पश्चिम एशिया संघर्ष: फर्टिलाइजर प्लांट के लिए गैस की कीमतों में 60% बढ़ोतरी, सरकार पर बढ़ सकता है सब्सिडी का बोझ

उर्वरक विभाग की संयुक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा ने कहा कि देश के पास आने वाले खरीफ मौसम में कृषि की मांग को पूरा करने के लिए उर्वरकों का पर्याप्त भंडार मौजूद है. खाद की उपलब्धता, उत्पादन, आयात और लॉजिस्टिक्स पर रियल-टाइम आधार पर नजर रखने के लिए एक विशेष कार्य समूह और एक आपातकालीन 'वॉर रूम' बनाया गया है.

उर्वरकों का पर्याप्त भंडार मौजूद. Image Credit: Tv9

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण फर्टिलाइजर प्लांट के लिए फीडस्टॉक नेचुरल गैस की कीमतों में 60 फीसदी की भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ने की उम्मीद है. संघर्ष के कारण एनर्जी सप्लाई लाइनों में रुकावट आने से, प्राकृतिक गैस की आपूर्ति – जो अमोनिया बनाने के लिए मुख्य फीडस्टॉक है (और अमोनिया नाइट्रोजन-आधारित उर्वरकों का मूल तत्व है) – मांग के मुकाबले 80 फीसदी तक सीमित हो गई है. इस कमी को पूरा करने के लिए, उर्वरक कंपनियां स्पॉट या मौजूदा बाजार से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) खरीद रही हैं.

मौजूदा स्थिति काफी नाज़ुक

पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में, उर्वरक विभाग की संयुक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा ने कहा कि देश के पास आने वाले खरीफ मौसम में कृषि की मांग को पूरा करने के लिए उर्वरकों का पर्याप्त भंडार मौजूद है. उन्होंने कहा, ‘मौजूदा स्थिति काफी नाज़ुक है, जिससे हमने बहुत ही रणनीतिक तरीके से निपटा है.’

इनपुट लागतों में बढ़ोतरी

उन्होंने बताया कि खाड़ी क्षेत्र – जो भारत की यूरिया की 20-30 फीसदी, DAP की 30 फीसदी और LNG की 50 फीसदी जरूरतों को पूरा करता है – अभी भी प्रभावित है. इसके चलते LNG, अमोनिया और सल्फर जैसी इनपुट लागतों में बढ़ोतरी हुई है, साथ ही माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ गया है. घरेलू यूरिया उत्पादन पर भी असर पड़ा है, हालांकि इसके प्रभाव को कम करने के लिए कदम उठाए गए हैं.

39 मिलियन टन उर्वरकों की जरूरत

उन्होंने बताया कि खरीफ 2026 के लिए उर्वरकों की कुल जरूरत लगभग 39 मिलियन टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल यह 36.1 मिलियन टन थी. उन्होंने कहा कि मौजूदा स्टॉक का स्तर लगभग 18.0 मिलियन टन है, जो पिछले साल इसी अवधि के 14.7 मिलियन टन के मुकाबले ज्यादा है. उन्होंने आगे कहा कि अप्रैल और मई – जो आमतौर पर कृषि के लिहाज से सुस्त महीने होते हैं – का इस्तेमाल बफर स्टॉक बनाने के लिए किया जा रहा है.

उत्पादन में बढ़ोतरी

घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए, यूरिया प्लांट को गैस की आपूर्ति – जिसे शुरू में घटाकर लगभग 60 फीसदी कर दिया गया था – अब वैकल्पिक व्यवस्थाओं के जरिए बढ़ाकर 75-80 फीसदी तक पहुंचा दिया गया है. इससे उत्पादन बढ़ा है और उत्पादन में होने वाला नुकसान कम हुआ है. उन्होंने यह भी बताया कि कमी को पूरा करने के लिए स्पॉट बाजार से LNG खरीदी जा रही है.

उर्वरक प्लांट को कितनी गैस की जरूरत

उर्वरक प्लांट की प्रतिदिन 52 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस की जरूरत में से, लगभग 15 mmscmd गैस स्पॉट बाजार से खरीदी जा रही थी. उन्होंने कहा कि स्पॉट खरीदारी 19.5-19.6 USD प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट के हिसाब से की गई है, जबकि संकट से पहले के दौर में यह दर 11-12 USD प्रति mmBtu थी.

हालांकि, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद सरकार किसानों को मौजूदा कीमतों पर ही खाद उपलब्ध कराती रहेगी. इस बात पर भी जोर दिया कि अभी खाद की कोई तत्काल कमी नहीं है और न ही घबराने की कोई जरूरत है.

सब्सिडी का बिल बढ़ेगा

फीडस्टॉक की लागत बढ़ने से सब्सिडी का बिल तो बढ़ेगा, लेकिन किसानों को यूरिया 266 रुपये प्रति 45 किलोग्राम और DAP का 50 किलोग्राम का बैग 1,350 रुपये में ही मिलता रहेगा. उन्होंने बताया कि मार्च में यूरिया का उत्पादन लगभग 1.8 लाख टन रहा, जबकि P&K खाद का उत्पादन 0.9-1 मिलियन टन होने का अनुमान था. उन्होंने आगे कहा कि यह पिछले साल के 2.4 मिलियन टन के मासिक उत्पादन से कम था.

उन्होंने कहा कि खाद बनाने वाले कुछ कारखानों ने मार्च में सालाना रखरखाव के लिए काम बंद कर दिया था, और अब वे फिर से उत्पादन शुरू कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि 18 मिलियन टन के मौजूदा स्टॉक में से 6.2 मिलियन टन यूरिया, 2.33 मिलियन टन DAP और 5.6 मिलियन टन P&K खाद है.

आयात के मामले में, सरकार ने खाद के स्रोतों में डायवर्सिफिकेशन लाने और आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास तेज कर दिए हैं. 13.07 लाख टन यूरिया के लिए एक वैश्विक टेंडर जारी किया गया है, जबकि सऊदी अरब और ओमान जैसे देशों के साथ लंबी अवधि के समझौते किए गए हैं.

खाद मंगाने के लिए उठाए जा रहे जरूरी कदम

उन्होंने कहा, ‘खाड़ी देशों के अलावा अन्य देशों – जिनमें रूस, मोरक्को, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, जॉर्डन, कनाडा, अल्जीरिया और मिस्र शामिल हैं – से भी खाद मंगाने के लिए सक्रिय कदम उठाए जा रहे हैं.’

खाद की उपलब्धता, उत्पादन, आयात और लॉजिस्टिक्स पर रियल-टाइम आधार पर नजर रखने के लिए एक विशेष कार्य समूह और एक आपातकालीन ‘वॉर रूम’ बनाया गया है. आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जमाखोरी, कालाबाजारी और खाद के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए राज्यों के साथ तालमेल और तेज कर दिया गया है.

यह भी पढ़ें: ट्रंप ने दी ईरान को नई धमकी, कहा- होर्मुज स्ट्रेट नहीं खुला… तो सबकुछ कर देंगे तबाह; उड़ा देंगे पावर प्लांट और तेल के कुएं

Latest Stories