₹100 से कम के शेयरों ने दिया 448% तक रिटर्न; आगे भी जारी रहेगी तेजी? रखें नजर
100 रुपये से कम कीमत वाले शेयर निवेशकों का ध्यान खींचते हैं, लेकिन कम कीमत अपने आप में अच्छे निवेश की गारंटी नहीं है. NMDC उत्पादन बढ़ाने और नए खनिजों में अवसर तलाश रही है. Suzlon रिन्यूएबल एनर्जी कारोबार बढ़ाना चाहती है, जबकि NHPC जलविद्युत और पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं पर निवेश कर रही है.

शेयर बाजार में 100 रुपये से कम कीमत वाले शेयर अक्सर निवेशकों का ध्यान खींचते हैं. कम कीमत देखकर इनमें निवेश करना आसान लग सकता है, लेकिन सिर्फ सस्ता शेयर होने का मतलब यह नहीं है कि उसमें कमाई की संभावना भी ज्यादा है. लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न के लिए कंपनी का कारोबार, मुनाफा कमाने की क्षमता, कर्ज और भविष्य में ग्रोथ की संभावनाएं देखना जरूरी है.
इसी नजरिए से माइनिंग और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की तीन कंपनियां NMDC, Suzlon Energy और NHPC चर्चा में हैं. इन कंपनियों के पास उत्पादन बढ़ाने, नए प्रोजेक्ट शुरू करने और कारोबार का विस्तार करने की योजनाएं हैं.
पहला है NMDC
NMDC इस लिस्ट में पहला शेयर है. यह इस्पात मंत्रालय के तहत आने वाला नवरत्न सरकारी उपक्रम है और भारत का सबसे बड़ा लौह अयस्क उत्पादक है. कंपनी छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में खदानें चलाती है. कम लागत पर लौह अयस्क का प्रोडक्शन करना इसकी कारोबारी ताकत में शामिल है.
कंपनी अब अपने पारंपरिक कारोबार के अलावा नए क्षेत्रों में भी संभावनाएं तलाश रही है. NMDC ने गुजरात मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (GMDC) के साथ गुजरात में रेयर अर्थ खनिजों के भंडार विकसित करने की संभावनाओं पर काम करने के लिए समझौता किया है. इसके अलावा कंपनी ऑस्ट्रेलिया में सोने की खदानों और लिथियम व कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के अवसर भी तलाश रही है.
NMDC फिलहाल सालाना 50 मिलियन टन से ज्यादा लौह अयस्क का उत्पादन कर रही है. कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026-27 में उत्पादन बढ़ाकर 60 मिलियन टन करना है. वहीं, वित्त वर्ष 2030 तक उत्पादन क्षमता को 100 मिलियन टन तक पहुंचाने की योजना है.
कंपनी के शेयर का हाल?
NMDC Ltd का शेयर 9 अक्टूबर को 1.57% की तेजी के साथ 71.80 रुपये पर बंद हुआ. कंपनी का मार्केट कैप 63,125 करोड़ रुपये है. शेयर का 52 हफ्ते का हाई 97.50 रुपये और लो 70.10 रुपये है. इसका स्टॉक पी/ई 8.46, बुक वैल्यू 38.70 रुपये और डिविडेंड यील्ड 4.87% है. कंपनी का ROCE 27.6% और ROE 23.4% है.
शेयर के प्रदर्शन की बात करें तो यह पिछले एक साल से दबाव में रहा है. हालांकि, तीन साल में इसने 50 फीसदी से ज्यादा और पांच साल में करीब 48 फीसदी का रिटर्न दिया है. कंपनी की उत्पादन बढ़ाने और नए खनिज क्षेत्रों में विस्तार की योजनाएं लंबी अवधि में नजर रखने लायक हैं.
दूसरा है Suzlon Energy
Suzlon Energy रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की प्रमुख कंपनियों में शामिल है. कंपनी विंड टर्बाइन के डिजाइन, विकास और निर्माण के साथ उनकी देखभाल और रखरखाव का काम भी करती है. यानी इसका कारोबार पवन ऊर्जा से जुड़े कई चरणों में फैला हुआ है.
कंपनी अब ‘Suzlon 2.0’ रणनीति के तहत विंड एनर्जी के साथ सोलर पावर, बैटरी स्टोरेज और एनर्जी मैनेजमेंट सिस्टम जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार करना चाहती है. भारत कंपनी का प्रमुख बाजार बना रहेगा, जबकि यूरोप, दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और मिडिल ईस्ट व उत्तरी अफ्रीका के क्षेत्रों में भी कारोबार बढ़ाने की योजना है.
वित्त वर्ष 2030-31 तक के लिए कंपनी ने कई लक्ष्य तय किए हैं. इनमें 25% से ज्यादा रेवेन्यू की सालाना चक्रवृद्धि वृद्धि दर (CAGR), भारत के विंड एनर्जी बाजार में 40% से ज्यादा हिस्सेदारी और 3 गीगावॉट से अधिक निर्यात ऑर्डर हासिल करना शामिल है.
