₹2500 की नौकरी से ₹6 करोड़ की दौलत तक! गुजरात के शख्स ने ऐसे बनाया करोड़ों का साम्राज्य, सीखें 7 सबक

2500 रुपये महीने की सैलरी से शुरुआत करने वाले अहमदाबाद के ग्रिजेश अगल ने 51 साल की उम्र में 6 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति बनाई. 2008 में SIP बंद करने से लेकर 2020 की गिरावट में निवेश जारी रखने तक, उनकी कहानी में निवेशकों के लिए 7 बड़े सबक छिपे हैं.

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सिर्फ 2500 रुपये महीने की सैलरी से शुरुआत करके 51 साल की उम्र में 6 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति बनाना आसान नहीं है. लेकिन अहमदाबाद के ग्रिजेश अगल की कहानी बताती है कि बड़ी दौलत बनाने के लिए शुरुआत में बड़ी सैलरी होना जरूरी नहीं. उन्होंने नौकरी के साथ निवेश शुरू किया, कई बार मुश्किल दौर देखा, कर्ज चुकाया, SIP बढ़ाई और समय के साथ अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा निवेश में लगाते गए

Financial express की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रिजेश ने जून 1998 में उदयपुर में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के तौर पर करियर शुरू किया था और उनकी शुरुआती सैलरी सिर्फ 2500 रुपये महीना थी. आज उनके पास म्यूचुअल फंड, शेयर, रियल एस्टेट, सोना और दूसरे निवेशों को मिलाकर 6 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है. हालांकि, यह सफर बिल्कुल सीधा नहीं था. 2008 की बाजार गिरावट में उनका निवेश करीब 70% तक गिर गया और उन्होंने अपनी SIP बंद कर दी. 2020 में कोविड के दौरान उनका पोर्टफोलियो करीब ₹90 लाख से घटकर ₹65 लाख रह गया, लेकिन इस बार उन्होंने निवेश जारी रखा.

₹2500 की नौकरी से शुरू हुआ सफर, फिर बढ़ती गई कमाई

ग्रिजेश राजस्थान के उदयपुर जिले के सालुंबर के एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं. उनके माता-पिता सरकारी शिक्षक थे और वह चार भाई-बहनों में से एक हैं. उन्होंने बी.फार्मा और सेल्स एंड मार्केटिंग में एमबीए किया.

उनकी पहली नौकरी फार्मा सेल्स में लगी. शुरुआती सैलरी सिर्फ 2500 रुपये थी. 2004 में शादी के बाद जब वह अहमदाबाद पहुंचे, तो वहां कारोबारियों, डॉक्टरों और वरिष्ठ मैनेजरों के संपर्क में आने से पैसे और निवेश को लेकर उनकी सोच बदली. उन्हें पहली बार समझ आया कि इक्विटी में निवेश भी लंबे समय में संपत्ति बनाने का जरिया बन सकता है. इसके बाद उनका करियर भी तेजी से आगे बढ़ा. 2009 में वह Eris Lifesciences में रीजनल मैनेजर बने और उनकी सालाना CTC बढ़कर 6 लाख रुपये हो गई. बाद में यह 9 लाख, 15 लाख और फिर 21 लाख रुपये तक पहुंची यानी उनकी संपत्ति बनाने की कहानी सिर्फ निवेश की नहीं, बल्कि लगातार बढ़ती कमाई और उस बढ़ी हुई कमाई का एक हिस्सा निवेश में लगाने की भी है.

2008 में बाजार गिरा तो SIP बंद कर दी, लेकिन यही गलती दोबारा नहीं की

2006 में ग्रिजेश की मासिक कमाई 15000 रुपये थी. उन्होंने म्यूचुअल फंड में 20000 रुपये की एकमुश्त रकम लगाई और हर महीने 7000 रुपये की SIP शुरू की. यह उनकी मासिक सैलरी का करीब 47% था. लेकिन उस समय उनके ऊपर होम लोन और कार लोन था और दो बच्चों की जिम्मेदारी भी थी. 2008 के बाजार क्रैश में उनका निवेश करीब 70% गिर गया. आर्थिक दबाव बढ़ा तो उन्होंने SIP बंद कर दी.

