₹20,000 करोड़ की सरकारी योजना से बदलेगी कार्बन इकोनॉमी! इन 3 शेयरों पर रखें नजर, एक ने दिया 231% तक का रिटर्न
भारत सरकार ने कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (CCUS) को बढ़ावा देने के लिए 20,000 करोड़ रुपये की योजना शुरू की है. इससे Thermax, JSW Steel और CMR Green Technologies जैसी कंपनियों को फायदा मिल सकता है. इन कंपनियों का कारोबार कार्बन कैप्चर, कार्बन क्रेडिट और रीसाइक्लिंग से जुड़ा है. इनमें से एक शेयर ने पिछले पांच वर्षों में 231% तक का रिटर्न दिया है.

Best Green Energy Stocks: भारत सरकार देश को 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन (Net Zero Emission) का लक्ष्य हासिल कराने के लिए कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (CCUS) तकनीक को बढ़ावा दे रही है. केंद्रीय बजट 2026 में सरकार ने अगले पांच सालों के लिए इस क्षेत्र में 20,000 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा की है. इस पहल का मकसद बिजली, स्टील, सीमेंट और रिफाइनरी जैसे अधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों से निकलने वाले कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन को कम करना है.
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जक है. ऐसे में सरकार की यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण बल्कि नई औद्योगिक तकनीकों और कारोबारी अवसरों को भी बढ़ावा दे सकती है. इस थीम से जुड़ी तीन लिस्टेड कंपनियां निवेशकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बन सकती हैं.
थेरमैक्स (Thermax) लिमिटेड का फोकस स्वदेशी कार्बन कैप्चर तकनीक पर
थेरमैक्स (Thermax) लिमिटेड कंपनी ने कार्बन कैप्चर को अपने एनर्जी ट्रांजिशन कारोबार का प्रमुख हिस्सा बनाया है. कंपनी ग्रीन हाइड्रोजन और बायोफ्यूल के साथ-साथ कार्बन कैप्चर तकनीक पर भी तेजी से काम कर रही है. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की मंजूरी से कंपनी कोयले से मेथनॉल बनाने वाली परियोजना के साथ CCUS तकनीक विकसित कर रही है.
कंपनी ने इस दिशा में IIT दिल्ली और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के साथ समझौते किए हैं. इसका मकसद ऐसी स्वदेशी तकनीक विकसित करना है, जिससे कैप्चर किए गए CO₂ को मेथनॉल और दूसरी उपयोगी प्रोडक्ट में बदला जा सके. कंपनी का कहना है कि इस तकनीक में स्टील, सीमेंट और बिजली क्षेत्र की कंपनियों की रुचि बढ़ रही है.
थेरमैक्स के फाइनेंशियल्स रहे मजबूत
वित्त वर्ष 2025-26 में थेरमैक्स का प्रदर्शन मजबूत रहा. कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 3.1 फीसदी बढ़कर 10694 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. ऑपरेटिंग प्रॉफिट 910 करोड़ रुपये से बढ़कर 1038 करोड़ रुपये हो गया, जबकि ऑपरेटिंग मार्जिन 11 फीसदी से बढ़कर 12 फीसदी हो गया. कंपनी का नेट प्रॉफिट भी 627 करोड़ रुपये से बढ़कर 720 करोड़ रुपये रहा.
शेयर का हाल?
थेरमैक्स का मार्केट कैप 23 जुलाई 8 बजे तक 56224 करोड़ रुपये है. कंपनी का शेयर 22 जुलाई के बंद भाव के अनुसार 4718 रुपये पर कारोबार कर रहा था. पिछले 52 हफ्तों में इसने 5278 रुपये का हाई और 2,743 रुपये का लो लेवल छुआ है. कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो 102 है, जबकि बुक वैल्यू 466 रुपये प्रति शेयर है. थेरमैक्स का ROCE 13.9% और ROE 10.6% है. वहीं, कंपनी 0.30% का डिविडेंड यील्ड देती है और इसके शेयर का फेस वैल्यू 2 रुपये है.
5 साल में दिया 231 फीसदी का रिटर्न
कंपनी के शेयर ने हालिया समय में निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है. पिछले एक सप्ताह में शेयर करीब 2% चढ़ा है. वहीं, तीन महीने में इसने 16% और छह महीने में 62% से अधिक का रिटर्न दिया है. पिछले एक साल में शेयर ने करीब 19% का रिटर्न दिया है. अगर लंबी अवधि की बात करें तो पिछले पांच सालों में कंपनी के शेयर ने करीब 231 फीसदी का शानदार रिटर्न देकर निवेशकों की दौलत कई गुना बढ़ाई है.
