ओवरसीज इक्विटीज या Crypto? 2026 में कहां पैसा लगा रहे हैं इंडियन इन्वेस्टर्स, आंकड़ों से समझिए ट्रेंड
2026 में इंडियन इन्वेस्टर्स का रुझान डोमेस्टिक मार्केट्स से आगे बढ़कर ओवरसीज इक्विटीज और Crypto की ओर बढ़ रहा है. मई 2026 में एलआरएस के तहत आउटवर्ड रेमिटेंसेज 2.39 बिलियन डॉलर पहुंच गईं. वहीं, इक्विटी और डेट इन्वेस्टमेंट्स के लिए रेमिटेंसेज अप्रैल-मई में करीब 96 फीसदी बढ़कर 603.3 मिलियन डॉलर हो गईं. दूसरी तरफ, 2026 की पहली तिमाही में इंडिया का रिटेल Crypto ट्रांजैक्शन वॉल्यूम करीब 46 बिलियन डॉलर रहा.
Overseas Equities vs Crypto: इंडियन इन्वेस्टर्स अब सिर्फ डोमेस्टिक मार्केट्स तक सीमित नहीं रहना चाहते. 2026 में ओवरसीज इक्विटीज और Crypto जैसे अल्टरनेटिव एसेट्स में भी उनकी भागीदारी बढ़ रही है. हालिया आंकड़ों से संकेत मिलता है कि इंडियन इन्वेस्टर्स अपने पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन के लिए अलग-अलग एसेट क्लासेज का इस्तेमाल कर रहे हैं. जानकारों के मुताबिक, इसे ओवरसीज इक्विटीज और Crypto में से किसी एक को चुनने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. दोनों मार्केट्स में इन्वेस्टर्स की बढ़ती भागीदारी एक व्यापक डायवर्सिफिकेशन स्ट्रैटेजी का संकेत देती है.
ओवरसीज इन्वेस्टमेंट्स में बढ़ी दिलचस्पी
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम यानी एलआरएस के तहत ओवरसीज रेमिटेंसेज में तेजी देखने को मिली है. मई 2026 में एलआरएस के तहत कुल आउटवर्ड रेमिटेंसेज बढ़कर 2.39 बिलियन डॉलर हो गईं. इनमें इक्विटी और डेट इन्वेस्टमेंट्स के लिए रेमिटेंसेज सालाना आधार पर दोगुने से ज्यादा बढ़कर 363.6 मिलियन डॉलर हो गईं.
अप्रैल और मई 2026 को मिलाकर इक्विटी और डेट इन्वेस्टमेंट्स के लिए रेमिटेंसेज करीब 96 फीसदी बढ़कर 603.3 मिलियन डॉलर हो गईं. ये आंकड़े संकेत देते हैं कि इंडियन इन्वेस्टर्स का पैसा ओवरसीज इन्वेस्टमेंट चैनल्स की ओर भी बढ़ रहा है.
ओवरसीज इक्विटीज में क्यों बढ़ रही दिलचस्पी
ओवरसीज इक्विटीज इंडियन इन्वेस्टर्स को जियोग्राफिकल डायवर्सिफिकेशन का मौका देती हैं. इसके अलावा ऐसे सेक्टर्स और कंपनियों में इन्वेस्टमेंट का विकल्प मिलता है, जिनका इंडियन मार्केट्स में रिप्रेजेंटेशन सीमित है. हालांकि, ओवरसीज इन्वेस्टिंग के साथ कुछ अतिरिक्त रिस्क्स और कंसिडरेशंस भी जुड़े हैं.
करेंसी मूवमेंट्स और मार्केट वोलैटिलिटी के अलावा टैक्स और रेगुलेटरी रिक्वायरमेंट्स का भी ध्यान रखना पड़ता है. इसलिए सिर्फ रिटर्न्स को देखकर ओवरसीज इक्विटीज में इन्वेस्टमेंट का फैसला नहीं किया जा सकता.
Crypto मार्केट में भी मजबूत एक्टिविटी
दूसरी तरफ, Crypto मार्केट में भी इंडियन पार्टिसिपेंट्स की एक्टिविटी काफी मजबूत बनी हुई है. टीआरएम लैब्स के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की पहली तिमाही में इंडिया का रिटेल Crypto ट्रांजैक्शन वॉल्यूम करीब 46 बिलियन डॉलर रहा. खास बात यह है कि इसी दौरान ग्लोबल रिटेल Crypto वॉल्यूम्स में 11 फीसदी की गिरावट आई थी. इसके बावजूद इंडिया में Crypto मार्केट की एक्टिविटी काफी मजबूत रही.
क्या इन्वेस्टर्स ओवरसीज इक्विटीज या Crypto में से एक चुन रहे हैं
आंकड़ों को देखकर यह कहना सही नहीं होगा कि इंडियन इन्वेस्टर्स ओवरसीज इक्विटीज और Crypto में से किसी एक एसेट क्लास को चुन रहे हैं. उपलब्ध डेटा यह नहीं बताता कि कोई इंडिविजुअल इन्वेस्टर अपना पैसा किस तरह एलोकेट कर रहा है. यह भी पता नहीं चलता कि इन्वेस्टर ने किसी खास एसेट क्लास में इन्वेस्टमेंट क्यों किया या क्या उसने एक एसेट क्लास से पैसा निकालकर दूसरे में लगाया है.
इसके अलावा, दोनों तरह के आंकड़े इन्वेस्टर्स की एक्टिविटी के अलग-अलग पहलुओं को दिखाते हैं. एलआरएस डेटा परमिटेड ओवरसीज इन्वेस्टमेंट्स के लिए किए गए एग्रीगेट आउटवर्ड रेमिटेंसेज को दिखाता है. इसमें इक्विटी और डेट इन्वेस्टमेंट्स शामिल हैं. वहीं, Crypto ट्रांजैक्शन डेटा डिजिटल एसेट मार्केट में होने वाली एक्टिविटी को दिखाता है.
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