Akasa का फ्लीट छोटा… लेकिन इंडिगो और Air India से अधिक गड़बड़ियां, क्यों है सेफ्टी का मामला इतना पेचीदा?
पहली नजर में संसद में नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा पेश किए गए डेटा के आंकड़े आकासा के टेक्निकल परफॉर्मेंस पर सवाल उठाते दिखते हैं. लेकिन ये एक से अधिक बुनियादी सवाल भी उठाते हैं. यह डेटा 3 अगस्त को राज्यसभा में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने पेश किया था.

आकासा एयर ने 2026 के शुरुआती छह महीनों में घरेलू ऑपरेशन्स में 151 ‘बड़ी कमियों’ (Significant Defects) की रिपोर्ट दी है. यह संख्या इंडिगो की 44 कमियों से लगभग तीन गुना और एयर इंडिया की 36 कमियों से चार गुना से भी ज्यादा है, जबकि आकासा का फ्लीट (विमानों का बेड़ा) काफी छोटा और नया है.
क्यों हैं इतने सवाल?
पहली नजर में संसद में नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा पेश किए गए डेटा के आंकड़े आकासा के टेक्निकल परफॉर्मेंस पर सवाल उठाते दिखते हैं. लेकिन ये एक से अधिक बुनियादी सवाल भी उठाते हैं. आखिर बड़ी कमियों का मतलब क्या है? और क्या अलग-अलग एयरलाइंस के आंकड़ों की तुलना तब तक की जा सकती है, जब तक यह न समझा जाए कि हर एयरलाइन टेक्निकल दिक्कतों का मेंटेनेंस, रिकॉर्डिंग और रिपोर्टिंग कैसे करती है?
आकासा के फाउंडर और CEO विनय दुबे ने कहा कि इन आंकड़ों को सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के तौर पर देखना गलतफहमी पैदा करने वाला होगा. दुबे ने मनीकंट्रोल से कहा, ‘ये सुरक्षा नियमों का उल्लंघन नहीं हैं. यह कहना बिल्कुल गलत है. असल में, यह तो इसका ठीक उल्टा है.’
नियमों के उल्लंघन और टेक्निकल कमियां
यह डेटा 3 अगस्त को राज्यसभा में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने पेश किया था. यह डेटा डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) द्वारा सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और टेक्निकल कमियों की निगरानी से जुड़े सवालों के जवाब में दिया गया था.
सरकार की रिपोर्ट में एयरलाइन के हिसाब से ‘बड़ी कमियों’ (Significant Defects) की लिस्ट दी गई है, और साथ ही सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर की गई रेगुलेटरी कार्रवाई की जानकारी भी अलग से दी गई है. दुबे के मुताबिक, आकासा के मामलों में से काफी मामले ऐसे हैं जिनमें एयरलाइन ने ऑपरेशन के दौरान किसी पुर्जे के खराब होने के बजाय, अपनी मेंटेनेंस प्रोसेस के तहत पहले से ही पुर्जे बदले हैं.
प्रिवेंटिव मेंटेनेंस
उन्होंने कहा, ‘मिसाल के तौर पर अगर हम उड़ान भरने से पहले किसी पुर्जे को बदलने का फैसला करते हैं, तो हम उसका रिकॉर्ड रखते हैं और जब सरकार पूछती है, तो हम बताते हैं कि हमने यह पुर्जा बदल दिया है.’
इसका मतलब है कि ज्यादा बड़ी कमियों की रिपोर्ट होने का मतलब यह नहीं है कि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन भी अधिक हुआ है. इन आंकड़ों पर इस बात का भी असर पड़ सकता है कि कोई एयरलाइन ‘प्रिवेंटिव मेंटेनेंस’ (समय रहते की जाने वाली मरम्मत) को कैसे देखती है और ऐसे कामों का रिकॉर्ड और रिपोर्ट कैसे रखती है.
आंकड़ों में अंतर दिखता है
जनवरी और जून 2026 के बीच, आकासा ने घरेलू ऑपरेशन्स में 151 और इंटरनेशनल ऑपरेशन्स में एक बड़ी खराबी (Significant Defect) की रिपोर्ट की.