टेबल से समझें
| अवधि | रिटर्न |
|---|---|
| 1 सप्ताह | 2% |
| 3 महीने | 16% |
| 6 महीने | 62% से अधिक |
| 1 साल | 19% |
| 5 साल | 231% |
JSW Steel Ltd बड़े लेवल पर CCUS तकनीक अपनाने की तैयारी में
JSW स्टील भी कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए CCUS तकनीक पर तेजी से निवेश कर रही है. कंपनी महाराष्ट्र के सलाव संयंत्र में प्रतिदिन 100 टन क्षमता वाला कार्बन कैप्चर प्लांट चला रही है, जहां कैप्चर किए गए CO₂ का व्यावसायिक उपयोग किया जाता है.
इसके अलावा कंपनी Carbon Clean के साथ मिलकर विजयनगर स्टील प्लांट में नई मॉड्यूलर तकनीक लागू करने पर काम कर रही है. यह परियोजना हर साल लगभग एक लाख टन CO₂ उत्सर्जन कम करने की क्षमता रखती है. JSW ने IIT खड़गपुर के साथ भी कम लागत वाली CCUS तकनीक विकसित करने के लिए साझेदारी की है.
कंपनी के शेयर का हाल ?
JSW स्टील का मार्केट कैप 3.09 लाख करोड़ रुपये से अधिक है. 22 जुलाई के बंद भाव के अनुसार कंपनी का शेयर 1,267 रुपये पर बंद हुआ. पिछले 52 हफ्तों में इसने 1,328 रुपये का हाई और 1,017 रुपये का लो लेवल छुआ है. कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो 25.7 है, जबकि बुक वैल्यू 409 रुपये प्रति शेयर है. कंपनी का ROCE 11% और ROE 10.2% है. वहीं, JSW स्टील 0.56% का डिविडेंड यील्ड देती है और इसके शेयर का फेस वैल्यू 1 रुपये है.
कंपनी के शेयर ने पिछले छह महीनों में करीब 6% का रिटर्न दिया है. वहीं, एक साल में इसने 22% का रिटर्न दिया है. अगर लंबी अवधि की बात करें तो पिछले पांच वर्षों में भी कंपनी के शेयर ने करीब 22% का रिटर्न दिया है.
CMR ग्रीन टेक्नॉलाजी को कार्बन क्रेडिट से भविष्य में मिल सकता है फायदा
एल्यूमिनियम रीसाइक्लिंग क्षेत्र की कंपनी CMR ग्रीन टेक्नोलॉजीज कार्बन क्रेडिट के मामले में मजबूत स्थिति में है. कंपनी के पास अप्रैल 2026 तक करीब 2.7 लाख टन कार्बन क्रेडिट का भंडार था और हर साल इसमें 70,000 से 80,000 टन की बढ़ोतरी हो रही है. हालांकि फिलहाल संगठित कार्बन मार्केट नहीं होने की वजह से इससे आय दर्ज नहीं की जा रही है.
कंपनी का मानना है कि भविष्य में जब कार्बन क्रेडिट का बाजार विकसित होगा, तब यह बड़ा राजस्व स्रोत बन सकता है. CMR रीसाइक्लिंग के जरिए प्राथमिक एल्यूमिनियम उत्पादन की तुलना में 95% कम बिजली और 92% कम CO₂ उत्सर्जन करती है, जिससे इसका कारोबार पर्यावरण के लिहाज से भी मजबूत माना जाता है.
कंपनी के शेयर का हाल?
CMR ग्रीन टेक्नोलॉजीज का मार्केट कैप 4,778 करोड़ रुपये है. 22 जुलाई के बंद भाव के अनुसार कंपनी का शेयर 218 रुपये पर बंद हुआ. पिछले 52 हफ्तों में इसने 275 रुपये का हाई और 213 रुपये का लो लेवल छुआ है. कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो 22.5 है. कंपनी का ROCE 14% और ROE 14.6% है. फिलहाल कंपनी कोई डिविडेंड नहीं देती है, इसलिए इसका डिविडेंड यील्ड शून्य है. वहीं, कंपनी के शेयर का फेस वैल्यू 2 रुपये है.
कार्बन इकोनॉमी में नए अवसर
ऐसे में जैसे-जैसे भारत कार्बन कैप्चर तकनीक और कार्बन मार्केट को विकसित करेगा, वैसे-वैसे इस क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के लिए नए अवसर बनेंगे. थेरमैक्स, JSW स्टील और CMR ग्रीन तीनों अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही हैं, जिससे निवेशकों को कार्बन वैल्यू चेन के विभिन्न हिस्सों में निवेश का अवसर मिल सकता है.
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