ट्रंप ने भारत की सन फार्मा और 8 अन्य दवा कंपनियों के साथ किया डील का ऐलान, कीमतों को लेकर समझौता
इन नए समझौतों के बाद, MFN समझौते वाली फार्मास्युटिकल कंपनियों की कुल संख्या 26 हो गई है. ट्रंप प्रशासन ने कहा कि इस प्रोग्राम में शामिल कंपनियां अब अमेरिका के ब्रांडेड दवा बाजार का 89 फीसदी हिस्सा रखती हैं.
Highlights
- 9 दवा कंपनियों से समझौता और MFN प्रोग्राम का विस्तार.
- पहले 17 कंपनियों से हो चुका है समझौता, जिससे संख्या 26 हुई.
- ये कंपनियां अमेरिका के ब्रांडेड दवा बाजार का 89% हिस्सा रखती हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने सोमवार को 9 और दवा कंपनियों के साथ दवाओं की कीमतों को लेकर समझौते की घोषणा की. इसके साथ ही उन्होंने अपने ‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ (MFN) प्रोग्राम का विस्तार किया है, जिसका मकसद अमेरिका में दवाओं की कीमतों को दूसरे विकसित देशों में ली जाने वाली कीमतों के बराबर लाना है.
ये समझौते सन फार्मा, एल्कोन, एस्टेलस फार्मा, बी-वन मेडिसिन्स, ब्रिज-बायो, सीएसएल, क्योवा किरिन, टेवा फार्मास्यूटिकल्स और यूसीबी के साथ किए गए.
26 कंपनियों के साथ समझौता
इन नए समझौतों के बाद, MFN समझौते वाली फार्मास्युटिकल कंपनियों की कुल संख्या 26 हो गई है. ट्रंप प्रशासन ने कहा कि इस प्रोग्राम में शामिल कंपनियां अब अमेरिका के ब्रांडेड दवा बाजार का 89 फीसदी हिस्सा रखती हैं.
मेडिकेड प्रोग्राम
नए समझौतों के तहत, कंपनियों ने हर राज्य के मेडिकेड प्रोग्राम को अपनी दवाओं के लिए MFN कीमतों पर दवाएं उपलब्ध कराने का वादा किया है. वे भविष्य में आने वाली नई दवाओं को अमेरिका में ऐसी कीमतों पर बेचने के लिए भी सहमत हुई हैं, जो दूसरे विकसित देशों में दी जाने वाली सबसे कम कीमतों के बराबर हों.
ट्रंप ने कंपनियों के अधिकारियों के साथ ओवल ऑफिस में हुए एक कार्यक्रम में इन समझौतों की घोषणा की और कीमतों में कटौती को अमेरिकियों के लिए हेल्थकेयर की लागत कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया.
19.6 अरब डॉलर का निवेश
व्हाइट हाउस ने कहा कि ये नौ कंपनियां जल्द ही अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग में कम से कम 19.6 अरब डॉलर का निवेश करेंगी. कई कंपनियां अमेरिकी सरकार के स्ट्रैटेजिक रिजर्व (रणनीतिक भंडार) के लिए एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले मुख्य तत्व) दान करने पर भी सहमत हुई हैं.
इन समझौतों में हिस्सा लेने वाली दवा कंपनियों के लिए इंसेंटिव (प्रोत्साहन) भी शामिल हैं. इनमें टैरिफ में राहत और भविष्य में दवा की कीमतों से जुड़े कुछ खास नियमों से सुरक्षा शामिल है. हालांकि, ये शर्तें हर कंपनी के लिए अलग-अलग हैं और सभी समझौतों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है.
ये नए समझौते फाइजर, एली लिली और एमजेन जैसी 17 बड़ी दवा कंपनियों के साथ पहले हुए समझौतों को आगे बढ़ाते हैं.
ट्रंप का कंपनियों पर दबाव
उन पुराने समझौतों में सरकारी प्रोग्राम के लिए कीमतें कम करने और कुछ मामलों में प्रशासन के दवा-डिस्काउंट प्लेटफॉर्म ‘ट्रंप-आरएक्स’ (TrumpRx) के जरिए सीधे ग्राहकों को दवाएं उपलब्ध कराने का वादा शामिल था. नए समझौते भी इसी तरह कम कीमतों तक पहुंच बढ़ाते हैं, जिसमें मेडिकेड (Medicaid) के जरिए मिलने वाली सुविधाएं भी शामिल हैं.
ट्रंप दवा कंपनियों पर दबाव डाल रहे हैं कि वे अमेरिका में दवाओं की कीमतें दूसरे अमीर देशों में चल रही कीमतों के बराबर करें. उनका तर्क है कि अमेरिकी मरीज प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाओं के लिए बहुत अधिक कीमत चुकाते हैं.
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