने के लिए बनाया गया है, जबकि SSY में भी निकासी को लेकर नियम और सीमाएं हैं.

इसलिए जिस पैसे की जरूरत कभी भी इमरजेंसी में पड़ सकती है, उसे ऐसी योजनाओं में लॉक करना सही नहीं हो सकता. इमरजेंसी फंड के लिए ज्यादा आसानी से उपलब्ध विकल्पों पर विचार करना जरूरी है.

क्या PPF, NSC और KVP तीनों लेना जरूरी है?

ज्यादातर निवेशकों के लिए इसका जवाब नहीं है. सिर्फ डायवर्सिफिकेशन के नाम पर PPF, NSC और KVP में एक साथ पैसा लगाने से बहुत ज्यादा फायदा नहीं मिलता, क्योंकि तीनों सरकारी समर्थन वाले फिक्स्ड इनकम विकल्प हैं.

वहीं SSY का मामला अलग है, क्योंकि इसका उद्देश्य ही अलग है. पात्र बेटी के भविष्य के लिए निवेश करने वाले माता-पिता के लिए SSY एक अलग निवेश बकेट हो सकती है.

युवा निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि पूरी बचत Small Savings Schemes में डालना जरूरी नहीं है. इमरजेंसी फंड के अलावा लंबी अवधि में संपत्ति बनाने के लिए निवेशक के जोखिम प्रोफाइल के अनुसार इक्विटी जैसे ग्रोथ एसेट्स की भी जरूरत हो सकती है.

एक लक्ष्य के लिए एक स्कीम का फॉर्मूला

Small Savings Schemes की सही संख्या इस बात पर निर्भर करती है कि निवेशक के कितने अलग वित्तीय लक्ष्य हैं. अगर कोई युवा नौकरीपेशा व्यक्ति रिटायरमेंट के लिए लंबी अवधि का फंड बना रहा है तो उसके लिए PPF पर्याप्त हो सकता है.

वहीं बेटी के भविष्य के लिए बचत करने वाले माता-पिता PPF के साथ SSY को अलग लक्ष्य के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. करीब पांच साल के किसी तय लक्ष्य के लिए NSC उपयोगी हो सकता है, जबकि KVP की जरूरत अपेक्षाकृत सीमित निवेशकों को हो सकती है. इसलिए सिर्फ इसलिए चारों योजनाओं में निवेश करना जरूरी नहीं है कि ये विकल्प उपलब्ध हैं. सही तरीका है कि हर स्कीम को एक अलग वित्तीय लक्ष्य से जोड़ा जाए.

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