राशन लेने वालों के लिए अच्छी खबर! अब मिलेगा बेहतर क्वालिटी का चावल, टूटे दानों की मात्रा घटाने का आदेश
केंद्र सरकार ने 80 करोड़ से अधिक PMGKAY लाभार्थियों को मिलने वाले राशन के चावल की गुणवत्ता सुधारने का बड़ा फैसला लिया है. अब कच्चे चावल में टूटे दानों की सीमा 25% से घटाकर 10% और परबॉयल्ड चावल में 16% से घटाकर 5% कर दी गई है.
केंद्र सरकार ने देश के 80 करोड़ से अधिक राशन कार्ड धारकों को लेकर एक बड़ा फैसला किया है. अब सरकारी राशन की दुकानों (pds) पर मिलने वाले चावल की क्वालिटी पहले से कहीं ज्यादा बेहतर होगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने बुधवार को फैसला किया कि सरकारी राशन में दिए जाने वाले चावल में ‘टूटे हुए चावल’ (ब्रोकन राइस) की मात्रा को भारी कटौती के साथ आधा से भी कम कर दिया गया है.
केंद्रीय खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि करीब तीन दशकों (30 साल) में पहली बार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत बांटे जाने वाले चावल के क्वालिटी स्टैंडर्ड को सुधारा गया है. सरकार के इस कदम से गरीब परिवारों को बेहतर गुणवत्ता का अनाज सम्मान के साथ मिल सकेगा.
क्या बदला और कितना बदला?
सरकार ने कच्चे और उबले, दोनों तरह के चावलों में टूटे दाने की सीमा को तय कर दिया है:
- कच्चा चावल : पहले सरकारी चावल में 25 फीसदी तक टूटा हुआ चावल मिलाने की छूट थी, जिसे अब घटाकर सिर्फ 10 फीसदी कर दिया गया है.
- उबला चावल: इसमें टूटे चावल की सीमा को 16 फीसदी से घटाकर सीधे 5 फीसदी पर ला दिया गया है.
बचे हुए टूटे चावल का क्या करेगी सरकार?
अब आपके मन में सवाल होगा कि इस छंटनी के बाद जो टूटा हुआ चावल बचेगा, उसका क्या होगा? पीटीआई रिपोर्ट के मुताबिक सरकार किसानों से खरीदे गए अनाज के एक-एक दाने का सही इस्तेमाल करेगी. राशन की दुकानों से जो बेहतर क्वालिटी का चावल बचेगा, उसे गरीबों में बांटा जाएगा. वहीं, छंटनी में निकले टूटे हुए चावल का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने (बायोफ्यूल) और पशुओं के चारे के रूप में किया जाएगा.
बनी रहेगी मुफ्त राशन की सुविधा
इस बदलाव से राशन की मात्रा या आपके हक पर कोई असर नहीं पड़ेगा. केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि हर पात्र परिवार को पहले की तरह ही पूरा अनाज मुफ्त मिलता रहेगा, बस अब उसकी क्वालिटी लाजवाब होगी. इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार क्यूआर-कोड आधारित ट्रैकिंग (QR-based traceability) का इस्तेमाल भी करेगी.
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बता दें कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सरकार हर लाभार्थी को प्रति माह 5 किलो अनाज (गेहूं-चावल) मुफ्त देती है. वहीं, अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के तहत आने वाले सबसे गरीब परिवारों को हर महीने प्रति परिवार 35 किलो अनाज मिलता है. भारतीय खाद्य निगम (FCI) किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर इसकी खरीद कर इसे लोगों तक पहुंचाता है.
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