यह अनुभव उनके लिए बड़ा सबक बना. सिर्फ जल्दी निवेश शुरू करना काफी नहीं है. आर्थिक स्थिति ऐसी भी होनी चाहिए कि बाजार में बड़ी गिरावट आने पर निवेश बंद करने की नौबत न आए.

कर्ज चुकाया और बची EMI को फिर निवेश में लगाया

Eris में नौकरी और बढ़ी हुई सैलरी के बाद ग्रिजेश ने होम लोन चुकाने और निवेश दोबारा शुरू करने की योजना बनाई. उन्होंने अक्टूबर 2010 में अपना पहला होम लोन प्रीपे कर दिया. इसके बाद EMI का पैसा बचने लगा और उन्होंने दिसंबर 2011 में 7000 रुपये की SIP फिर शुरू कर दी.

इसके बाद SIP लगातार बढ़ती गई.

₹7,000 → ₹15,000 → ₹30,000 → ₹50,000 → ₹57,000.

2014 में SIP ₹15,000 हुई, 2016 में ₹30,000 और 2019 में ₹50,000. 2020 में दूसरा होम लोन बंद करने के बाद उन्होंने SIP बढ़ाकर ₹57,000 महीना कर दी.

2020 में उन्होंने बचे हुए करीब 20 लाख रुपये के लोन को अपनी बचत और ULIP की सरेंडर वैल्यू से चुकाया. इससे EMI का पैसा भी निवेश के लिए उपलब्ध हो गया. इसी दौरान वह अपने बड़े बेटे की B.Tech की पढ़ाई पर करीब ₹7 लाख सालाना खर्च कर रहे थे.

सैलरी बढ़ी तो SIP भी बढ़ाते गए

ग्रिजेश की कहानी का सबसे सीधा सबक यही है कि सैलरी बढ़ने पर उन्होंने खर्च बढ़ाने के बजाय निवेश की रकम भी बढ़ाई.

2016 में उनकी सालाना CTC 15 लाख रुपये पहुंच चुकी थी. निवेश की समीक्षा के दौरान उन्हें पता चला कि उनके सेविंग्स अकाउंट में करीब 25 लाख रुपये पड़े हैं. उन्होंने इस रकम को एकमुश्त निवेश किया और अपनी SIP 15000 रुपये से बढ़ाकर 30000 रुपये कर दी. 2018 में उनकी CTC 21 लाख रुपये हो गई और अगले साल SIP बढ़कर 50000 रुपये हो गई यानी उनकी संपत्ति सिर्फ किसी एक शानदार निवेश से नहीं बनी. इसमें कमाई बढ़ना, बचत बढ़ना, SIP बढ़ना और लंबे समय तक निवेश बने रहना अहम रहा.

₹25 लाख बैंक में पड़े थे, निवेश की समीक्षा के बाद लगाए

ग्रिजेश के पास 2016 में करीब 25 लाख रुपये सेविंग्स अकाउंट में पड़े थे. वह पहले से SIP चला रहे थे, लेकिन इतनी बड़ी रकम निवेश से बाहर थी. म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर के साथ पोर्टफोलियो की समीक्षा के दौरान उन्होंने इस रकम पर चर्चा की और करीब 25 लाख रुपये एकमुश्त निवेश कर दिए. साथ ही SIP को 30000 रुपये कर दिया.

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर बची हुई रकम शेयर बाजार में लगा देनी चाहिए. इमरजेंसी फंड और आने वाले समय की जरूरतों के लिए पैसा आसानी से उपलब्ध रहना जरूरी है. लेकिन जिस पैसे की लंबे समय तक जरूरत नहीं है, उसे बिना किसी उद्देश्य के सेविंग्स अकाउंट में पड़े रहने देने पर जरूर विचार करना चाहिए.

