Bond SIP में निवेश का बना रहे हैं प्लान, जानें यह Equity SIP से कितना अलग और कैसे करता है काम
बॉन्ड SIP नियमित निवेश का एक नया विकल्प है, लेकिन यह इक्विटी SIP की तरह काम नहीं करता. इक्विटी SIP बाजार की तेजी और गिरावट का फायदा उठाता है, जबकि बॉन्ड SIP अलग-अलग ब्याज दरों पर निवेश कर यील्ड को संतुलित करने में मदद करता है. इसमें खरीदे गए बॉन्ड सीधे डीमैट खाते में आते हैं और ब्याज बैंक खाते में मिलता है.

SIP के जरिए लाखों लोग हर महीने इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं. अब निवेशकों के लिए बॉन्ड SIP का विकल्प भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. इसके जरिए सरकारी बॉन्ड, कॉरपोरेट बॉन्ड और डेट इंस्ट्रूमेंट में रेगुलर निवेश किया जा सकता है. हालांकि बॉन्ड SIP का तरीका इक्विटी SIP से पूरी तरह अलग होता है. अगर आप इसमें निवेश करने की सोच रहे हैं तो पहले इसकी मॉडल अप्रेंटिस और रिस्क को समझना जरूरी है.
Equity SIP और Bond SIP में क्या है अंतर
इक्विटी SIP का फायदा शेयर बाजार की तेजी और गिरावट से मिलता है. बाजार गिरने पर निवेशक को ज्यादा यूनिट मिलती हैं और बाजार चढ़ने पर कम यूनिट मिलती हैं. इससे लंबे समय में औसत खरीद कीमत कम हो जाती है. वहीं बॉन्ड SIP में कीमतों में ज्यादा उतार चढ़ाव नहीं होता. इसमें हर महीने उस समय की ब्याज दर पर निवेश होता है, जिससे अलग- अलग ब्याज दरों का फायदा मिल सकता है.
Bond SIP कैसे करता है काम
बॉन्ड SIP शुरू करने के लिए निवेशक को पहले बॉन्ड का प्रकार चुनना होता है. इसमें क्रेडिट रेटिंग, निवेश अवधि और अनुमानित यील्ड को ध्यान में रखा जाता है. इसके बाद हर महीने तय तारीख पर खाते से पैसा अपने आप कट जाता है. खरीदे गए बॉन्ड सीधे निवेशक के डीमैट खाते में जमा होते हैं. इन पर मिलने वाला ब्याज सीधे बैंक खाते में आता है.
ब्याज दर में बदलाव का मिलता है फायदा
बॉन्ड SIP का सबसे बड़ा फायदा यह है कि निवेशक को हर महीने अलग- अलग ब्याज दर पर निवेश का मौका मिलता है. अगर भविष्य में ब्याज दर घटती है तो पहले खरीदे गए बॉन्ड ज्यादा यील्ड देते हैं. वहीं अगर ब्याज दर बढ़ती है तो बाद में खरीदे गए बॉन्ड अधिक रिटर्न दे सकते हैं. इससे सही समय पर निवेश करने की चिंता काफी हद तक कम हो जाती है.
निवेश से पहले इन जोखिमों को समझें
अगर कोई बॉन्ड ज्यादा यील्ड दे रहा है तो उसका जोखिम भी ज्यादा हो सकता है. कम क्रेडिट रेटिंग वाले बॉन्ड में डिफॉल्ट की आशंका अधिक रहती है. इसके अलावा बॉन्ड बाजार में तरलता भी सीमित हो सकती है. अगर निवेशक मैच्योरिटी से पहले बॉन्ड बेचना चाहता है तो उसे कम कीमत मिल सकती है. इसलिए बॉन्ड SIP को लंबे समय के नजरिए से देखना बेहतर माना जाता है.
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किन निवेशकों के लिए सही है Bond SIP
जो निवेशक रेगुलर इनकम चाहते हैं और शेयर बाजार के ज्यादा उतार- चढ़ाव से बचना चाहते हैं, उनके लिए बॉन्ड SIP एक अच्छा विकल्प हो सकता है. यह निवेश में अनुशासन बनाए रखने के साथ- साथ अलग- अलग ब्याज दरों का फायदा भी देता है. हालांकि इसमें निवेश करने से पहले क्रेडिट रेटिंग, यील्ड, रिस्क और निवेश अवधि का अच्छी तरह आकलन करना जरूरी है.