वेदांता एल्युमीनियम के शेयर 52 वीक के नए लो पर, इस वजह से बिखर गए अनिल अग्रवाल की कंपनी के शेयर

Vedanta Aluminium Share: आज ट्रेडिंग शुरू होते ही वेदांता एल्युमीनियम मेटल के शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला. बढ़ती बॉन्ड यील्ड, तेल की बढ़ती कीमतें और मजबूत डॉलर मेटल स्टॉक्स के लिए खास तौर पर मुश्किल माहौल बना सकते हैं.

वेदांता के शेयरों में गिरावट. Image Credit: Getty image

Vedanta Aluminium Share: भारतीय शेयर बाजार में गिरावट और इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से इनपुट कॉस्ट बढ़ने के कारण, आज ट्रेडिंग शुरू होते ही वेदांता एल्युमीनियम मेटल के शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला. वेदांता ग्रुप का शेयर NSE पर 431.25 रपये के भाव पर गिरावट के साथ खुला और इंट्राडे में 419.50 रुपये के निचले स्तर तक गिर गया. यह अनिल अग्रवाल की कंपनी के शेयर के लिए 52 वीक का नया लो लेवल है.

वेदांता के शेयरों में गिरावट की वजहें

शेयर बाजार के जानकारों के मुताबिक, अनिल अग्रवाल की कंपनी के शेयरों में आज भारी गिरावट की दो मुख्य वजहें हैं. पहली- दलाल स्ट्रीट पर कमजोर ट्रेंड और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, जो मेटल कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डाल रही हैं.

दूसरी- इंटरनेशनल मार्केट में बेस मेटल की बढ़ती कीमतें हैं, जो वेदांता एल्युमीनियम और मेटल के शेयरों पर दवाब डाल रही हैं.

आज के सेशन में वेदांता के शेयर 4 फीसदी से अधिक गिरकर 257 रुपये पर आ गए, जबकि BSE पर वेदांता एल्युमीनियम के शेयर 4 फीसदी गिरकर 420 रुपये प्रति शेयर पर ट्रेड कर रहे थे.

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड

US 10-साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड 4.9% से ऊपर चढ़ गई, जो 2023 के बाद से इसका सबसे ऊंचा लेवल है, क्योंकि तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई की चिंताओं को बढ़ा दिया और मार्केट लंबे समय तक चलने वाले युद्ध के लिए तैयार हो गए. इस कदम से अगले हफ्ते होने वाली US फेडरल रिजर्व की मीटिंग में रेट बढ़ाने की उम्मीदें भी मजबूत हुई हैं.

इस बीच, US 30-साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड बढ़कर 5.378% हो गई, जो 2007 के बाद से इसका सबसे ऊंचा लेवल है. यूरोपियन सेंट्रल बैंक ने भी कमजोर ग्रोथ के साथ-साथ महंगाई के बढ़ते रिस्क का हवाला देते हुए रेट बढ़ा दिए.

बढ़ती बॉन्ड यील्ड का असर

बढ़ती बॉन्ड यील्ड, तेल की बढ़ती कीमतें और मजबूत डॉलर मेटल स्टॉक्स के लिए खास तौर पर मुश्किल माहौल बना सकते हैं, क्योंकि ये एक साथ कमोडिटी की मांग, इनपुट कॉस्ट और प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव डालते हैं.

मजबूत डॉलर से दबाव

मजबूत डॉलर से दबाव और बढ़ सकता है, क्योंकि एल्युमिनियम, कॉपर और स्टील जैसे मेटल दुनिया भर में ट्रेड होते हैं और ज्यादातर डॉलर में ही इनकी कीमत तय होती है.

मजबूत डॉलर से ये कमोडिटी दूसरी करेंसी इस्तेमाल करने वाले खरीदारों के लिए अधिक महंगी हो सकती हैं, जिससे डिमांड कमजोर हो सकती है और इंटरनेशनल मेटल की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है.

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डिस्क्लेमर: Money9live कभी भी किसी शेयर, आईपीओ और म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है. ये खबर केवल आपकी जानकारी के लिए है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.