2020 में पोर्टफोलियो गिरा, लेकिन इस बार नहीं बेचा

2008 और 2020 की बाजार गिरावट के बीच ग्रिजेश की सोच में बड़ा बदलाव आया. 2008 में निवेश करीब 70% गिरने पर उन्होंने SIP बंद कर दी थी. लेकिन मार्च 2020 में जब कोविड के दौरान उनका पोर्टफोलियो 90 लाख रुपये से घटकर 65 लाख रुपये रह गया, तब उन्होंने फिर निवेश निकालने के बारे में सोचा, लेकिन इस बार उन्होंने ऐसा नहीं किया. वह SIP जारी रखते रहे.

दिसंबर 2011 में SIP दोबारा शुरू करने के बाद उनका कहना है कि उन्होंने म्यूचुअल फंड निवेश से कोई रकम नहीं निकाली है. फिलहाल उनका म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो करीब 2.78 करोड़ रुपये का है, जबकि इसमें निवेश की गई रकम करीब 1.34 करोड़ रुपये है. उनका बताया गया लाभ करीब 1.44 करोड़ रुपये है.

हर फैसला सही नहीं था, फिर भी दौलत बनती गई

ग्रिजेश की कहानी की एक खास बात यह भी है कि उन्होंने हर वित्तीय फैसला बिल्कुल सही नहीं लिया. Eris में नौकरी के दौरान वह कंपनी के ESOPs नहीं ले पाए, क्योंकि उन्होंने 20 लाख होम लोन चुकाने में लगा दिए थे. उनका अनुमान है कि उन ESOPs की कीमत आज करीब 1.40 करोड़ रुपये होती.

इसके अलावा उन्होंने 2008 में SIP बंद की थी और इक्विटी के साथ-साथ प्रॉपर्टी में भी निवेश किया. लेकिन लंबे समय तक अच्छे फैसलों को दोहराने से उनका पूरा निवेश सिस्टम काम करता रहा.

आज कहां-कहां लगी है उनकी दौलत?

आज ग्रिजेश के पास तीन फ्लैट, एक रेजिडेंशियल प्लॉट और करीब 200 ग्राम सोना है. उनके म्यूचुअल फंड की वैल्यू करीब 2.78 करोड़, डायरेक्ट शेयर करीब 37.9 लाख, PPF करीब 8 लाख रुपये, NPS करीब 4.75 लाख रुपये और फिक्स्ड डिपॉजिट करीब 12 लाख रुपये है. उनकी LIC Jeevan Shree पॉलिसी फरवरी 2027 में मैच्योर होने वाली है और इसकी वैल्यू करीब 19.87 लाख रुपये होगी. घोषित संपत्तियों को मिलाकर उनकी कुल संपत्ति 6 करोड़ रुपये से ज्यादा है.

2021 में Eris छोड़ने के बाद उन्होंने अपना फार्मा कारोबार शुरू किया. वह 58 साल की उम्र तक काम करना चाहते हैं और उनका लक्ष्य रिटायरमेंट के लिए 7.5 करोड़ से 10 करोड़ रुपये का फंड तैयार करना है.

₹2,500 से ₹6 करोड़ तक पहुंचने के 7 बड़े सबक

ग्रिजेश की पूरी कहानी को देखें तो उनकी दौलत किसी एक शेयर या निवेश से नहीं बनी. उनकी कमाई बढ़ी, बचत बढ़ी, SIP बढ़ती गई, कर्ज धीरे-धीरे कम हुआ और निवेश को लंबे समय तक जारी रखा गया.

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सबसे बड़ा सबक यह है कि निवेश की यात्रा में गलतियां होना सामान्य है. उन्होंने भी एक समय SIP बंद की, निवेश का मौका गंवाया, लेकिन बाद में अपनी रणनीति बदली और निवेश जारी रखा.