न शेयर, न म्यूचुअल फंड, फिर भी ₹3 करोड़ का लक्ष्य! 45 साल के शख्स ने ऐसे बनाया रिटायरमेंट प्लान

दिल्ली के 45 साल के शख्स ने सीधे शेयर, म्यूचुअल फंड या एफडी में निवेश किए बिना रिटायरमेंट के लिए 3 करोड़ रुपये से ज्यादा का लक्ष्य बनाया है. उन्होंने 2006 में पीपीएफ और 2009 में एनपीएस शुरू किया. मौजूदा कॉर्पस करीब 1.9 करोड़ रुपये है. 2031 तक पीपीएफ और एनपीएस से 3 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाने का लक्ष्य है.

रिटायरमेंट प्लान

Highlights

  • करीब ₹80 लाख, लक्ष्य 2031 तक ₹1 करोड़ से ज्यादा.
  • करीब ₹1.1 करोड़, लक्ष्य 2031 तक करीब ₹2.15 करोड़.
  • 50 साल की उम्र में रिटायरमेंट, 3 करोड़ रुपये से ज्यादा कॉर्पस और करीब ₹1 लाख मासिक पेंशन का अनुमान.

शेयर बाजार में निवेश किए बिना करोड़ों रुपये का रिटायरमेंट फंड बनाना मुश्किल लग सकता है. लेकिन दिल्ली के 45 साल के एक शख्स ने अपनी वित्तीय योजना में सीधे शेयर, म्यूचुअल फंड और यहां तक कि एफडी को भी शामिल नहीं किया. इसके बावजूद उनका लक्ष्य 2031 में 50 साल की उम्र तक 3 करोड़ रुपये से ज्यादा का रिटायरमेंट कॉर्पस तैयार करना है. इसके साथ वह करीब 1 लाख रुपये महीने की पेंशन का भी अनुमान लगा रहे हैं.

PPF और NPS बने दौलत की नींव

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शख्स ने मार्च 2006 में पीपीएफ शुरू किया था और जून 2009 में एनपीएस में निवेश शुरू किया. करीब दो दशक से ये दोनों योजनाएं उनकी वित्तीय योजना का मुख्य हिस्सा बनी हुई हैं. मौजूदा समय में उनके पीपीएफ में करीब 80 लाख रुपये और एनपीएस में करीब 1.1 करोड़ रुपये हैं. 2031 तक उनका लक्ष्य पीपीएफ को 1 करोड़ रुपये से ज्यादा और एनपीएस को करीब 2.15 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है.

निवेश का सबसे बड़ा नियम- पहले बचत, फिर खर्च

उस व्यक्ति की रणनीति काफी सरल रही है. उन्होंने निवेश को महीने के आखिर में बची रकम से करने के बजाय पहले निवेश करने की आदत बनाई. वह हर साल पीपीएफ में 1.5 लाख रुपये डालते हैं, जो मौजूदा अधिकतम सालाना सीमा है.

जब उन्होंने 2006 में पीपीएफ शुरू किया था, तब सालाना निवेश की सीमा 70,000 रुपये थी. समय के साथ सरकार ने सीमा बढ़ाई तो उन्होंने अपना योगदान भी बढ़ाया. इस तरह नियमित निवेश उनकी वित्तीय योजना का सबसे अहम हिस्सा बना रहा.

20 साल तक निवेश ने दिखाया कंपाउंडिंग का असर

पीपीएफ की मौजूदा ब्याज दर 7.1% है. लेकिन नरेश को अपने निवेश को लंबे समय तक बढ़ने देने का फायदा मिला. उनके पुराने निवेश को पहले के वर्षों में मिलने वाली ऊंची ब्याज दरों का भी लाभ मिला और रकम को लंबे समय तक कंपाउंड होने का मौका मिला.

उनका मूल 15 साल का पीपीएफ कार्यकाल 2021 में पूरा हुआ था. इसके बाद उन्होंने पैसा निकालने के बजाय अकाउंट को दो बार बढ़ाया और निवेश का सफर 2031 तक जारी रखा. यानी उनकी रणनीति में ज्यादा रिटर्न खोजने के बजाय लंबे समय तक निवेश बनाए रखना अहम रहा.

