प्याज किसानों को मिली राहत, सरकार ने खरीद प्राइस बढ़ाकर 2125 रुपये प्रति क्विंटल किया, जानें पूरी रिपोर्ट

केंद्र सरकार ने बफर स्टॉक के लिए प्याज खरीद प्राइस 1875 रुपये से बढ़ाकर 2125 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है. नई दर 4 जुलाई 2026 से लागू हो गई है. यह इस सीजन में पांचवीं बार प्राइस बढ़ोतरी है. सरकार का उद्देश्य किसानों को बेहतर दाम दिलाना और खरीद बढ़ाना है. फिलहाल देश में प्याज की उपलब्धता सामान्य है.

केंद्र सरकार ने बफर स्टॉक के लिए प्याज खरीद प्राइस 1875 रुपये से बढ़ाकर 2125 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है.

Onion Procurement Price: प्याज किसानों के लिए सरकार ने एक और राहत भरा फैसला लिया है. केंद्र सरकार ने बफर स्टॉक के लिए प्याज खरीद का प्राइस बढ़ाकर 2125 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है. पहले यह कीमत 1875 रुपये प्रति क्विंटल थी. नई दर 4 जुलाई 2026 से लागू हो गई है. सरकार का कहना है कि इस फैसले का मकसद किसानों को बेहतर दाम दिलाना और बफर स्टॉक के लिए खरीद को तेज करना है. यह इस सीजन में खरीद प्राइस में किया गया पांचवां संशोधन है.

पांचवीं बार बढ़ा खरीद प्राइस

सरकार ने इस सीजन में लगातार पांचवीं बार प्याज खरीद प्राइस बढ़ाया है. शुरुआत में खरीद प्राइस 12.70 रुपये प्रति किलो था, जिसे अलग अलग चरणों में बढ़ाकर पहले 15.80 रुपये, फिर 16.50 रुपये, 17.30 रुपये और 18.75 रुपये प्रति किलो किया गया. अब इसे बढ़ाकर 21.25 रुपये प्रति किलो यानी 2125 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है. इसके बावजूद 1 जून से अब तक सरकार केवल करीब 2000 टन प्याज ही खरीद सकी है, जिससे खरीद की रफ्तार अभी भी धीमी बनी हुई है.

सामान्य बनी हुई है बाजार में उपलब्धता

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 26 में देश में करीब 307.37 लाख टन प्याज उत्पादन का अनुमान है. यह पिछले वर्ष के लगभग बराबर है. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार फिलहाल देश में प्याज की उपलब्धता को लेकर कोई चिंता नहीं है. महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे प्रमुख राज्यों में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. देशभर की मंडियों में रोजाना 50000 टन से अधिक प्याज की आवक हो रही है, जिसमें अकेले महाराष्ट्र का योगदान 30000 टन से ज्यादा है.

मानसून और सट्टेबाजी से बढ़ी हलचल

कुछ इलाकों में मानसून की देरी और सामान्य से कम बारिश के कारण बाजार में सट्टेबाजी बढ़ गई है. खासकर महाराष्ट्र के नासिक और मध्य प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में व्यापारी भविष्य में कीमत बढ़ने की उम्मीद में खरीदारी कर रहे हैं. हालांकि प्रमुख उपभोक्ता बाजारों में मांग अभी सामान्य बनी हुई है. बेहतर गुणवत्ता वाला प्याज अभी भंडारण में रखा गया है, जिसे आने वाले महीनों में बाजार में उतारा जा सकता है.

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खरीफ फसल पर भी बनी हुई है नजर

जून महीने में भारत से करीब 1.50 लाख टन प्याज का निर्यात हुआ, लेकिन आने वाले समय में इसमें कमी आने की आशंका जताई जा रही है. इसकी वजह पाकिस्तान और चीन के सस्ते प्याज का अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध होना है. वहीं महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र में खरीफ प्याज की बुवाई करीब 15 दिन की देरी से चल रही है. कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भी बुवाई सामान्य से कम हुई है. ऐसे में सरकार आने वाले समय में बाजार और उत्पादन दोनों पर नजर बनाए हुए है.