Sensex-Nifty की तेजी पर लग सकता है ब्रेक, विदेशी बाजारों में मचा हड़कंप
भारतीय शेयर बाजार में छह दिनों की लगातार तेजी के बाद अब मुनाफावसूली का खतरा बढ़ गया है. विदेशी निवेशकों ने एक दिन में करीब 15,000 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं. कच्चे तेल की कीमतें भी 100 डॉलर से नीचे आई हैं. हालांकि, अमेरिकी और एशियाई बाजारों में भारी गिरावट से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है.

भारतीय शेयर बाजार में लगातार छह दिनों की शानदार तेजी के बाद अब गिरावट के संकेत मिलने लगे हैं. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की जोरदार खरीदारी से बाजार को मजबूती मिली थी, लेकिन ग्लोबल बाजारों में आई भारी बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी के साथ कारोबार शुरू होने की आशंका जताई गई थी.
छह दिन की तेजी के बाद थमी बाजार की रफ्तार
बीते छह कारोबारी सत्रों में निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स लगातार बढ़त के साथ बंद हुए थे. गुरुवार को बाजार ने करीब सात महीने की सबसे बड़ी एकदिनी तेजी दर्ज की. इस दौरान सस्ते कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को बड़ा सहारा दिया.
गुरुवार को सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार उछाल आया था. हालांकि, लगातार तेजी के बाद निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली शुरू होने की आशंका बढ़ गई है. बाजार में इस तरह की गिरावट को तेजी के बाद सामान्य करेक्शन भी माना जाता है.
विदेशी निवेशकों ने की रिकॉर्ड खरीदारी
बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीदारी रही. विदेशी निवेशकों ने गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में करीब 15,000 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे. यह लगभग छह साल में उनकी सबसे बड़ी एकदिनी नेट खरीदारी थी.
विदेशी निवेशकों की इस खरीदारी से बाजार में भरोसा बढ़ा है. वैश्विक स्तर पर निवेशक AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों से पैसा निकालकर दूसरे बाजारों में निवेश कर रहे हैं. इसका फायदा भारतीय शेयर बाजार को भी मिला है.
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिली राहत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई थी. गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच निफ्टी में 2.4 फीसदी और सेंसेक्स में 2.6 फीसदी की तेजी दर्ज की गई.
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है. ऐसे में तेल सस्ता होने से देश का आयात बिल घट सकता है. इससे महंगाई, रुपये और चालू खाते के घाटे पर दबाव कम होने की उम्मीद रहती है.
अमेरिकी बाजारों में गिरावट से बढ़ी चिंता
भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता अमेरिकी और एशियाई बाजारों में आई गिरावट रही. अमेरिका में नैस्डैक 5.5 फीसदी टूट गया. वहीं डाउ जोन्स में 3.4 फीसदी और S&P 500 में 4.4 फीसदी की गिरावट आई.
एशियाई बाजारों में भी बिकवाली देखने को मिली. दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 8 फीसदी और जापान का निक्केई 5 फीसदी गिर गया.
विश्लेषकों के मुताबिक, भारतीय बाजार में आगे उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. छह दिनों की तेजी के बाद निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं. हालांकि, कच्चे तेल की कम कीमतें और विदेशी निवेशकों की खरीदारी बाजार को बड़ा सहारा दे सकती हैं.
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