Opening Bell: सेंसेक्स 180 अंक से अधिक टूटा, निफ्टी 22550 के नीचे; TCS के शेयरों में बंपर तेजी
Opening Bell: बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बाद ग्लोबल इक्विटी में गिरावट आई, जिससे निफ्टी50 और सेंसेक्स निचले स्तर पर ट्रेड कर रहे थे. शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 10 पैसे बढ़कर 96.65 पर पहुंच गया.

Opening Bell: कमजोर ग्लोबल संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार के इंडेक्स गिरावट के साथ खुले. सेंसेक्स 177.83 अंक या 0.24 फीसदी गिरकर 72,460.87 पर और निफ्टी 62.25 अंक या 0.28 फीसदी गिरकर 22,540.80 पर खुला. लगभग 1075 शेयरों में बढ़त हुई, 1563 शेयरों में गिरावट आई और 145 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ.
टॉप गेनर्स और लूजर्स
निफ्टी पर बढ़त बनाने वाले प्रमुख शेयरों में TCS, HCL Tech, Tech Mahindra, BSE Limited और Trent शामिल थे, जबकि गिरावट वाले शेयरों में SBI Life Insurance, Bajaj Finance, Interglobe Aviation, Shriram Finance और Max Healthcare शामिल थे.
सेंसेक्स में शामिल शेयरों में IT कंपनियों ने सबसे ज्यादा बढ़त हासिल की. आज आने वाले Q2 नतीजों से पहले TCS के शेयरों में 2.5% तक की तेजी देखी गई. इसके बाद HCL टेक, टेक महिंद्रा, इंफोसिस और सन फार्मा का नंबर रहा. दूसरी ओर, बजाज ग्रुप की दोनों कंपनियों (बजाज ट्विन्स) को सबसे अधिक नुकसान हुआ.
सेक्टोरल इंडेक्स
प्रमुख सेक्टर इंडेक्स में, आज निफ्टी IT एकमात्र ऐसा इंडेक्स था जिसमें अच्छी बढ़त देखी गई, जबकि निफ्टी मीडिया में 0.1 प्रतिशत की मामूली बढ़त हुई.
सतर्क बना हुआ है नजरिया
ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ-टेक फर्म ‘एनरिच मनी’ के CEO पोनमुडी आर ने कहा, ‘RBI द्वारा रेपो रेट को 5.50 फीसदी तक बढ़ाने के बाद भारतीय शेयरों को लेकर नजरिया सतर्क बना हुआ है. इससे घरेलू वित्तीय स्थितियां और कड़ी हो गई हैं, जबकि ग्लोबल बाजार पहले से ही ऊंचे ट्रेजरी यील्ड और जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितता से जूझ रहे हैं. घरेलू वित्तीय स्थितियों के कड़े होने और ग्लोबल रिस्क के नाजुक माहौल के कारण निवेशक डिफेंसिव रुख अपना सकते हैं.’
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बुधवार को अपने बेंचमार्क रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 फीसदी कर दिया. यह लगभग चार वर्षों में पहली बढ़ोतरी थी. साथ ही, RBI ने संकेत दिया कि निकट भविष्य में दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है और बढ़ती महंगाई, कमजोर रुपये और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच आगे और बढ़ोतरी हो सकती है.