US-Iran War: क्या और भड़केगी जंग? ट्रंप ने अब ओमान को दी बमबारी की धमकी, जानें क्यों बढ़ा तनाव

अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच तनाव और बढ़ गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान पर दबाव बनाने की अमेरिकी कोशिश के रास्ते में ओमान आया तो उस पर बमबारी की जा सकती है. दूसरी ओर ईरान और ओमान होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही शुरू करने के लिए अंतरिम व्यवस्था पर बातचीत कर रहे हैं.

डोनाल्ड ट्रंप Image Credit: Getty image

Highlights

  • अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच तनाव और बढ़ गया है.
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान पर दबाव बनाने की अमेरिकी कोशिश के रास्ते में ओमान आया तो उस पर बमबारी की जा सकती है.
  • दूसरी ओर ईरान और ओमान होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही शुरू करने के लिए अंतरिम व्यवस्था पर बातचीत कर रहे हैं.

अमेरिका और ईरान के बीच करीब छह महीने से जारी जंग के बीच अब खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओमान को बमबारी की धमकी दी है. यह धमकी ऐसे समय आई है, जब ईरान और ओमान होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही को लेकर एक अंतरिम समझौते पर बातचीत कर रहे हैं.

Fox News को फोन पर दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अगर ओमान ईरानी जहाजों की नाकेबंदी के रास्ते में आता है तो अमेरिका उस पर बमबारी करेगा. ट्रंप ने यह भी कहा कि नाकेबंदी से ईरान पर दबाव बन रहा है और युद्ध खत्म करने को लेकर वह किसी जल्दबाजी में नहीं हैं.

करीब 6 महीने से जारी है अमेरिका-ईरान जंग

अमेरिका-ईरान युद्ध को करीब छह महीने हो चुके हैं, लेकिन अभी तक इसका कोई हल नहीं निकला है. शांति वार्ता अटकी हुई है और बीच-बीच में होने वाले हमलों की वजह से तनाव बना हुआ है. इसका असर होर्मुज स्ट्रेट से कच्चे तेल और दूसरी जरूरी चीजों की आवाजाही पर भी पड़ा है.

यह रास्ता दुनिया के ऊर्जा बाजार के लिए बेहद अहम है. युद्ध से पहले दुनिया में कारोबार होने वाले कच्चे तेल का करीब पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता था.

होर्मुज को लेकर क्या चल रहा है?

खबर के मुताबिक, 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को प्रभावी रूप से बंद कर दिया था. इसके बाद से अमेरिका ऐसी व्यवस्था चाहता है, जिससे कारोबारी जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हो सके. हालांकि, अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी अपनी नाकेबंदी हटाने से पहले जहाजों की आवाजाही शुरू कराना चाहता है. इसी मुद्दे पर ईरान और ओमान के बीच पिछले कुछ हफ्तों से बातचीत चल रही है.

ईरान और ओमान किस समझौते पर कर रहे बात?

ईरानी राजनयिक ओमान के साथ होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही के लिए एक अंतरिम व्यवस्था तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं. ईरान ने सोमवार को बताया कि दोनों देश एक संयुक्त बयान और प्रस्तावित व्यवस्था को अंतिम रूप देने पर काम कर रहे हैं. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई के मुताबिक, जहाज किस रास्ते से गुजरेंगे, इसे लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी है.

हालांकि, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है. पहले हुई बातचीत में इस बात के संकेत मिले थे कि जहाज ईरान के पास वाले रास्ते से स्ट्रेट में प्रवेश कर सकते हैं और ओमान के पास वाले रास्ते से बाहर निकल सकते हैं. प्रस्तावित व्यवस्था में जहाजों से रास्ते से गुजरने के लिए कोई शुल्क नहीं लेने की बात भी है.

फिर ओमान पर क्यों भड़के ट्रंप?

मामले की अहम बात यही है. अमेरिका ईरान पर नाकेबंदी के जरिए दबाव बनाए रखना चाहता है. दूसरी तरफ ओमान ईरान के साथ मिलकर जहाजों की आवाजाही शुरू कराने की व्यवस्था पर बातचीत कर रहा है. ऐसे में ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ओमान अमेरिकी नाकेबंदी के रास्ते में आता है तो अमेरिका उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है.

ईरान के परमाणु हथियार पर ट्रंप ने फिर दी चेतावनी

ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी अपना पुराना रुख दोहराया है. उन्होंने सोमवार को Truth Social पर कहा कि अमेरिका का सबसे बड़ा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार हासिल न कर सके. यह बयान ऐसे समय आया है, जब बातचीत के लिए तय 60 दिन की अवधि खत्म हो चुकी है और अभी तक इस बात का कोई संकेत नहीं मिला है कि वॉशिंगटन और तेहरान ने इसे आगे बढ़ाने या अपने मतभेद दूर करने पर सहमति बनाई है.

गाजा को लेकर भी जारी है खींचतान

ईरान के साथ जारी तनाव के बीच गाजा को लेकर भी बातचीत चल रही है. ट्रंप के दामाद और अमेरिकी मध्य पूर्व वार्ताकार जेरेड कुशनर ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की है. इससे एक दिन पहले कुशनर ने मिस्र में हमास नेता खलील अल-हय्या से मुलाकात कर हथियार छोड़ने के मुद्दे पर बातचीत की थी.

यह बातचीत अमेरिका समर्थित 15 सूत्री योजना को लेकर चल रही है. हमास ने प्रस्तावित योजना को स्वीकार करने की बात कही है, जबकि इजरायल का कहना है कि उसकी सेना के पीछे हटने से पहले हमास को पूरी तरह हथियार छोड़ने होंगे.

दुनिया के लिए क्यों अहम है यह तनाव?

अमेरिका, ईरान और अब ओमान से जुड़ा यह तनाव सिर्फ इन देशों तक सीमित नहीं है. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई के सबसे महत्वपूर्ण रास्तों में से एक है. अगर यहां तनाव और बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित रहती है तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है. भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए महंगा कच्चा तेल महंगाई, रुपये और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ा सकता है.

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