24 साल की उम्र में शुरू किया कारोबार, लाइसेंस राज को दी चुनौती; ऐसे खड़ी हुई ₹100 लाख करोड़ से ज्यादा की विरासत

महज 24 साल की उम्र में आदित्य विक्रम बिरला ने कारोबार शुरू किया और लाइसेंस राज के दौर में विदेशों तक विस्तार किया. थाईलैंड से शुरू हुआ उनका वैश्विक सफर आज 120 अरब डॉलर के करीब पहुंच चुके बड़े कारोबारी समूह की नींव बना.

आदित्य विक्रम बिरला Image Credit:

भारत के कारोबारी इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जिन्होंने मुश्किल दौर में भी देश के बाहर कारोबार फैलाने का सपना देखा. आदित्य विक्रम बिरला भी ऐसे ही उद्योगपतियों में शामिल थे. महज 24 साल की उम्र में कारोबार शुरू करने वाले बिरला ने उस दौर में विदेशों में कंपनियां खड़ी कीं, जब भारत ‘लाइसेंस राज’ के दौर से गुजर रहा था. उनकी इसी सोच ने आगे चलकर एक बड़े वैश्विक कारोबारी साम्राज्य की नींव रखी.

MIT से पढ़ाई के बाद 24 साल में शुरू किया कारोबार

आदित्य विक्रम बिरला का जन्म 1943 में कोलकाता में हुआ था. उन्होंने अमेरिका के Massachusetts Institute of Technology (MIT) से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. इसके बाद महज 24 साल की उम्र में 1965 में ईस्टर्न स्पिनिंग मिल्स एंड इंडस्ट्रीज की स्थापना कर अपना कारोबारी सफर शुरू किया.

उस समय भारत में उद्योग लगाने और कारोबार बढ़ाने के लिए सरकार से कई तरह की मंजूरियां लेनी पड़ती थीं. ऐसे माहौल में बिरला ने केवल घरेलू बाजार तक सीमित रहने के बजाय विदेशों में कारोबार का रास्ता चुना.

1969 में विदेश में लगाया पहला बड़ा दांव

आदित्य विक्रम बिरला के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक 1969 में थाईलैंड में Indo-Thai Synthetics की स्थापना थी. इसे भारत के शुरुआती बड़े विदेशी औद्योगिक उपक्रमों में गिना जाता है. आर्थिक उदारीकरण से करीब दो दशक पहले उन्होंने भारतीय कारोबारी समूह को विदेश में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया था.

इसके बाद उन्होंने दक्षिण-पूर्व एशिया में तेजी से विस्तार किया. थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस और मिस्र समेत कई देशों में उन्होंने कारोबार खड़े किए. समूह के अनुसार, उन्होंने विदेशों में 19 कंपनियां स्थापित कीं.

टेक्सटाइल से केमिकल तक फैलाया कारोबार

आदित्य विक्रम बिरला ने अपने कारोबार को केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने टेक्सटाइल, एल्युमिनियम, केमिकल, फर्टिलाइजर, पाम ऑयल और इंजीनियरिंग जैसे कई क्षेत्रों में विस्तार किया. उनके नेतृत्व में ग्रासिम और हिंडाल्को जैसी कंपनियों ने भी तेजी से विस्तार किया.

उनकी सोच का असर यह हुआ कि भारतीय कारोबारी कंपनियों के लिए विदेशों में निवेश और उत्पादन की संभावनाएं और मजबूत हुईं. इसी वजह से उन्हें भारत के शुरुआती वैश्विक उद्योगपतियों में गिना जाता है.

51 साल की उम्र में हुआ निधन

आदित्य विक्रम बिरला को 1993 में कैंसर का पता चला था. 1995 में महज 51 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. उस समय उनके कारोबार का आकार करीब 2 अरब डॉलर बताया गया था. उनके निधन के बाद उनके बेटे कुमार मंगलम बिरला ने 28 साल की उम्र में समूह की जिम्मेदारी संभाली.

आज आदित्य बिरला ग्रुप 41 देशों में मौजूद है. समूह की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, जून 2026 तक इसका समेकित मार्केट कैपिटलाइजेशन 118 अरब डॉलर से ज्यादा था और समूह में 2.27 लाख से अधिक कर्मचारी काम करते हैं.

इस तरह 24 साल की उम्र में शुरू हुई आदित्य विक्रम बिरला की कारोबारी यात्रा ने न केवल बिरला परिवार के कारोबार को नई दिशा दी, बल्कि भारत के वैश्विक कारोबारी विस्तार की कहानी में भी एक अहम अध्याय जोड़ा.

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