कंपनी अपने रिन्यूएबल एनर्जी ऑर्डर बुक को 5.5 गीगावॉट से बढ़ाकर 15 गीगावॉट करने का लक्ष्य भी रखती है. वहीं, रिन्यूएबल एनर्जी से जुड़ी बिक्री को 2.5 गीगावॉट से बढ़ाकर 10 गीगावॉट और एसेट मैनेजमेंट पोर्टफोलियो को 18 गीगावॉट से बढ़ाकर 70 गीगावॉट तक पहुंचाने की योजना है.
कंपनी के शेयर का हाल?
Suzlon Energy Ltd का शेयर 9 अक्टूबर को 3.21% की तेजी के साथ 37.60 रुपये पर बंद हुआ. कंपनी का मार्केट कैप 51,271 करोड़ रुपये है. शेयर का 52 हफ्ते का हाई 61.50 रुपये और लो 36.30 रुपये है. इसका स्टॉक पी/ई 16.3, बुक वैल्यू 6.96 रुपये है.
शेयर पिछले एक साल से दबाव में कारोबार कर रहा है. हालांकि, तीन साल में इसने 42% से ज्यादा और पांच साल में करीब 448% का रिटर्न दिया है. कंपनी की विस्तार योजनाएं भविष्य में कारोबार बढ़ाने का आधार बन सकती हैं, लेकिन तय लक्ष्यों को हासिल करना, नए ऑर्डर मिलना और उनका समय पर पूरा होना अहम रहेगा.
तीसरा है NHPC
NHPC सरकारी क्षेत्र की मिनीरत्न श्रेणी-I कंपनी है. पहले मुख्य रूप से हाइड्रो पावर यानी जलविद्युत उत्पादन पर केंद्रित रही यह कंपनी अब सोलर और विंड एनर्जी जैसे क्षेत्रों में भी कारोबार बढ़ा रही है. देश की जलविद्युत क्षमता में इसकी अहम हिस्सेदारी है.
कंपनी चालू वित्त वर्ष में 15,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) का लक्ष्य लेकर चल रही है. इसके पास करीब 8 गीगावॉट की जलविद्युत परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं. इसके अलावा 10 गीगावॉट से ज्यादा की परियोजनाएं मंजूरी के चरण में हैं, जबकि 1.9 गीगावॉट की परियोजनाओं का सर्वे और अध्ययन चल रहा है.
NHPC की भविष्य की योजनाओं में पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट भी अहम हैं. कंपनी के करीब 17.9 गीगावॉट क्षमता के पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट अलग-अलग चरणों में हैं. ऐसे प्रोजेक्ट बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच संतुलन बनाने में मदद कर सकते हैं.
कंपनी के पास 24 पावर स्टेशन में कुल 8,771 मेगावॉट की चालू जलविद्युत क्षमता है. इसके अलावा 562 मेगावॉट की सोलर और विंड क्षमता चालू है और 1,190 मेगावॉट की सोलर क्षमता निर्माणाधीन है. हाल की तिमाही में NHPC ने अरुणाचल प्रदेश सरकार के साथ 3,097 मेगावॉट की एटालिन जलविद्युत परियोजना विकसित करने के लिए समझौता भी किया.
कंपनी के शेयर का हाल?
NHPC Ltd का शेयर 9 अक्टूबर को 1.87% की तेजी के साथ ₹73 पर बंद हुआ. कंपनी का मार्केट कैप 73,319 करोड़ रुपये है. शेयर का 52 हफ्ते का हाई 87.80 रुपये और लो 68.70 रुपये है. इसका स्टॉक पी/ई 19.3, बुक वैल्यू 41.20 रुपये और डिविडेंड यील्ड 2.21% है. कंपनी का ROCE 5.75%, ROE 9.32% है.
शेयर पिछले एक साल से दबाव में कारोबार कर रहा है. हालांकि, तीन साल में इसने करीब 39% और पांच साल में करीब 133% का रिटर्न दिया है. कंपनी की बड़ी परियोजनाएं और पंप्ड स्टोरेज पर जोर भविष्य में कारोबार बढ़ाने के अवसर दे सकते हैं. दूसरी ओर, बड़े पूंजीगत खर्च, परियोजनाओं को पूरा करने में लगने वाला समय और कम रिटर्न अनुपात जैसे पहलुओं पर नजर रखना जरूरी है.
क्या ₹100 से कम कीमत वाले शेयरों में निवेश करना सही है?
NMDC, Suzlon Energy और NHPC तीनों की कारोबारी योजनाएं अलग-अलग हैं. NMDC लौह अयस्क उत्पादन बढ़ाने और नए खनिजों में अवसर तलाश रही है. Suzlon विंड एनर्जी के साथ दूसरे रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्रों में विस्तार करना चाहती है. वहीं, NHPC जलविद्युत और पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के जरिए अपनी क्षमता बढ़ा रही है.
लेकिन किसी शेयर की कीमत 100 रुपये से कम होना उसे अपने आप सस्ता या बेहतर निवेश नहीं बनाता. निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, कर्ज, मुनाफे, वैल्यूएशन, फ्यूचर की योजनाओं और शेयर में उतार-चढ़ाव के जोखिम को समझना चाहिए.
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