टमाटर ने बिगाड़ा रसोई का बजट, 43 रुपये के पार पहुंची कीमत; 1 महीने में 26 फीसदी हुआ महंगा

देशभर में टमाटर की कीमतों में फिर तेज उछाल देखने को मिल रहा है. हीटवेव और कमजोर मानसून के कारण महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों से सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे खुदरा कीमतें 24 फीसदी और पिछले एक महीने में 26 फीसदी तक बढ़ गई हैं. आजादपुर मंडी समेत कई थोक बाजारों में भी टमाटर के दाम तेजी से बढ़े हैं.

टमाटर की कीमत Image Credit: Getty Images Editorial/PTI

Tomato Price Hike: देशभर में टमाटर की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिल रहा है. भीषण हीटवेव और कमजोर मानसून के कारण प्रमुख उत्पादक राज्यों से सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे खुदरा बाजार में टमाटर महंगा हो गया है. उपभोक्ता मामलों के विभाग के प्राइस मॉनिटरिंग सेल के अनुसार, बुधवार को देश में टमाटर का औसत खुदरा भाव बढ़कर 43.70 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 24 फीसदी अधिक है. पिछले एक महीने में ही टमाटर की खुदरा कीमतों में करीब 26 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

सप्लाई पर क्यों पड़ा असर

Financial Express की रिपोर्ट के मुताबिक, टमाटर की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह प्रमुख उत्पादक राज्यों में मौसम की मार है. महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में कमजोर मानसून और भीषण गर्मी के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है. इससे बाजार में टमाटर की सप्लाई कम हो गई है, जबकि मांग बनी हुई है. मांग और सप्लाई के बीच बढ़ते अंतर ने कीमतों को तेजी से ऊपर पहुंचा दिया है.

आजादपुर मंडी में 66 फीसदी की बढ़ोतरी

दिल्ली की आजादपुर मंडी के व्यापारियों के मुताबिक, देश की सबसे बड़ी सब्जी मंडियों में शामिल इस बाजार में टमाटर का औसत थोक भाव बढ़कर 2,700 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 66 फीसदी अधिक है. व्यापारियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा से टमाटर की सप्लाई लगभग बंद हो चुकी है. वहीं, कर्नाटक और महाराष्ट्र के किसानों को दक्षिण भारत के बाजारों में बेहतर कीमतें मिल रही हैं, जिससे उत्तर भारत में सप्लाई और कम हो गई है.

कुछ मंडियों में कई गुना बढ़े दाम

उपभोक्ता मामलों के विभाग के अनुसार, टमाटर का औसत थोक भाव भी पिछले साल के मुकाबले करीब 50 फीसदी बढ़कर 3,000 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया है. एक महीने पहले यही कीमत करीब 2,000 रुपये प्रति क्विंटल थी. व्यापारियों का कहना है कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा और अन्य राज्यों में अधिक तापमान के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे दक्षिण भारत की मंडियों पर दबाव बढ़ गया है.

हर साल क्यों बढ़ते हैं टमाटर के दाम

कृषि मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2025-26 में देश में टमाटर का उत्पादन बढ़कर 2.146 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4.19 फीसदी अधिक है. इसके बावजूद टमाटर की कीमतों में मौसमी उतार-चढ़ाव बना रहता है. इसकी वजह अलग-अलग राज्यों में बुवाई और कटाई का अलग-अलग समय होना है.

यदि किसी प्रमुख उत्पादक राज्य में मौसम खराब हो जाता है, तो पूरे देश की सप्लाई चेन प्रभावित हो जाती है और कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जून से अगस्त और अक्टूबर से नवंबर के बीच टमाटर का उत्पादन अपेक्षाकृत कम रहता है. यही कारण है कि इन महीनों में कीमतों में अक्सर तेजी देखने को मिलती है.

आलू और प्याज से मिली राहत

जहां टमाटर ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है, वहीं आलू और प्याज की कीमतों ने कुछ राहत दी है. बुधवार को आलू का औसत खुदरा भाव घटकर 21.99 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया, जो पिछले साल की तुलना में 14 फीसदी कम है. वहीं, प्याज का औसत खुदरा भाव 28.05 रुपये प्रति किलोग्राम रहा, जिसमें केवल मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई.

व्यापारियों का कहना है कि आलू और प्याज की बंपर पैदावार तथा रबी फसल का पर्याप्त स्टॉक सितंबर और अक्टूबर तक बाजार की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त रहेगा. ऐसे में फिलहाल सबसे ज्यादा दबाव टमाटर की कीमतों पर ही बने रहने की संभावना है.

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