₹10 लाख की FD कराने से पहले जान लें ये तरीका, ब्याज भी मिलेगा और जरूरत पर पैसा भी रहेगा
₹10 लाख की रकम को पांच अलग-अलग एफडी में बांटकर निवेश करने से हर साल पैसा मैच्योर हो सकता है. जानें एफडी लैडरिंग कैसे काम करती है और ब्याज दरों में बदलाव का इससे क्या फायदा मिल सकता है.
Highlights
- ₹10 लाख को पांच एफडी में बांटकर अलग-अलग अवधि में निवेश करें
- एफडी मैच्योर होने पर जरूरत के मुताबिक पैसा निकालें या दोबारा निवेश करें
- नई एफडी की ब्याज दरें बढ़ने की गारंटी नहीं, तुलना जरूर करें
अगर आपके पास ₹10 लाख रुपये हैं और आप इन्हें फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश करना चाहते हैं, तो पूरा पैसा एक ही एफडी में जमा करने के बजाय अलग-अलग अवधि की एफडी बनाना फायदेमंद हो सकता है. निवेश के इस तरीके को एफडी लैडरिंग कहते हैं. इससे पैसा अलग-अलग समय पर मैच्योर होता है और जरूरत पड़ने पर आपको पूरी एफडी तुड़वाने की जरूरत नहीं पड़ती.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 7 अक्टूबर 2026 को रेपो रेट 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दिया है. इसके बाद बैंकों की एफडी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है. ऐसे माहौल में एफडी लैडरिंग के जरिए निवेशक अपने पैसे को अलग-अलग अवधि में बांट सकते हैं.
क्या है एफडी लैडरिंग?
एफडी लैडरिंग में निवेश की पूरी रकम को कई हिस्सों में बांटकर अलग-अलग अवधि की एफडी बनाई जाती हैं. उदाहरण के लिए, अगर आपके पास ₹10 लाख हैं, तो आप ₹2-2 लाख की पांच एफडी बना सकते हैं. इनकी अवधि एक, दो, तीन, चार और पांच साल रखी जा सकती है.
इसका फायदा यह है कि हर साल आपकी एक एफडी मैच्योर होगी. मैच्योरिटी पर आप जरूरत के हिसाब से पैसा निकाल सकते हैं या उस रकम को दोबारा एफडी में निवेश कर सकते हैं.
अगर उस समय ब्याज दरें बढ़ चुकी हैं, तो नई एफडी पर पहले से ज्यादा ब्याज मिलने का मौका मिल सकता है. हालांकि, भविष्य में ब्याज दरें बढ़ेंगी ही, इसकी गारंटी नहीं है.
₹10 लाख की पांच एफडी पर कितना ब्याज मिलेगा?
एक उदाहरण के तौर पर, अगर अलग-अलग अवधि की एफडी पर ब्याज दरें 6% से 6.40% के बीच हों, तो निवेश का हिसाब कुछ इस तरह हो सकता है.
| एफडी की अवधि | निवेश राशि | उदाहरण के लिए ब्याज दर | मैच्योरिटी पर अनुमानित ब्याज |
|---|---|---|---|
| 1 साल | ₹2 लाख | 6.00% | ₹12,273 |
| 2 साल | ₹2 लाख | 6.10% | ₹25,743 |
| 3 साल | ₹2 लाख | 6.25% | ₹40,897 |
| 4 साल | ₹2 लाख | 6.30% | ₹56,814 |
| 5 साल | ₹2 लाख | 6.40% | ₹74,729 |
यह गणना संबंधित अवधि के लिए चक्रवृद्धि ब्याज के उदाहरण पर आधारित है. वास्तविक ब्याज बैंक की दर, ब्याज भुगतान के तरीके और एफडी की शर्तों के अनुसार अलग हो सकता है.
मैच्योरिटी पर दोबारा निवेश करने का फायदा
एफडी लैडरिंग में असली रणनीति तब काम आती है, जब मैच्योर होने वाली एफडी की रकम को दोबारा निवेश किया जाता है. मान लीजिए, एक साल बाद आपकी ₹2 लाख की एफडी मैच्योर होती है. अगर उस समय पांच साल की एफडी पर ब्याज दर 6.65% मिल रही है, तो आप उस रकम को पांच साल के लिए फिर जमा कर सकते हैं.
इसी तरह अगले वर्षों में मैच्योर होने वाली एफडी को भी उस समय उपलब्ध ब्याज दर पर दोबारा निवेश किया जा सकता है. इससे धीरे-धीरे आपका पूरा निवेश अलग-अलग समय पर नई ब्याज दरों के हिसाब से समायोजित होता रहेगा. हालांकि, भविष्य की ब्याज दरें केवल अनुमान हैं. अगर ब्याज दरें घटती हैं, तो नई एफडी पर कम रिटर्न भी मिल सकता है.
क्या पूरी रकम एक ही बैंक में जमा करनी चाहिए?
एफडी बनाते समय बैंक की ब्याज दर के साथ उसकी शर्तों और जमा बीमा का भी ध्यान रखें. जरूरत पड़ने पर पैसा निकालने की सुविधा, समय से पहले एफडी तोड़ने पर लगने वाला जुर्माना और टैक्स से जुड़े नियम समझना जरूरी है.
डीआईसीजीसी के नियमों के तहत पात्र बैंक जमा पर एक जमाकर्ता को एक बैंक में मूलधन और ब्याज मिलाकर अधिकतम ₹5 लाख तक का बीमा कवर मिलता है. अलग-अलग बैंकों में जमा रखने से इस सीमा के तहत बीमा कवरेज बढ़ाया जा सकता है.
कुल मिलाकर, एफडी लैडरिंग उन लोगों के लिए उपयोगी रणनीति हो सकती है, जो सुरक्षित निवेश के साथ नियमित अंतराल पर रकम उपलब्ध रखना चाहते हैं. निवेश से पहले अपनी जरूरत, अवधि और बैंक की ब्याज दरों की तुलना जरूर करें.
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