इंडिगो और स्पाइसजेट के शेयरों में 7 फीसदी तक का उछाल, क्रूड की कीमतों में गिरावट से दौड़ पड़े स्टॉक्स

Indigo Share Price Today: ओवरनाइट ट्रेडिंग के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई. निवेशक इस बात को लेकर काफी आशावादी हो गए हैं कि ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल के विवाद का कोई राजनयिक समाधान निकल सकता है.

इंडिगो के शेयर में उछाल. Image Credit: @Money9live

Indigo Share Price Today: गुरुवार को शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भारी गिरावट के बीच, इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो की पैरेंट कंपनी) और स्पाइसजेट के शेयरों में 7 फीसदी तक की बंपर तेजी दर्ज कई गई. ओवरनाइट ट्रेडिंग के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई. ब्रेंट क्रूड लगभग 9% गिरकर 95 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया, जो पिछले दो महीनों का सबसे निचला स्तर है.

अमेरिका और ईरान संघर्ष

निवेशक इस बात को लेकर काफी आशावादी हो गए हैं कि ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल के विवाद का कोई राजनयिक समाधान निकल सकता है. इसके अलावा, ऐसी उम्मीदें भी हैं कि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर बातचीत के जरिए समझौता करने का राजनीतिक दबाव बढ़ा सकते हैं, जिसका असर भी तेल की कीमतों पर पड़ा है.

शेयरों में कितनी तेजी?

BSE पर स्पाइसजेट के शेयर 2 फीसदी बढ़कर 7.80 रुपये पर पहुंच गए, जबकि पिछली क्लोजिंग 7.64 रुपये थी. इसी तरह, BSE पर इंडिगो के शेयरों में 7 फीसदी तक की तेजी आई और ये 5485 रुपये पर पहुंच गए.

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए पॉजिटिव हो सकती है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का 70% से अधिक हिस्सा आयात करता है. ऊर्जा की कीमतों में लगातार कमी आने से देश के इंपोर्ट बिल, घरेलू महंगाई और चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) पर दबाव कम हो सकता है.

कच्चे तेल से कैसे लिंक है एयरलाइंस का मुनाफा

कच्चे तेल की कीमतें एयरलाइन शेयरों से सीधे तौर पर जुड़ी होती हैं, जिसका मुख्य कारण ‘जेट फ्यूल’ (विमान ईंधन) का खर्च है, जो एयरलाइंस के लिए सबसे बड़े ऑपरेशनल कॉस्ट में से एक है. जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो एयरलाइन शेयरों की कीमतें गिर जाती हैं क्योंकि निवेशक कम नेट इनकम की उम्मीद करने लगते हैं.

इसके विपरीत, जब कच्चे तेल की कीमतें गिरती हैं, तो एयरलाइन शेयरों में आमतौर पर तेजी आती है क्योंकि ऑपरेशनल खर्च कम हो जाते हैं.

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