ग्लोबल पैमाने पर चमके भारत के ये 5 राज्य, अपर-मिडिल इनकम कैटेगरी में बनाई जगह; कई देशों के बराबर पहुंची आय
विश्व बैंक के मुताबिक भारत अभी भी लोअर-मिडिल इनकम अर्थव्यवस्था है, लेकिन देश के भीतर आर्थिक तस्वीर अलग है. दिल्ली समेत पांच राज्यों ने प्रति व्यक्ति आय के आधार पर अपर-मिडिल इनकम की सीमा पार कर ली है. वहीं महाराष्ट्र, हरियाणा और केरल मामूली अंतर से चूक गए, जबकि बिहार सबसे निचले पायदान पर बना हुआ है.

World Bank Upper Middle Income Report: भारत को भले ही विश्व बैंक ने प्रति व्यक्ति आय के आधार पर लोअर-मिडिल इनकम अर्थव्यवस्था की कैटेगरी में रखा हो, लेकिन देश के भीतर आर्थिक तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आती है. कई राज्यों ने इनकम के मामले में ऐसी रफ्तार पकड़ी है कि वे विश्व बैंक की अपर-मिडिल इनकम कैटेगरी के लेवल तक पहुंच गए हैं.
रिपोर्ट में सामने आई बड़ी तस्वीर
Moneycontrol की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पांच राज्य प्रति व्यक्ति आय के आधार पर विश्व बैंक की अपर-मिडिल इनकम सीमा को पार कर चुके हैं. वहीं महाराष्ट्र, हरियाणा और केरल बेहद मामूली अंतर से इस कैटेगरी में शामिल होने से चूक गए हैं. दूसरी ओर बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड अब भी सबसे निचले पायदान पर बने हुए हैं.
भारत अभी भी लोअर-मिडिल इनकम अर्थव्यवस्था
विश्व बैंक ने इस हफ्ते श्रीलंका, वियतनाम और फिलीपींस को इनकम में लगातार सुधार के आधार पर हाई इनकम ग्रुप की नई कैटेगरी में अपग्रेड किया है. हालांकि भारत अभी भी एटलस मेथड के अनुसार 2,760 डॉलर प्रति व्यक्ति आय के साथ लोअर-मिडिल इनकम देश बना हुआ है. यह आंकड़ा लोअर-मिडिल इनकम देशों के औसत 2,488 डॉलर से थोड़ा अधिक है.
विश्व बैंक के अनुसार 1,175 डॉलर से कम प्रति व्यक्ति आय वाले देश लो-इनकम कैटेगरी में आते हैं. 1,175 डॉलर से 4,635 डॉलर के बीच प्रति व्यक्ति आय वाले देशों को लोअर-मिडिल इनकम और 14,375 डॉलर से अधिक प्रति व्यक्ति आय वाले देशों को हाई-इनकम कैटेगरी में रखा जाता है.
इन 5 राज्यों ने पार की अपर-मिडिल इनकम की सीमा
राज्यों की बात करें तो दिल्ली सबसे आगे है, जहां प्रति व्यक्ति आय 6,217 डॉलर है. इसके बाद कर्नाटक (5,579 डॉलर), तेलंगाना (5,407 डॉलर), तमिलनाडु (5,329 डॉलर) और गुजरात (4,734 डॉलर) का स्थान है. इन पांचों राज्यों की प्रति व्यक्ति आय विश्व बैंक की 4,636 डॉलर की अपर-मिडिल इनकम सीमा से ऊपर है.
महाराष्ट्र, हरियाणा और केरल भी रेस में
वहीं तीन बड़े राज्य बहुत कम अंतर से इस श्रेणी में शामिल होने से चूक गए. महाराष्ट्र की प्रति व्यक्ति आय 4,628 डॉलर रही, जो निर्धारित सीमा से केवल 8 डॉलर कम है. हरियाणा की प्रति व्यक्ति आय 4,627 डॉलर रही, जो 9 डॉलर कम है. वहीं केरल की प्रति व्यक्ति आय 4,610 डॉलर रही, जो सीमा से 26 डॉलर नीचे है.
रिपोर्ट के मुताबिक ये राज्य सबसे गरीब
इनकम के मामले में बिहार सबसे गरीब बड़ा राज्य बना हुआ है, जहां प्रति व्यक्ति आय 984 डॉलर है. इसके बाद उत्तर प्रदेश (1,403 डॉलर) और झारखंड (1,470 डॉलर) का स्थान है. रिपोर्ट के अनुसार बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड की प्रति व्यक्ति आय नेपाल और सब-सहारा अफ्रीका के कई देशों से भी कम है.
30 सालों में कई राज्यों ने लगाई लंबी छलांग
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1994 में भारत का कोई भी बड़ा राज्य मौजूदा विश्व बैंक मानकों के अनुसार मिडिल-इनकम श्रेणी में नहीं आता था. आज कई राज्यों की प्रति व्यक्ति आय दक्षिण अफ्रीका (6,270 डॉलर), फिजी (6,230 डॉलर) और मंगोलिया (6,210 डॉलर) जैसी अर्थव्यवस्थाओं के बराबर पहुंच गई है. वहीं कर्नाटक और तेलंगाना की प्रति व्यक्ति आय इंडोनेशिया (5,120 डॉलर) और वियतनाम (4,970 डॉलर) से भी अधिक है.
राज्यों के बीच बढ़ी आय असमानता
रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक प्रगति के बावजूद राज्यों के बीच इनकम का गैप बढ़ा है. राज्यों के बीच Gini Coefficient वर्ष 1994-95 के 0.230 से बढ़कर 2025-26 में 0.261 हो गया है. वहीं 90वें और 10वें पर्सेंटाइल वाले राज्यों के बीच इनकम का अनुपात 2.38 गुना से बढ़कर 3.73 गुना हो गया है, जो बढ़ती क्षेत्रीय असमानता को दिखाता है.
मिडिल-इनकम राज्यों ने सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की
आंकड़ों के अनुसार मिडिल-इनकम राज्यों की प्रति व्यक्ति आय वर्ष 1994-95 के मुकाबले 36.7 गुना बढ़ी है. वहीं सबसे समृद्ध राज्यों में यह बढ़ोत्तरी 28.3 गुना और सबसे गरीब राज्यों में 26.6 गुना रही है. कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु इस वृद्धि में सबसे आगे रहे, जबकि बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड लगातार पीछे बने रहे.
इन राज्यों की तस्वीर सबसे ज्यादा बदली
करीब तीन दशक पहले उत्तर प्रदेश और ओडिशा की प्रति व्यक्ति आय लगभग समान थी, लेकिन अब ओडिशा की प्रति व्यक्ति आय उत्तर प्रदेश से 75 प्रतिशत अधिक है. इसी तरह झारखंड और असम लगभग समान स्तर पर थे, लेकिन 2025-26 में असम की प्रति व्यक्ति आय झारखंड से 48 प्रतिशत अधिक हो गई है. वहीं 1994-95 में बड़े राज्यों में सबसे अधिक प्रति व्यक्ति आय वाला पंजाब अब राजस्थान के बराबर पहुंच गया है और उससे आगे सात राज्य निकल चुके हैं.
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