RBI फिर बढ़ा सकता है रेपो रेट, 100 बेसिस पॉइंट तक बढ़ोतरी का अनुमान; आपकी EMI पर क्या होगा असर?

RBI मौजूदा चक्र में रेपो रेट कुल 75-100 बेसिस पॉइंट तक बढ़ा सकता है. दिसंबर में बड़ी बढ़ोतरी संभव है. जानिए महंगाई, होम लोन, EMI और बैंक ब्याज पर इसका क्या असर होगा.

भारतीय रिजर्व बैंक

Highlights

  • RBI मौजूदा चक्र में रेपो रेट कुल 100 बेसिस पॉइंट तक बढ़ा सकता है
  • दिसंबर में ब्याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी महंगाई के आंकड़ों पर निर्भर करेगी
  • रेपो रेट बढ़ने से फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की ईएमआई बढ़ सकती है

महंगाई पर काबू पाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आने वाले महीनों में ब्याज दरें और बढ़ा सकता है. मौजूदा सख्त मौद्रिक नीति के दौर में रेपो रेट में कुल 75 से 100 बेसिस पॉइंट तक बढ़ोतरी होने का अनुमान है. अगर ऐसा होता है, तो होम लोन, कार लोन और दूसरे कर्ज लेने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. वहीं, बैंकों की जमा योजनाओं पर मिलने वाले ब्याज में भी बदलाव देखने को मिल सकता है.

रेपो रेट में कितनी बढ़ोतरी संभव?

हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, महंगाई के दबाव को देखते हुए आरबीआई ब्याज दरों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी कर सकता है. दिसंबर 2026 में अपेक्षा से ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है. हालांकि, यह फैसला सितंबर और अक्टूबर के महंगाई आंकड़ों समेत आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.

आरबीआई ने अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% कर दिया था. साथ ही, केंद्रीय बैंक ने अपनी नीति का रुख न्यूट्रल से बदलकर कैलिब्रेटेड टाइटनिंग कर दिया. इसका संकेत है कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए आगे भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है.

ध्यान देने वाली बात यह है कि 75 से 100 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी मौजूदा चक्र के लिए अनुमानित कुल बढ़ोतरी है. आगे कितनी बढ़ोतरी होगी, इसका अंतिम फैसला आरबीआई करेगा.

महंगाई क्यों बढ़ा सकती है ब्याज दरों का दबाव?

महंगाई बढ़ने के पीछे कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, वैश्विक तनाव और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी जैसे कारण अहम हैं. अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं, तो इससे परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ सकती है.

इसका असर सामान और सेवाओं की कीमतों पर पड़ सकता है. ऐसे में आरबीआई ब्याज दरें बढ़ाकर बाजार में मांग और महंगाई के दबाव को नियंत्रित करने की कोशिश कर सकता है.

अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में खुदरा महंगाई अपने ऊंचे स्तर पर पहुंच सकती है. इसके बाद महंगाई में धीरे-धीरे राहत मिलने की उम्मीद है.

आपकी EMI पर क्या होगा असर?

अगर आरबीआई आगे रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंकों के लिए कर्ज देना महंगा हो सकता है. इसका असर खास तौर पर उन लोगों पर पड़ सकता है, जिन्होंने फ्लोटिंग ब्याज दर पर होम लोन या कार लोन लिया है. ऐसे कर्ज की ब्याज दर बढ़ने पर ईएमआई बढ़ सकती है या लोन चुकाने की अवधि लंबी हो सकती है.

हालांकि, इसका असर हर ग्राहक पर एक जैसा नहीं होगा. यह बैंक की ब्याज दरों, लोन की शर्तों और ब्याज दर बदलने के नियमों पर निर्भर करेगा.

बैंकों और निवेशकों पर भी पड़ेगा असर

ब्याज दरों में बढ़ोतरी से बैंकों के मुनाफे को निकट अवधि में सहारा मिल सकता है. दूसरी ओर, कर्ज महंगा होने से लोगों और कारोबारियों की उधार लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. इससे आने वाले महीनों में कर्ज की मांग की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंका है.

बॉन्ड बाजार में भी ब्याज दरों का असर देखने को मिल सकता है. ऊंची महंगाई और वैश्विक अनिश्चितता के कारण सरकारी बॉन्ड की यील्ड पर दबाव बना रह सकता है. कुल मिलाकर, आगे रेपो रेट में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों और आर्थिक हालात पर निर्भर करेगा.