सोशल मीडिया ने बदला कविता का अंदाज, Reels से ऐसे युवाओं तक पहुंच रही शायरी और कविताएं

सोशल मीडिया और Instagram Reels ने कविता और शायरी को नई ऑडियंस तक पहुंचाने का काम किया है. युवा अब छोटे वीडियो के जरिए हिंदी-उर्दू कविताएं खोज रहे हैं. इससे कवियों की पहुंच बढ़ी है, लेकिन कंटेंट और लगातार पोस्ट करने का दबाव भी बढ़ा है.

सोशल मीडिया Image Credit:

कविता और शायरी को कभी किताबों, कवि सम्मेलनों, मुशायरों और साहित्यिक आयोजनों तक सीमित माना जाता था. लेकिन सोशल मीडिया और खासकर Instagram Reels ने कविता को लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना दिया है. अब कविता खोजने के लिए किताब खरीदना या किसी कार्यक्रम में जाना जरूरी नहीं है. कई बार कुछ सेकंड की Reel स्क्रॉल करते हुए ही कोई कविता या शेर लोगों तक पहुंच जाता है.

Reel बनी कविता तक पहुंचने का नया रास्ता

आज युवा पीढ़ी को हिंदी, उर्दू और दूसरी भाषाओं की कविताएं छोटे वीडियो के जरिए मिल रही हैं. कई कवि कैमरे के सामने अपनी रचनाएं सुनाते हैं, जबकि कुछ लोग पुराने या कम चर्चित कवियों की रचनाओं को नए अंदाज में पेश कर रहे हैं.

कवयित्री नायब मिड्ढा के Instagram पर करीब 30 लाख फॉलोअर्स हैं. उनका कहना है कि सोशल मीडिया ने कविता की पहुंच और उसकी खोज को काफी आसान बनाया है. पहले कविता तक पहुंचने के लिए लोगों को खुद साहित्य की दुनिया में जाना पड़ता था, लेकिन अब कविता उनके सोशल मीडिया फीड में खुद पहुंच जाती है.

उर्दू शायरी भी इस बदलाव का फायदा उठा रही है. आमिर अज़हर ने 2020 में ‘Urdu Daan’ नाम से Instagram अकाउंट और पॉडकास्ट शुरू किया. उनके मुताबिक दो लाइन का शेर छोटे वीडियो के लिए बिल्कुल सही फॉर्मेट है. लोग एक छोटा शेर सुनकर आगे पूरी कविता या शायर के दूसरे काम तलाश सकते हैं.

युवाओं को भावनाएं व्यक्त करने में मदद

सोशल मीडिया पर कविता की लोकप्रियता का एक कारण यह भी है कि यह युवाओं को अपनी भावनाएं व्यक्त करने का तरीका देती है. प्यार, ब्रेकअप, अकेलापन, चिंता, यादें और रिश्तों से जुड़ी भावनाएं Reels में खूब दिखाई देती हैं.

नायब मिड्ढा के मुताबिक कई युवा जटिल भावनाओं को शब्दों में नहीं कह पाते. कविता उन्हें उन भावनाओं को समझने और व्यक्त करने के लिए भाषा देती है. वहीं कई लोगों के लिए हिंदी और उर्दू घर और अपनी संस्कृति से जुड़ने का माध्यम भी बन रही हैं.

कवि के सामने नई चुनौती भी

हालांकि सोशल मीडिया ने कवियों की पहुंच बढ़ाई है, लेकिन इसके साथ दबाव भी आया है. अब सिर्फ अच्छा लिखना ही काफी नहीं है. कवि को कैमरे के सामने प्रस्तुति देने, वीडियो बनाने, एडिटिंग करने और लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने की जरूरत पड़ती है.

कवि याह्या बूटवाला के मुताबिक पहले कविता लिखना और अपनी भावनाओं को मंच पर पेश करना मुख्य उद्देश्य था. अब नियमित पोस्ट करने और ऑडियंस की पहुंच बनाए रखने का दबाव भी है. कई बार छह दिन तक पोस्ट न करने पर भी Reach प्रभावित होती है.

सोशल मीडिया का एल्गोरिदम भी कविता के अंदाज को प्रभावित कर रहा है. शुरुआत की कुछ पंक्तियां ऐसी होनी चाहिए जो स्क्रॉल कर रहे व्यक्ति को रोक सकें. इसे कवयित्री प्रिया मलिक ‘Gateway Line’ कहती हैं. यानी कविता की शुरुआत ही तय कर सकती है कि दर्शक आगे सुनेगा या अगली Reel पर चला जाएगा.

Reel से किताब तक पहुंच रही नई ऑडियंस

सोशल मीडिया का असर सिर्फ वीडियो तक सीमित नहीं है. कुछ पाठक Reels पर कविता सुनने के बाद कवियों की किताबें भी खरीद रहे हैं. Crossword के मुताबिक पिछले दो वर्षों में कविता की बिक्री में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है. युवा पाठक समकालीन कवियों के साथ गुलजार, रूमी, खलील जिब्रान और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे पुराने नामों को भी पढ़ रहे हैं.

Penguin Random House India के मुताबिक कविता के नए पाठकों में बड़ी संख्या 20 की उम्र वाले युवाओं की है. इनमें कई ऐसे लोग हैं जो पहले साहित्यिक पाठक नहीं माने जाते थे. वे एक कविता या एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस विधा से जुड़ रहे हैं.

हालांकि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता का मतलब हमेशा किताबों की ज्यादा बिक्री नहीं होता. पब्लिशिंग इंडस्ट्री का मानना है कि असली फर्क Engagement और Authenticity से पड़ता है.

कविता के लिए सोशल मीडिया मंजिल नहीं, शुरुआत

सोशल मीडिया ने कविता को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का रास्ता जरूर खोला है, लेकिन इसके साथ सतही कंटेंट का खतरा भी है. कुछ लोगों का मानना है कि हर वायरल कविता अच्छी कविता नहीं होती.

इसके बावजूद सोशल मीडिया ने कविता को पहले से ज्यादा सुलभ बना दिया है. अब किसी व्यक्ति के लिए कविता दूर की साहित्यिक चीज नहीं रह गई है. एक छोटी Reel उसके लिए कविता की पूरी दुनिया का पहला दरवाजा बन सकती है.

यही वजह है कि कविता का सफर अब किताब से Reel और Reel से दोबारा किताब तक पहुंच रहा है. सोशल मीडिया शायद कविता की मंजिल नहीं है, लेकिन नई पीढ़ी के लिए यह साहित्य तक पहुंचने का एक महत्वपूर्ण रास्ता जरूर बन गया है.

यह भी पढ़ें- AI के साथ शेयर कर रहे पर्सनल फोटो? 80s के फोटो ट्रेंड के चक्कर में प्राइवेसी से न करें ‘खिलवाड़’