इक्विटी, डेट या गोल्ड: ₹1 करोड़ का पोर्टफोलियो बनाते समय कहां कितना पैसा लगाएं? जानें एक्सपर्ट की सलाह
अगर आपके पास निवेश के लिए 1 करोड़ रुपये हैं तो पूरा पैसा एक ही एसेट क्लास में लगाने के बजाय इक्विटी, डेट और गोल्ड में संतुलित बंटवारा किया जा सकता है. एक्सपर्ट के मुताबिक, जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्य के आधार पर 65 से 75 फीसदी इक्विटी, 15 से 25 फीसदी डेट और 5 से 10 फीसदी गोल्ड रखा जा सकता है.

अगर आपके पास निवेश के लिए 1 करोड़ रुपये हैं तो सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कहां ज्यादा रिटर्न मिलेगा. यह भी देखना जरूरी है कि आपका पैसा कब चाहिए, आप कितना रिस्क उठा सकते हैं और बाजार में गिरावट आने पर आपका पोर्टफोलियो कितना संभल सकता है. ऐसे में इक्विटी, डेट और गोल्ड के बीच सही बैलेंस बनाना जरूरी हो जाता है. एक्सपर्ट के मुताबिक, निवेशक अपनी जोखिम क्षमता, निवेश की अवधि और वित्तीय लक्ष्य के हिसाब से इन तीनों एसेट क्लास में पैसा बांट सकते हैं.
₹1 करोड़ में कितना पैसा इक्विटी में लगाएं?
जानकारों के मुताबिक, निवेशक अपने पोर्टफोलियो का करीब 65 से 75 फीसदी हिस्सा इक्विटी में रख सकते हैं. ₹1 करोड़ के पोर्टफोलियो में यह रकम करीब 65 से 75 लाख रुपये होगी. इक्विटी को पोर्टफोलियो में ज्यादा हिस्सा इसलिए दिया जाता है क्योंकि लंबे समय में यह ग्रोथ का मुख्य सोर्स हो सकता है. हालांकि, सिर्फ बाजार में तेजी देखकर इक्विटी का हिस्सा बढ़ाना सही तरीका नहीं है. कंपनी की ग्रोथ क्षमता और वैल्यूएशन पर भी ध्यान देना जरूरी है.
इक्विटी के अंदर Large Cap को कितना हिस्सा?
अगर ₹1 करोड़ में से 70 लाख रुपये इक्विटी में लगाए जाते हैं तो इस हिस्से को भी अलग-अलग कंपनियों और मार्केट कैप के हिसाब से बांटा जा सकता है. एक्सपर्ट के मुताबिक, इक्विटी वाले हिस्से का करीब 60 से 70 फीसदी Large Cap कंपनियों में रखा जा सकता है. इस हिसाब से ₹70 लाख के इक्विटी पोर्टफोलियो में करीब ₹42 से ₹49 लाख Large Cap में जा सकते हैं. बाकी रकम को Mid Cap और Small Cap में वैल्यूएशन और कंपनियों की वित्तीय स्थिति के आधार पर बांटा जा सकता है.
डेट में 15 से 25 लाख रुपये रख सकते हैं
डेट को अक्सर कम रिटर्न वाले निवेश के तौर पर देखा जाता है, लेकिन पोर्टफोलियो में इसका काम सिर्फ रिटर्न देना नहीं है. यह बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान पोर्टफोलियो को स्थिरता देने और नजदीकी जरूरतों के लिए पैसा उपलब्ध रखने में मदद कर सकता है. एक्सपर्ट के मुताबिक, ₹1 करोड़ के पोर्टफोलियो में करीब 15 से 25 फीसदी यानी 15 से 25 लाख रुपये डेट में रखे जा सकते हैं. अगर किसी निवेशक को जल्द पैसे की जरूरत है तो उस रकम को पूरी तरह इक्विटी में रखना जोखिम बढ़ा सकता है.
गोल्ड में 5 से 10 लाख रुपये
गोल्ड को पोर्टफोलियो में मुख्य ग्रोथ इंजन के बजाय डाइवर्सिफिकेशन के लिए रखा जा सकता है. एक्सपर्ट के मुताबिक, पोर्टफोलियो का 5 से 10 फीसदी हिस्सा गोल्ड में रखा जा सकता है. ₹1 करोड़ के पोर्टफोलियो में यह रकम करीब 5 से 10 लाख रुपये होगी. गोल्ड और इक्विटी की चाल हमेशा एक जैसी नहीं होती. ऐसे में बाजार में तनाव या उतार-चढ़ाव के दौरान गोल्ड पोर्टफोलियो में डाइवर्सिफिकेशन देने का काम कर सकता है.
₹1 करोड़ के पोर्टफोलियो का एक उदाहरण
अगर कोई निवेशक 70 फीसदी इक्विटी, 20 फीसदी डेट और 10 फीसदी गोल्ड का उदाहरण लेता है तो ₹1 करोड़ में करीब 70 लाख रुपये इक्विटी, 20 लाख रुपये डेट और 10 लाख रुपये गोल्ड में होंगे. इक्विटी के 70 लाख रुपये में 60 से 70 फीसदी हिस्सा Large Cap में रखा जा सकता है. हालांकि, यह किसी हर निवेशक के लिए तय फॉर्मूला नहीं है. सही बंटवारा निवेशक की जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और वित्तीय जरूरतों पर निर्भर करेगा.
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समय के साथ पोर्टफोलियो में बदलाव जरूरी
एक बार पोर्टफोलियो बना लेने के बाद उसे हमेशा उसी रेशियो में रखना जरूरी नहीं है. समय के साथ निवेशक के वित्तीय लक्ष्य, बाजार का वैल्यूएशन और पैसे की जरूरत बदल सकती है. ऐसे में इक्विटी, डेट और गोल्ड का अनुपात भी बदला जा सकता है. खासकर जब कोई बड़ा वित्तीय लक्ष्य करीब आ रहा हो तो उस जरूरत के लिए रखी गई रकम को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाना महत्वपूर्ण हो सकता है. इसलिए ₹1 करोड़ का पोर्टफोलियो बनाते समय सिर्फ रिटर्न नहीं, बल्कि जोखिम और आने वाली जरूरतों को भी ध्यान में रखना चाहिए.