EV Charging का बड़ा संकट! ₹2000 करोड़ की Scheme से 2030 की जरूरत का 2% भी पूरा नहीं?
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है, और सरकार भी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है. हालांकि, इस तेजी से बढ़ते सेक्टर के सामने एक बड़ी चुनौती है: पर्याप्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी. एक नई रिपोर्ट बताती है कि सरकार की ₹2,000 करोड़ की ईवी चार्जिंग पहल, जिसका उद्देश्य देश में चार्जिंग स्टेशनों का विस्तार करना है, 2030 तक अपेक्षित आवश्यकताओं का मात्र 2% भी पूरा नहीं कर पाएगी.
यह योजना अनुमानित 18,811 चार्जिंग पॉइंट को समर्थन दे सकती है, जबकि 2030 तक भारत को 30% ईवी अपनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लगभग 13 लाख चार्जिंग पॉइंट की आवश्यकता होगी. वर्तमान में, जुलाई 2023 तक देश में 52,718 चार्जिंग स्टेशन थे, जो 2022 के मुकाबले लगभग दस गुना वृद्धि है. बावजूद इसके, ग्रिड अपग्रेड की लागत और चार्जर की विश्वसनीयता जैसे मुद्दे गंभीर बने हुए हैं. दिल्ली में एक अध्ययन में 84% चार्जर गैर-कार्यात्मक पाए गए, जिससे इनकी संख्या के साथ-साथ कार्यक्षमता पर भी सवाल उठते हैं. इस अंतर को पाटने के लिए गति, बड़े पैमाने पर विस्तार और विश्वसनीयता तीनों की आवश्यकता है.