अमेरिकी झटके से IT शेयरों में भूचाल! एक दिन में निवेशकों के ₹55,000 करोड़ स्वाहा, Infosys 4% तक टूटा
अमेरिकी श्रम विभाग की ओर से कॉग्निजेंट की PERM अर्जियों पर रोक लगाए जाने के बाद भारतीय IT शेयरों में मंगलवार को भारी बिकवाली हुई. इनमें Infosys 4% तक टूटा, जबकि Tech Mahindra, HCL Technologies और Persistent Systems करीब 3% नीचे रहे. TCS, Mphasis, Wipro और LTIMindtree में भी करीब 2% की गिरावट आई.

Indian IT Stocks: एक बार फिर भारतीय आईटी शेयरों में मंगलवार को भारी बिकवाली देखने को मिली. एक ही कारोबारी सत्र में आईटी कंपनियों का कंबाइन्ड मार्केट वैल्यू करीब 55,000 करोड़ रुपये घट गया. इनमें Infosys सबसे ज्यादा दबाव में रहा और उसका शेयर 4% तक टूट गया. इसके अलावा Tech Mahindra, HCL Technologies और Persistent Systems में करीब 3% की गिरावट आई, जबकि TCS, Mphasis, Wipro और LTIMindtree करीब 2% नीचे रहे.
क्यो आई इतनी बड़ी गिरावट?
दरअसल, अमेरिकी श्रम विभाग ने कॉग्निजेंट की Permanent Labour Certification यानी PERM कार्यक्रम के तहत दाखिल की गई अर्जियों पर रोक लगा दी है. इसके बाद भारतीय आईटी कंपनियों पर अमेरिकी वीजा और विदेशी कर्मचारियों से जुड़े नियमों के संभावित असर को लेकर चिंता बढ़ गई.
PERM अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को स्थायी नौकरी और रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड दिलाने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है. अमेरिकी श्रम विभाग की ओर से कॉग्निजेंट की अर्जियों पर रोक लगाए जाने के बाद निवेशकों ने भारतीय आईटी कंपनियों के अमेरिकी कारोबार को लेकर सतर्कता बढ़ा दी.
अमेरिकी अधिकारियों की जांच के बीच लिया गया फैसला
अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल Anthony D’Esposito ने Cognizant की PERM अर्जियों पर रोक की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि संघीय अधिकारी कथित धोखाधड़ी और अमेरिकी कर्मचारियों को संभावित नुकसान से जुड़े मामलों की जांच कर रहे हैं.
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में कॉग्निजेंट के खिलाफ किसी आपराधिक आरोप की पुष्टि नहीं की गई है. यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि कितनी अर्जियां प्रभावित हुई हैं और रोक कितने समय तक जारी रहेगी.
Cognizant ने एक दिन पहले ही किया था US में भर्ती बढ़ाने का ऐलान
खास बात यह है कि PERM पर रोक की खबर से एक दिन पहले Cognizant ने अमेरिका में अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की योजना का ऐलान किया था. कंपनी ने कहा था कि वह अमेरिकी कॉलेजों से 1,500 नए ग्रेजुएट्स को नौकरी देगी.
कंपनी अपने Frontier Certified Engineer और Frontier Business Operator कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ाकर 15,000 करने की योजना बना रही है. Cognizant के सीईओ Ravi Kumar S ने कहा कि कंपनी अमेरिका में नए रोजगार पैदा करने और AI के दौर में अमेरिकी कर्मचारियों को तैयार करने पर काम कर रही है.
कंपनी ने यह भी बताया कि उसका Synapse कार्यक्रम अब तक 10 लाख से ज्यादा लोगों को प्रशिक्षित कर चुका है और 2030 तक यह संख्या 20 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य है.
PERM और H-1B एक जैसे नहीं हैं
यहां एक अहम बात समझना जरूरी है कि PERM और H-1B अलग-अलग कार्यक्रम हैं. PERM स्थायी रोजगार और रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया से जुड़ा है, जबकि H-1B के जरिए अमेरिकी कंपनियां योग्य विदेशी पेशेवरों को अस्थायी तौर पर विशेष कौशल वाली नौकरियों के लिए नियुक्त कर सकती हैं.
इसलिए Cognizant की PERM अर्जियों पर लगी रोक का मतलब यह नहीं है कि कंपनी की H-1B अर्जियां भी अपने आप रोक दी गई हैं. उपलब्ध जानकारी से ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं निकलता.
क्लाउडेरा पर भी PERM आवेदन रोकने की बात
अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल ने क्लाउडेरा की PERM अर्जियों पर भी रोक लगाए जाने की जानकारी दी. हालांकि, इसके मामले में भी उपलब्ध सामग्री में किसी आपराधिक आरोप का उल्लेख नहीं है.
Cognizant का मुख्यालय न्यू जर्सी के टीनेक में है. कंपनी की शुरुआत 1994 में चेन्नई में हुई थी और भारत में आज भी उसका बड़ा कर्मचारी आधार और कारोबारी संचालन है.
Coforge शेयर 9% टूटा, लेकिन वजह अलग थी
दलाल स्ट्रीट पर Coforge के शेयर में भी करीब 9% की भारी गिरावट आई. हालांकि, इसका कारण Cognizant के PERM मामले से अलग था. Coforge के चेयरमैन Om Prakash Bhatt ने एक ऑडिट के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इसी घटनाक्रम के बाद कंपनी के शेयर में तेज गिरावट देखने को मिली.
भारतीय IT शेयरों पर क्यों बढ़ी चिंता?
भारतीय आईटी कंपनियों के लिए अमेरिका सबसे बड़े बाजारों में से एक है. ऐसे में विदेशी कर्मचारियों, वीजा और स्थायी रोजगार से जुड़े अमेरिकी नियमों में सख्ती की खबरें निवेशकों की चिंता बढ़ा सकती हैं. हालांकि, Cognizant की PERM अर्जियों पर कार्रवाई को सीधे तौर पर सभी भारतीय आईटी कंपनियों पर लागू मानना सही नहीं होगा. फिलहाल बाजार की नजर आगे आने वाले अमेरिकी फैसलों और जांच की दिशा पर रहेगी.
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डिस्क्लेमर: Money9live कभी भी किसी शेयर, आईपीओ और म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है. ये खबर केवल आपकी जानकारी के लिए है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.