UPI पेमेंट पर लगने वाली फीस का ऐसे हो सकता है बंटवारा, बैंकों की झोली में जाएगा बड़ा हिस्सा! जानें- किसे कितना मिलेगा
अगस्त में संसद ने टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पास किया था, जिससे एक ऐसा फ़्रेमवर्क बना है जो सरकार को बैंकों और पेमेंट प्रोवाइडर्स को MDR लगाने के लिए अधिकृत करने की अनुमति देता है. यह कदम भारत की डिजिटल पेमेंट पॉलिसी में एक बदलाव होगा.
Highlights
- फीस को लगभग तीन हिस्सों में बांटा जाएगा.
- व्यवसायों के लिए फीस अलग-अलग हो सकती है.
- यह UPI और RuPay जैसे डिजिटल ट्रांजैक्शन पर लागू होगा.
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ट्रांजैक्शन के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) तय करने की प्रक्रिया चल रही है. ET की रिपोर्ट के अनुसार, इस स्ट्रक्चर के तहत फीस लगभग 40 बेसिस पॉइंट्स होगी और इसे तीन हिस्सों में बांटा जाएगा. इस संबंध में नोटिफिकेशन आने हफ्तों में आने की उम्मीद है.
किसको मिलेगा कितना शेयर?
रिपोर्ट के अनुसार, मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि जारी करने वाला बैंक (Issuing Bank) फीस का 40 फीसदी हिस्सा रखेगा. PhonePe या Google Pay जैसे थर्ड-पार्टी एप्लिकेशन प्रोवाइडर और एक्वायरिंग बैंक (Acquiring Bank) में से हर एक को 30 फीसदी हिस्सा मिलेगा.
40 bps MDR के हिसाब से बैंक को लगभग 16 bps और ऐप व एक्वायरर को 12-12 bps मिलेंगे. एक बेसिस पॉइंट 0.01% के बराबर होता है, इसलिए 40 bps MDR का मतलब है ट्रांजैक्शन वैल्यू पर 0.40 फीसदी की फीस.
जल्द आ सकता है फैसला
मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, फीस की जानकारी वाला नोटिफिकेशन अगले कुछ हफ्तों में आने की उम्मीद है. मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा, ‘अब यह मामला नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के पास है और तौर-तरीके तय किए जा रहे हैं. हमें जल्द ही अंतिम फैसले की उम्मीद करनी चाहिए.’
हालांकि, 1-1.5 करोड़ रुपये के सालाना टर्नओवर वाले मर्चेंट्स के लिए UPI ट्रांजैक्शन और 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने पर काम चल रहा है, लेकिन अलग-अलग सेक्टर के व्यवसायों के लिए फीस अलग-अलग हो सकती है.
टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल
अगस्त में संसद ने टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पास किया था, जिससे एक ऐसा फ़्रेमवर्क बना है जो सरकार को बैंकों और पेमेंट प्रोवाइडर्स को MDR लगाने के लिए अधिकृत करने की अनुमति देता है.
P2P ट्रांजैक्शन के लिए कोई शुल्क नहीं
यह UPI और RuPay जैसे डिजिटल ट्रांजैक्शन पर लागू होगा और केवल अधिक वैल्यू वाले या एक निश्चित सीमा से ऊपर के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर ही लागू होगा. सरकार ने कहा है कि आम यूजर्स और पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांसफर के लिए कोई शुल्क नहीं लगेगा.
डिजिटल पेमेंट पॉलिसी में होगा बड़ा बदलाव
इससे पहले, NPCI ने UPI मर्चेंट शुल्क पर प्रति ट्रांजैक्शन लगभग 0.30% की सीमा तय की थी. हालांकि सरकार को इंसेंटिव स्कीम के जरिए कमी की भरपाई करनी थी, लेकिन हर साल उन भुगतानों में कमी आई है.
यह कदम भारत की डिजिटल पेमेंट पॉलिसी में एक बदलाव होगा, जो सरकार द्वारा डिजिटल अपनाने को बढ़ावा देने के लिए UPI और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन को मुफ्त करने के छह साल बाद उठाया जा रहा है.
MDR का क्या है मतलब?
MDR का मतलब उस फीस से है जो बैंक किसी मर्चेंट से UPI, क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड जैसे डिजिटल तरीकों से कस्टमर से पेमेंट लेने के लिए वसूलते हैं.
जनवरी 2020 से UPI ट्रांजैक्शन के लिए यह जीरो रही है, जब सरकार ने ऐसे पेमेंट को मुफ्त बनाने के लिए नियमों में बदलाव किया था. बैंक और फिनटेक कंपनियां बदलाव की मांग कर रही थीं, क्योंकि जीरो-फीस मॉडल आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं था.
छोटे मर्चेंट पर नहीं लगेगा शुल्क
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि UPI से जुड़े बदलाव से यूजर्स पर कोई टैक्स या ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लगेगा. उन्होंने कहा कि सरकार छोटे मर्चेंट पर कोई MDR चार्ज नहीं लगाना चाहती, क्योंकि वे UPI के समावेशी विकास के लिए अहम हैं.
बैंकों को होगा बड़ा फायदा
BofA की हालिया रिपोर्ट में MDR के फिर से लागू होने पर कई संभावित फायदा उठाने वालों की पहचान की गई है. Paytm और PhonePe जैसे UPI ऐप्स को मर्चेंट और यूजर्स के बीच अपनी पहुंच से फायदा होता है. MDR में बड़े हिस्से के कारण जारी करने वाले बैंकों को सबसे अधिक फायदा होगा.
रिपोर्ट में कहा गया है कि पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर (PSP), UPI नेटवर्क पर थर्ड-पार्टी ऐप्स को स्पॉन्सर करने वाले बैंक, एक्वायरिंग बैंक, मर्चेंट एक्वायरर और Pine Labs और Razorpay जैसे पेमेंट गेटवे को भी फायदा होगा.
बढ़ सकता है कॉम्पिटिशन?
हालांकि, BofA ने यह भी बताया कि कॉम्पिटिशन बढ़ सकता है, क्योंकि जैसे-जैसे इकोनॉमिक्स बेहतर होगी, ऐप्स और बैंक कंज्यूमर और मर्चेंट दोनों तरफ अपनी मौजूदगी बना सकते हैं और बैंक आक्रामक हो सकते हैं, क्योंकि वे UPI से कमाई कर सकेंगे.
NPCI के डेटा के अनुसार, अगस्त में 29.82 लाख करोड़ रुपये के 24.51 अरब UPI ट्रांजैक्शन में से, पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) पेमेंट 15.51 अरब या वॉल्यूम का 63% था, लेकिन वैल्यू का केवल 8.95 लाख करोड़ रुपये या 30 फीसदी थी. इस तरह औसत मर्चेंट पेमेंट लगभग 577 रुपये था.
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