Adani Enterprises फिर बना Nifty 50 का सरताज! 2026 में अब तक 34% चढ़ा शेयर; क्या है वजह?

Adani Enterprises का शेयर 2026 में अब तक 34.38 फीसदी चढ़ चुका है और Nifty 50 में सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाला शेयर बनने की राह पर है. 2022 में भी यह इंडेक्स का सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला शेयर था. निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी, इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार, कानूनी मोर्चे पर राहत और MSCI के बदलावों से शेयर को सहारा मिला है.

अडानी एंटरप्राइजेज Image Credit: @Canva/Money9live

Adani Enterprises के शेयर ने एक बार फिर भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े इंडेक्स Nifty 50 में अपनी मजबूत वापसी दर्ज कराई है. शेयर 2026 में अब तक करीब 34.38 फीसदी तक चढ़ चुका है और मौजूदा रफ्तार बनी रही तो यह साल का सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाला Nifty 50 शेयर बन सकता है. कंपनी ने आखिरी बार 2022 के आखिरी में यह मुकाम हासिल किया था.

यह वापसी ऐसे समय हुई है जब Adani Group पिछले कुछ सालों से शॉर्ट-सेलर रिपोर्ट, कानूनी मामलों और नियामकीय जांच जैसी कई चुनौतियों से गुजर चुका है. अब निवेशकों की दिलचस्पी दोबारा Adani Enterprises और समूह की दूसरी कंपनियों में बढ़ती दिख रही है.

2022 में भी सबसे आगे था Adani Enterprises

Bloomberg के आंकड़ों के मुताबिक, 2022 में Adani Enterprises Nifty का सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाला शेयर रहा था और उस साल इसने 126 फीसदी का रिटर्न दिया था. इसके बाद 2023 और 2024 में Trent ने क्रमश: 126 फीसदी और 133 फीसदी का रिटर्न दिया.

2025 में Shriram Finance 72% रिटर्न के साथ Nifty 50 का सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला शेयर रहा. वहीं 2026 में 17 अगस्त तक Adani Enterprises करीब 34% चढ़ चुका है.

सालNifty 50 का सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाला शेयररिटर्न
2022Adani Enterprises126%
2023Trent126%
2024Trent133%
2025Shriram Finance72%
2026Adani Enterprises34%

निवेशकों का भरोसा फिर बढ़ रहा?

Adani Enterprises में तेजी के साथ कंपनी में कुछ बड़े संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी भी बढ़ी है. रिपोर्ट के मुताबिक Capital Group, Goldman Sachs और SBI Funds Management ने कंपनी के शेयर खरीदे हैं. जून में Morgan Stanley ने भी Adani Enterprises पर कवरेज शुरू करते हुए इसे Overweight रेटिंग दी थी. इससे कंपनी को लेकर बाजार का नजरिया बेहतर होने का संकेत मिला.

Adani Group की इंफ्रास्ट्रक्चर कहानी पर दांव

Adani Enterprises की तेजी को भारत में तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र से भी जोड़कर देखा जा रहा है. समूह के बंदरगाह, एयरपोर्ट, बिजली और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है. समूह की AdaniConneX, जो EdgeConneX के साथ डेटा सेंटर कारोबार का संयुक्त उपक्रम है, ने हाल ही में अपने विस्तार के लिए करीब 80 करोड़ डॉलर का कर्ज हासिल किया है.

कानूनी मोर्चे पर भी मिली राहत

Adani Group को पिछले हफ्ते एक और बड़ी राहत मिली. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की एक जिला अदालत ने Adani से जुड़े प्रतिभूति धोखाधड़ी के आरोपों को स्थायी रूप से खारिज कर दिया. यह मामला 2024 से समूह पर दबाव बना रहा था.

इसके अलावा MSCI की हालिया समीक्षा में Adani Group की कुछ कंपनियों के Free-Float Factor बढ़ाए गए हैं. इससे MSCI के इंडेक्स में इन कंपनियों का वजन बढ़ सकता है और इंडेक्स को ट्रैक करने वाले फंडों की ओर से खरीदारी बढ़ सकती है.

लेकिन जोखिम अभी खत्म नहीं हुए

Adani Enterprises की तेजी के बावजूद कंपनी के सामने कुछ जोखिम अभी भी बने हुए हैं. Bloomberg के आंकड़ों के मुताबिक, 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य वाली भारतीय कंपनियों में Adani Enterprises को सिर्फ चार ब्रोकरेज कवर कर रहे हैं, जो सबसे कम संख्या है. वहीं जून में कंपनी में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई थी. हालांकि, इसका एक कारण इस साल की शुरुआत में विदेशी फंडों की ओर से भारतीय शेयर बाजार में निवेश कम करना भी रहा है.

Morgan Stanley ने भी अपनी जून की रिपोर्ट में कहा था कि इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को कमाई देने में कई साल लग सकते हैं. ऐसे में कंपनी को कर्ज दोबारा जुटाने और नियामकीय बदलावों से जुड़े जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है.

इस साल Adani Group की कंपनियों की दौलत ₹4 लाख करोड़ बढ़ी

इन तमाम चुनौतियों के बावजूद Adani Group की कंपनियों के बाजार मूल्य में इस साल 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. इस तेजी ने Gautam Adani को एक बार फिर एशिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में शीर्ष पर पहुंचने में मदद की है.

हालांकि, निवेशकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि Adani Enterprises की मौजूदा तेजी के पीछे सिर्फ शेयर बाजार की खरीदारी नहीं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार, निवेशकों की वापसी, कानूनी मोर्चे पर राहत और कंपनी के विस्तार की उम्मीद जैसे कई कारण हैं. साथ ही, कर्ज, नियामकीय बदलाव और विदेशी निवेशकों की कम हिस्सेदारी जैसे जोखिमों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.



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