एयर इंडिया एक्सप्रेस ने 51 घरेलू और दो इंटरनेशनल ‘बड़ी खराबियों’ की रिपोर्ट की, जबकि इंडिगो ने 44 घरेलू और तीन इंटरनेशनल खराबियों की रिपोर्ट की. एयर इंडिया ने 36 घरेलू और 10 इंटरनेशनल बड़ी खराबियों की रिपोर्ट की, जबकि स्पाइसजेट ने सात घरेलू और दो इंटरनेशनल खराबियों की रिपोर्ट की.
किसके पास कितने विमान?
जब फ्लीट (विमानों के बेड़े) के साइज पर ध्यान दिया जाता है, तो ये अंतर और भी साफ हो जाते हैं. जून के आखिर में इंडिगो के पास 432 विमान थे और एयर इंडिया के पास 190 से 220 के बीच विमान थे. आकासा 40 से कुछ ज्यादा विमान ऑपरेट कर रही थी.
दुबे ने कहा, ‘हम सिर्फ 40 विमान ऑपरेट कर रहे हैं, जबकि कोई और 400 विमान ऑपरेट कर रहा है. इसीलिए संदर्भ बहुत जरूरी है.’
2022 में आकासा की हुई थी शुरुआत
आकासा का फ्लीट अपेक्षाकृत नया है, इसलिए ये आंकड़े खास तौर पर ध्यान देने लायक हैं. एयरलाइन ने अगस्त 2022 में ऑपरेशन शुरू किया था और तब से तेजी से विस्तार किया है. इस महीने की शुरुआत में उसने कहा कि वह इतनी कम अवधि में 40 से अधिक विमान शामिल करने वाली पहली भारतीय एयरलाइन बन गई है.
आमतौर पर उम्मीद की जाती है कि नए फ्लीट में एज से जुड़ी तकनीकी समस्याएं कम होंगी. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर एयरलाइन में रिपोर्ट की गई बड़ी खराबियों की संख्या एक जैसी ही होगी, खासकर तब जब मेंटेनेंस और रिपोर्टिंग के तरीके अलग-अलग हों.
तरीके को बताया जिम्मेदार
दुबे ने आकासा के आंकड़ों के लिए आंशिक रूप से प्रिवेंटिव मेंटेनेंस (समय रहते रखरखाव) के तरीके को जिम्मेदार बताया. उन्होंने कहा, ‘एक बात यह है कि हम प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस कर रहे हैं और पुर्जों (Components) के खराब होने से पहले ही उन्हें बदल रहे हैं.’
इस तरह के तरीके में जिन पुर्जों को बदलने की जरूरत होती है, उन्हें सर्विस के दौरान खराब होने से पहले ही बदला जा सकता है. अगर ऐसी गतिविधियों को ‘बड़ी खराबी’ वाले डेटा में दर्ज किया जाता है, तो ज्यादा प्रोएक्टिव तरीके से पुर्जे बदलने वाली एयरलाइन ज्यादा संख्या रिपोर्ट कर सकती है, भले ही उसका सुरक्षा रिकॉर्ड खराब न हो.
दुबे ने कहा कि इसलिए आकासा इन आंकड़ों को सुरक्षा में कमी के बजाय अपने मेंटेनेंस अनुशासन के प्रतिबिंब के तौर पर देखती है.
घरेलू बड़ी कमियों की जानकारी
पिछले वर्षों के आंकड़ों में भी एयरलाइंस के बीच काफी अंतर दिखता है. आकासा ने 2023 में 143, 2024 में 243 और 2025 में 195 घरेलू बड़ी कमियों की जानकारी दी. एयर इंडिया ने क्रमशः 119, 197 और 313, जबकि इंडिगो ने 87, 75 और 86 कमियों की जानकारी दी.
ये आंकड़े बताते हैं कि अलग-अलग एयरलाइंस के टेक्निकल या सेफ्टी परफॉर्मेंस की तुलना करने के लिए ‘बड़ी कमियों’ की कुल संख्या का इस्तेमाल करने से पहले संदर्भ को समझना क्यों जरूरी है.
