ITR यूटिलिटी में बड़ा बदलाव, Exempt Income के तहत आया नया ‘Other Income’ कॉलम; टैक्सपेयर्स के लिए क्यों है जरूरी?
आयकर विभाग ने ITR यूटिलिटी में बड़ा बदलाव करते हुए Schedule EI के तहत दूसरे इनकम का नया कॉलम जोड़ा है. इससे करदाता ऐसी टैक्स फ्री प्राप्तियों की भी जानकारी दे सकेंगे, जो किसी तय कैटेगरी में नहीं आतीं. स्वंय खुलासा करने से AIS या दूसरे रिकॉर्ड से डेटा मिसमैच और संभावित नोटिस का जोखिम कम हो सकता है.
ITR Utility Update: आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने वाले टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स विभाग ने ITR यूटिलिटी में एक अहम बदलाव किया है. अब शेड्यूल EI (Exempt Income) के तहत ‘Other Income’ नाम से एक नया कॉलम जोड़ दिया गया है. इससे ऐसे टैक्सपेयर्स को राहत मिलेगी, जिनके पास ऐसी टैक्स-फ्री इनकम है जो पहले से मौजूद किसी तय कैटेगरी में फिट नहीं बैठती. यह बदलाव करदाताओं और टैक्स एक्सपर्ट्स के सुझावों के आधार पर किया गया है.
यह बदलाव सबसे ज्यादा ITR-2 और ITR-3 भरने वाले उन टैक्सपेयर्स के लिए उपयोगी है, जिनके पास ग्रामीण कृषि भूमि की बिक्री, रिश्तेदारों से मिले उपहार या दूसरे टैक्स फ्री प्राप्तियां हैं और वे उन्हें स्वेच्छा से ITR में दिखाना चाहते हैं.
क्या है नया बदलाव?
ईटी वेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, पहले कई पेशेवर ग्रामीण कृषि भूमि की बिक्री से मिली रकम या रिश्तेदारों से मिले उपहार जैसी टैक्स-फ्री प्राप्तियों को खुद के मन से Exempt Income Schedule में दिखाते थे, ताकि फ्यूचर में टैक्स विभाग की ओर से किसी तरह का नोटिस या पूछताछ न हो. हालांकि बाद में यह विकल्प हटा दिया गया था. अब अपडेटेड ITR यूटिलिटी में इसे फिर से शामिल किया गया है.
‘Other Income’ कॉलम का क्या मतलब है?
शुरुआती ITR यूटिलिटी में ऐसी टैक्स-फ्री इनकम को दिखाने के लिए कोई अलग विकल्प नहीं था, जो तय कैटेगरी में शामिल नहीं होती. अब ‘अदर इनकम’ नाम का नया कॉलम जोड़ने से टैक्सपेयर्स ऐसी Exempt Income को भी स्वेच्छा से घोषित कर सकेंगे.
किन इनकम पर नहीं लगता टैक्स?
ग्रामीण कृषि भूमि की बिक्री से मिलने वाली रकम और किसी विशेष रिश्तेदारों से मिले उपहार टैक्सेबल नहीं होते. अगर ग्रामीण कृषि भूमि, आयकर अधिनियम 1961 की धारा 2(14) के तहत ‘कैपिटल एसेट’ की कैटेगरी में नहीं आती है, तो उसकी बिक्री पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता. इसी तरह, धारा 56(2)(x) के तहत विशेष रिश्तेदारों से मिले उपहार भी टैक्स के दायरे से बाहर रहते हैं.
टैक्सपेयर्स को क्या करना चाहिए?
अब जब Schedule EI में ‘Other Income’ का विकल्प उपलब्ध है, तो करदाताओं को बड़ी या महत्वपूर्ण टैक्स-फ्री प्राप्तियों की स्वेच्छा से जानकारी देने पर विचार करना चाहिए. खासकर तब, जब वह लेनदेन AIS, SFT, बैंक स्टेटमेंट या आयकर विभाग के दूसरे रिकॉर्ड में दिखाई दे सकता हो. ऐसा करने से फ्यूचर में डेटा मिसमैच के कारण नोटिस या पूछताछ की संभावना कम हो सकती है और यह भी स्पष्ट होता है कि करदाता ने उस लेनदेन को ITR दाखिल करते समय ध्यान में रखा है.
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