टायर इंडस्ट्री की इस कंपनी का PAT 70% बढ़ा, रेवेन्यू और EBITDA में भी शानदार ग्रोथ; रखें नजर

टायर इंडस्ट्री के लिए बीड वायर बनाने वाली राजरतन ग्लोबल वायर ने क्यू1 FY27 में शानदार प्रदर्शन किया है. कंपनी का पीएटी 70% बढ़कर 22.96 करोड़ रुपये हो गया, जबकि रेवेन्यू में 29% और EBITDA में 35% की ग्रोथ दर्ज हुई. कंपनी चेन्नई प्लांट की कैपेसिटी बढ़ाने के साथ FY27 में 1.55 लाख टन सेल्स का टारगेट लेकर चल रही है.

टायर Image Credit: Money 9 Live

Rajratan Global Wire: टायर इंडस्ट्री के लिए जरूरी बीड वायर बनाने वाली राजरतन ग्लोबल वायर ने जून तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है. कंपनी का पीएटी सालाना आधार पर 70 फीसदी बढ़कर 22.96 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, रेवेन्यू में 29 फीसदी और EBITDA में 35 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. कैपेसिटी यूटिलाइजेशन में सुधार, बेहतर कस्टमर मिक्स और मजबूत रियलाइजेशंस ने कंपनी के प्रदर्शन को सपोर्ट किया है.

37 साल से टायर कंपनियों को बीड वायर की सप्लाई

राजरतन ग्लोबल वायर करीब 37 वर्षों से बीड वायर कारोबार में है. बीड वायर एक खास स्टील वायर है, जिसका इस्तेमाल टायर को रिम से मजबूती से जोड़ने के लिए किया जाता है. कंपनी ब्रिजस्टोन, मिशेलिन, गुडईयर, कॉन्टिनेंटल, योकोहामा, एमआरएफ, सीएट, अपोलो टायर्स और जेके टायर जैसी बड़ी कंपनियों को अपने उत्पादों की सप्लाई करती है.

इस कारोबार में कंपनी की सबसे बड़ी ताकत कस्टमर अप्रूवल है. टायर निर्माता किसी सप्लायर को आसानी से नहीं बदल सकते, क्योंकि नए सप्लायर को लंबे क्वालिफिकेशन प्रोसेस से गुजरना पड़ता है. कई मामलों में किसी नए सप्लायर को अलग-अलग टायर उत्पादों के लिए दोबारा क्वालिफिकेशन हासिल करनी पड़ सकती है. इससे राजरतन को लंबे समय के कस्टमर रिलेशनशिप्स का फायदा मिलता है.

1.62 लाख टन से बढ़कर 1.92 लाख टन होगी कैपेसिटी

कंपनी के पास पीथमपुर, थाईलैंड और चेन्नई में फिलहाल कुल 1.62 लाख टन सालाना इंस्टॉल्ड कैपेसिटी है. चेन्नई प्लांट की कैपेसिटी को 30,000 टन से बढ़ाकर 60,000 टन करने की योजना है. एक्सपेंशन पूरा होने के बाद कंपनी की कुल कैपेसिटी 1.92 लाख टन सालाना हो जाएगी.

चेन्नई प्लांट कंपनी की ग्रोथ स्ट्रैटेजी में अहम भूमिका निभा रहा है. मैनेजमेंट के मुताबिक, प्लांट ने पिछले क्वार्टर में ब्रेक-ईवन हासिल किया और क्यू1 FY27 में पॉजिटिव कंट्रीब्यूशन देना शुरू कर दिया. FY27 में चेन्नई से करीब 34,000-35,000 टन उत्पादन की उम्मीद है, जो पिछले साल के करीब 17,000 टन से लगभग दोगुना है.

FY27 में 1.55 लाख टन सेल्स का टारगेट

मैनेजमेंट को उम्मीद है कि FY27 में कंपनी करीब 1.55 लाख टन की कुल सेल्स हासिल कर सकती है. यह करीब 17-18 फीसदी वॉल्यूम ग्रोथ को दर्शाता है. भारत से कंपनी को सबसे ज्यादा इन्क्रीमेंटल ग्रोथ मिलने की उम्मीद है, जबकि थाईलैंड में करीब 10-11 फीसदी ग्रोथ का अनुमान है.

एक्सपोर्ट भी कंपनी की ग्रोथ स्ट्रैटेजी का महत्वपूर्ण हिस्सा है. नॉर्थ अमेरिका में वॉल्यूम करीब 30 फीसदी, यूरोप में 50 फीसदी और साउथईस्ट एशिया में 10-15 फीसदी बढ़ने का अनुमान है. कंपनी भारत और थाईलैंड में अपनी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज के जरिए ग्लोबल टायर मैन्युफैक्चरर्स को सप्लाई बढ़ाने की कोशिश कर रही है.

थाईलैंड में मजबूत स्थिति

थाईलैंड राजरतन की ग्रोथ स्टोरी का एक अहम हिस्सा है. कंपनी के मुताबिक, वह थाईलैंड में एकमात्र बीड वायर मैन्युफैक्चरर है. यहां कंपनी पहले से ग्लोबल टायर मैन्युफैक्चरर्स को सप्लाई कर रही है और भविष्य के एक्सपेंशन के लिए रत्चाबुरी में जमीन भी सुरक्षित की है.

इंडिया और थाईलैंड में मैन्युफैक्चरिंग फुटप्रिंट होने से कंपनी को कस्टमर लोकेशन, कैपेसिटी अवेलेबिलिटी और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट के हिसाब से उत्पादन करने में मदद मिल सकती है.

टायर के बाहर भी डायवर्सिफिकेशन

राजरतन अब बीड वायर से आगे बढ़कर कन्वेयर बेल्ट के लिए स्टील कॉर्ड कारोबार में प्रवेश कर रही है. पीथमपुर में इस प्रोजेक्ट को विकसित किया जा रहा है. कंपनी अपनी मौजूदा मेटलर्जी कैपेबिलिटीज का इस्तेमाल करके एक नए इंडस्ट्रियल मार्केट में प्रवेश करना चाहती है. हालांकि, इस प्रोजेक्ट से आने वाले वॉल्यूम को FY27 के 1.55 लाख टन सेल्स टारगेट में शामिल नहीं किया गया है.

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