NSE Share में 29% तक तेजी की उम्मीद, Jefferies ने दिया ₹2300 का टारगेट, इन फैक्टर से भाग सकता है स्टाक

इसके अलावा, बाजार में गिरावट और कारोबार की मात्रा में कमी से भी कंपनी की कमाई प्रभावित हो सकती है. Jefferies ने कमजोरी के सिनेरियो में 1600 रुपये का टारगेट दिया है. इसलिए निवेशकों को केवल 2300 रुपये के संभावित टारगेट को देखकर फैसला नहीं करना चाहिए. कंपनी की कमाई, रेगुलेटरी बदलाव और शेयर की मौजूदा वैल्यूएशन को ध्यान में रखना जरूरी है.

Jefferies ने NSE के शेयर के लिए तेजी के सिनेरियो में 2300 रुपये का टारगेट दिया. Image Credit: @Money9live

शेयर बाजार में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के शेयर पर ब्रोकरेज फर्म Jefferies India की रिपोर्ट अहम है. ब्रोकरेज को उम्मीद है कि बाजार में तेजी लौटने की स्थिति में NSE के शेयर में मौजूदा स्तर से करीब 29 फीसदी तक रिटर्न मिल सकता है. Jefferies ने तेजी के सिनेरियो में शेयर के लिए 2300 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है. वहीं, सामान्य परिस्थितियों में शेयर का भाव 2085 रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. हालांकि, बाजार में कमजोरी आने पर शेयर 1600 रुपये तक भी फिसल सकता है. ऐसे में निवेशकों के लिए ब्रोकरेज के टारगेट के साथ उसके पीछे की वजहों को समझना जरूरी है.

NSE के शेयर पर Jefferies का कितना टारगेट?

Jefferies India ने NSE के शेयर के लिए तीन संभावित सिनेरियो पेश किए हैं. बुधवार को NSE का शेयर BSE पर 1777.05 रुपये पर बंद हुआ था. इसी भाव के आधार पर ब्रोकरेज के अलग-अलग टारगेट से संभावित रिटर्न और गिरावट का अंदाजा लगाया जा सकता है.

सिनेरियोटारगेट प्राइससंभावित रिटर्न या गिरावट
तेजी का सिनेरियो2,300 रुपयेकरीब 29.4% तेजी
सामान्य सिनेरियो2,085 रुपयेकरीब 17.3% तेजी
कमजोरी का सिनेरियो1,600 रुपयेकरीब 10% गिरावट

ये अनुमान 1777.05 रुपये के बंद भाव पर आधारित हैं. वास्तविक रिटर्न शेयर की कीमत में बदलाव और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा.

NSE के शेयर पर क्यों बुलिश है Jefferies?

Jefferies के मुताबिक, NSE को शेयर बाजार में बढ़ते निवेशकों और कारोबार के विस्तार का फायदा मिल सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड के बाद भारत में सीधे इक्विटी में निवेश करने वाले लोगों की संख्या करीब चार गुना बढ़ी है. इसके बावजूद देश की कुल आबादी के मुकाबले इक्विटी निवेशकों की पहुंच करीब 3 फीसदी है, जबकि चीन में यह आंकड़ा 18 फीसदी है.

ब्रोकरेज का मानना है कि भारत में इक्विटी निवेश बढ़ने की गुंजाइश NSE के लिए लंबे समय में कारोबारी अवसर पैदा कर सकती है. इसके अलावा, शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने पर भी एक्सचेंज को फायदा मिल सकता है. इसकी वजह यह है कि ऑप्शन कारोबार से मिलने वाला रेवेन्यू मार्केट की अस्थिरता के साथ बढ़ सकता है.

NSE की कैश इक्विटी, इंडेक्स फ्यूचर एंड ऑप्शन यानी F&O, स्टॉक F&O और क्लियरिंग एवं सेटलमेंट कारोबार में मजबूत स्थिति है. हालांकि, कंपनी के ऑप्शन कारोबार पर रेगुलेटरी बदलावों का असर भी पड़ सकता है.

कमाई की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद

Jefferies का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2024 से वित्त वर्ष 2026 के बीच NSE के ऑपरेटिंग रेवेन्यू में एनुअल कंपाउंड ग्रोथ करीब 6 फीसदी रही. इस दौरान इक्विटी F&O कारोबार पर रेगुलेटरी बदलावों और ज्यादा टैक्स का असर पड़ा.

अब ब्रोकरेज को वित्त वर्ष 2027 से 2029 के दौरान कंपनी के ऑपरेटिंग रेवेन्यू में सालाना करीब 15 फीसदी की ग्रोथ की उम्मीद है. इसके पीछे इक्विटी ऑप्शन कारोबार में बाजार हिस्सेदारी स्थिर होने, कैश इक्विटी टर्नओवर बढ़ने और टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर से होने वाली कमाई में इजाफे को अहम वजह माना गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, NSE के टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर से होने वाले राजस्व में भी बढ़ोतरी की संभावना है. इसके अलावा कमोडिटी F&O, म्यूचुअल फंड ऑर्डरिंग प्लेटफॉर्म और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स जैसे नए कारोबार भविष्य में कंपनी के लिए अतिरिक्त अवसर पैदा कर सकते हैं. हालांकि, इन नए कारोबार से मिलने वाली संभावित कमाई ब्रोकरेज के बेस केस अनुमान में शामिल नहीं है.

NSE के शेयर खरीदने के पीछे क्या हैं 4 वजहें?

Jefferies ने NSE के शेयर के पक्ष में चार प्रमुख बातें रखी हैं. पहली, कंपनी का कारोबार कई क्षेत्रों में फैला हुआ है. दूसरी, नए कारोबार के विस्तार से भविष्य में कमाई बढ़ने की गुंजाइश है. तीसरी, कंपनी की डिविडेंड यील्ड आकर्षक मानी जा रही है. चौथी, कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन का स्तर ऊंचा है.

ब्रोकरेज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2029 तक NSE का EBITDA मार्जिन 200 आधार अंक बढ़कर 78 फीसदी तक पहुंच सकता है. इसके पीछे पिछले तीन साल में कर्मचारियों और टेक्नोलॉजी पर किए गए निवेश का फायदा, राजस्व ग्रोथ में तेजी और नए कारोबार का विस्तार शामिल है.

निवेशकों को किन जोखिमों पर ध्यान देना चाहिए?

NSE के लिए तस्वीर पूरी तरह रिस्क से मुक्त नहीं है. कंपनी के ऑप्शन कारोबार पर नियामकीय फैसलों का असर पड़ सकता है. Jefferies को उम्मीद है कि अगले पांच साल में इक्विटी ऑप्शन से मिलने वाले ट्रांजैक्शन रेवेन्यू की हिस्सेदारी मौजूदा करीब 60 फीसदी से घटकर 50 फीसदी हो सकती है.

डिस्क्लेमर: Money9live कभी भी किसी शेयर, आईपीओ और म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है. ये खबर केवल आपकी जानकारी के लिए है.