Sensex में 2 मिनट में 4,000 पॉइंट का उतार-चढ़ाव, आखिरी मिनटों में क्‍यों मचा हड़कंप?

3 सितंबर को Sensex में महज दो मिनट में करीब 3,900 पॉइंट का बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला. BSE की साप्ताहिक F&O एक्सपायरी के दौरान आई इस असाधारण हलचल के बाद SEBI CAS प्रक्रिया की समीक्षा कर सकता है.

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भारतीय शेयर बाजार में 3 सितंबर को कारोबार के आखिरी मिनटों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला. BSE के साप्ताहिक डेरिवेटिव्स एक्सपायरी के दिन Sensex में सिर्फ दो मिनट के भीतर करीब 3,900 पॉइंट का बड़ा स्विंग आया. इस दौरान इंडेक्स पहले तेजी से गिरा और फिर लगभग उतनी ही तेजी से संभल गया.

3:18 बजे से शुरू हुआ बड़ा उतार-चढ़ाव

बाजार के बंद होने से कुछ मिनट पहले Sensex करीब 76,510 के स्तर पर था. शाम 3:18 बजे से इसमें अचानक तेज गिरावट शुरू हुई. महज दो मिनट में इंडेक्स करीब 2,137 पॉइंट गिरकर 74,373 के स्तर पर पहुंच गया.

इसके बाद बाजार में उतनी ही तेज रिकवरी देखने को मिली. Sensex ने लगभग 1,800 पॉइंट की वापसी की. इस तरह सिर्फ दो मिनट में गिरावट और रिकवरी को मिलाकर करीब 3,900 पॉइंट का उतार-चढ़ाव दर्ज हुआ. इससे बाजार में मौजूद निवेशकों और ट्रेडर्स के बीच हलचल बढ़ गई.

Weekly F&O expiry से जुड़ा मामला

यह असाधारण उतार-चढ़ाव BSE के साप्ताहिक फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) एक्सपायरी के दिन देखने को मिला. रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार बंद होने से पहले होने वाली Closing Auction Session (CAS) के दौरान डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की सेटलमेंट कीमत तय करने की प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों ने इस अस्थिरता को बढ़ाया.

Closing Auction Session बाजार बंद होने से पहले होने वाली प्रक्रिया है, जिसमें उपलब्ध ऑर्डर्स के आधार पर क्लोजिंग प्राइस तय करने की कोशिश की जाती है. एक्सपायरी वाले दिन इसमें बड़ी मात्रा में ट्रेडिंग होने के कारण उतार-चढ़ाव ज्यादा बढ़ सकता है.

SEBI कर सकता है नियमों की समीक्षा

इस घटना के बाद भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी के दिन इस्तेमाल होने वाली CAS प्रक्रिया की समीक्षा करने के संकेत दिए हैं.

SEBI बाजार सहभागियों से मिले फीडबैक के आधार पर सेटलमेंट प्राइस तय करने की मौजूदा पद्धति में बदलाव पर विचार कर रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, नियामक इस मुद्दे पर अगले सप्ताह एक कंसल्टेशन पेपर जारी कर सकता है.

इसका मकसद एक्सपायरी के दौरान होने वाले असामान्य उतार-चढ़ाव को कम करना और बाजार में सेटलमेंट प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और स्थिर बनाना है.

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