टैक्स बचत ने भी निभाई बड़ी भूमिका

शख्स ने पीपीएफ में 1.5 लाख रुपये निवेश करते हैं और पुराने टैक्स रिजीम में सेक्शन 80C के तहत इसका इस्तेमाल करते हैं. उनके अनुमान के मुताबिक, 30% टैक्स स्लैब में इससे करीब 45,000 रुपये सालाना टैक्स बचता है. लंबे समय में वह करीब 10 लाख रुपये की कुल टैक्स बचत का अनुमान लगाते हैं.

हालांकि, पीपीएफ में निवेश सिर्फ टैक्स बचाने के लिए करना जरूरी नहीं है. इसकी अपनी लॉक-इन अवधि, निवेश सीमा और निकासी से जुड़े नियम हैं.

शेयर नहीं खरीदे, फिर भी इक्विटी में मिला एक्सपोजर

शख्स का एनपीएस उनके रिटायरमेंट प्लान का ग्रोथ इंजन रहा है. उन्होंने एनपीएस में करीब 2 लाख रुपये सालाना योगदान किया है. मौजूदा एनपीएस कॉर्पस करीब 1.1 करोड़ रुपये है, जबकि कुल योगदान लगभग 34 लाख रुपये रहा है. उनके मुताबिक अब तक औसत सालाना रिटर्न करीब 12% रहा है.

खास बात यह है कि उन्होंने कभी सीधे शेयर नहीं खरीदे. लेकिन एनपीएस में पैसा इक्विटी, कॉर्पोरेट बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटीज जैसे विकल्पों में लगाया जा सकता है. यानी उन्होंने खुद शेयर चुने बिना भी इक्विटी बाजार की ग्रोथ में हिस्सा लिया.

ज्यादा रिटर्न के बजाय मानसिक शांति को दी प्राथमिकता

शख्स ने करियर के शुरुआती दौर में कुछ मार्केट-लिंक्ड प्रोडक्ट्स में निवेश किया था, लेकिन वह रणनीति उन्हें पसंद नहीं आई. इसके बाद उन्होंने ऐसे निवेशों से दूरी बना ली.

उनका मानना है कि शायद कहीं और निवेश करने पर रिटर्न ज्यादा मिल सकता था, लेकिन वह मानसिक शांति से संतुष्ट थे. उन्होंने ऐसे विकल्प चुने जिन्हें वह समझते थे और जिनके साथ लंबे समय तक बने रह सकते थे.

50 की उम्र में रिटायरमेंट, लेकिन NPS में है बड़ा पेंच

शख्स 2031 में 50 साल की उम्र में रिटायर होना चाहते हैं. उनके अनुमान के मुताबिक उस समय एनपीएस कॉर्पस करीब 2.15 करोड़ रुपये हो सकता है.

उनकी योजना के तहत एनपीएस के समय से पहले निकासी वाले विकल्प में करीब 20% रकम एकमुश्त ली जा सकती है, जबकि बाकी 80% रकम एन्युटी खरीदने में इस्तेमाल होगी. 2.15 करोड़ रुपये के अनुमानित कॉर्पस पर करीब 43 लाख रुपये एकमुश्त और लगभग 1.72 करोड़ रुपये एन्युटी में जा सकते हैं. करीब 7% एन्युटी रेट मानने पर पेंशन लगभग 1 लाख रुपये महीने हो सकती है.

हालांकि, यह केवल अनुमान है. 2.15 करोड़ रुपये का एनपीएस कॉर्पस करीब 12% सालाना रिटर्न जारी रहने की धारणा पर आधारित है. बाजार से जुड़े रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती. इसके अलावा 2031 में उपलब्ध वास्तविक एन्युटी रेट से अंतिम पेंशन तय होगी.

EPF को रिटायरमेंट के बजाय बच्चे की पढ़ाई के लिए रखा

शख्स अपने ईपीएफ को रिटायरमेंट कॉर्पस में शामिल नहीं कर रहे हैं. उनके अनुमान के मुताबिक 2031 तक ईपीएफ में करीब 2 करोड़ रुपये हो सकते हैं. उन्होंने इस रकम को बच्चे की उच्च शिक्षा के लिए अलग रखा है.

इस तरह उनके पास अलग-अलग लक्ष्यों के लिए अलग कॉर्पस है. पीपीएफ रिटायरमेंट की लंबी अवधि की बचत के लिए, एनपीएस रिटायरमेंट इनकम और पेंशन के लिए और ईपीएफ बच्चे की उच्च शिक्षा के लिए है.

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