DTH के बाद इंटरनेट से TV देखने पर आएगी आफत! TRAI के प्लान पर क्यों मचा बवाल?

TRAI के नए प्रस्ताव से इंटरनेट पर टीवी चैनलों और स्ट्रीमिंग सेवाओं के विनियमन को लेकर देश में एक बड़ी बहस छिड़ गई है. इस पहल का उद्देश्य FAST (फ्री एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टीवी) और अन्य लीनियर स्ट्रीमिंग सेवाओं को नियामक दायरे में लाना है, जो अब तक इंटरनेट के माध्यम से दर्शकों तक पहुँचती हैं.

इस प्रस्ताव ने OTT कंपनियों, डिजिटल उद्योग संगठनों और ब्रॉडकास्टर्स को आमने-सामने ला दिया है. उद्योग जगत का मानना है कि यदि नियमों का दायरा बहुत व्यापक रखा गया, तो Netflix, JioCinema, YouTube जैसी OTT सेवाएँ और डिजिटल समाचार वेबसाइटें भी इसकी चपेट में आ सकती हैं. उनका तर्क है कि ये प्लेटफॉर्म पहले से ही सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियम 2021 के तहत विनियमित हैं, और TRAI का नया विनियमन दोहरा विनियमन होगा.

2023 में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी कहा था कि OTT सेवाएँ IT अधिनियम 2000 के दायरे में आती हैं, न कि नए टेलीकॉम कानून के. दूसरी ओर, DTH ऑपरेटरों का कहना है कि एक समान और तुलनीय नियम होने चाहिए ताकि सभी के लिए समान अवसर उपलब्ध हो सकें. भारत FAST चैनलों के लिए दुनिया का चौथा सबसे बड़ा बाजार है, जिसका राजस्व 2027 तक 10 करोड़ डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है. इस बढ़ते कारोबार को विनियमित करने की सरकार की मंशा है, लेकिन उद्योग इसे अपने विकास में बाधा मान रहा है. यह देखना होगा कि यह मुद्दा कैसे सुलझता है.

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