रेगुलेटरी कार्रवाई से जुड़ा डेटा
सरकार ने सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर रेगुलेटरी कार्रवाई से जुड़ा डेटा अलग से दिया. सरकार ने संसद को बताया कि DGCA ने जनवरी 2024 और जून 2026 के बीच सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के लिए एयरलाइंस को 382 ‘शो-कॉज नोटिस’ (कारण बताओ नोटिस) जारी किए. रेगुलेटरी कार्रवाई में जुर्माना लगाना, मंजूरी या ऑथराइजेशन को सस्पेंड करना और चेतावनी देना शामिल हो सकता है.
DGCA ने बड़े एयरपोर्ट्स पर एक व्यापक स्पेशल ऑडिट भी किया है, जिसमें फ्लाइट्स ऑपरेशन, एयरवर्दीनेस (हवाई जहाज के उड़ने लायक होने की स्थिति), एयरक्राफ़्ट मेंटेनेंस, ग्राउंड हैंडलिंग, रैंप सेफ्टी, एयरोड्रोम ऑपरेशन और एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं.
रेगुलेटर को एयरलाइंस, मेंटेनेंस ऑर्गनाइजेशन, ग्राउंड हैंडलर्स और एयरपोर्ट ऑपरेटर्स से जुड़े नियमों का पालन न करने और प्रक्रिया में कमियों का पता चला.
एयर इंडिया पर हुई थी कार्रवाई
उदाहरण के लिए, एयर इंडिया को रेगुलेटरी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है. इसमें सर्टिफिकेशन की जरूरी शर्तों को पूरा न करने वाले एयरक्राफ़्ट को ऑपरेट करने पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना और बिना मंजूरी के क्रू रोस्टरिंग (कर्मचारियों की ड्यूटी तय करने) पर कार्रवाई शामिल है.
बार-बार तकनीकी और मेंटेनेंस से जुड़ी समस्याओं के कारण स्पाइसजेट को भी कड़ी निगरानी में रखा गया है. इस तरह की रेगुलेटरी कार्रवाई, सरकार के संसदीय जवाब में एयरलाइन-वार बताई गई ‘बड़ी खराबी’ (Significant-Defect) की संख्या से अलग है.
बड़ी खराबी का क्या अर्थ?
डेटा को समझने के लिए यह फर्क बहुत जरूरी है. किसी ‘बड़ी खराबी’ की रिपोर्ट का मतलब यह नहीं है कि एयरलाइन ने सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया है. इसके उलट, एयरलाइन द्वारा रिपोर्ट की गई ‘बड़ी खराबी’ की कुल संख्या से अलग, नियमों का पालन न करने पर भी रेगुलेटरी कार्रवाई हो सकती है.
इसलिए, अकासा के आंकड़े एक बड़ा सवाल खड़ा करते हैं कि बिना ज्यादा जानकारी के एयरलाइन-वार ‘बड़ी खराबी’ के आंकड़ों से क्या नतीजा निकाला जा सकता है.
सिर्फ मुख्य आंकड़ों को देखने वाले यात्रियों के लिए यह अंतर चौंकाने वाला है. 40 से कुछ अधिक एयरक्राफ्ट ऑपरेट करने वाली एयरलाइन ने अपने से कई गुना बड़े फ्लीट वाली एयरलाइंस की तुलना में घरेलू स्तर पर काफी ज्यादा ‘बड़ी खराबी’ की रिपोर्ट की.
अकासा ने क्या कहा?
हालांकि, अकासा का कहना है कि इन आंकड़ों का कुछ हिस्सा उन पार्ट्स को दिखाता है जिनकी पहचान ‘प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस’ (संभावित खराबी का पहले से पता लगाने वाली प्रक्रिया) के जरिए खराबी आने से पहले ही कर ली गई और उन्हें बदल दिया गया.
इसलिए, मुद्दा सिर्फ यह नहीं है कि अकासा ने 151 ‘बड़ी खराबी’ की रिपोर्ट क्यों की. बल्कि सवाल यह है कि क्या एयरलाइन-वार आंकड़े – बिना इस बात की साफ जानकारी के कि उनमें क्या शामिल है और अलग-अलग एयरलाइंस में ऐसी घटनाओं को किस तरह से क्लासिफाई और रिपोर्ट किया जाता है – एयरलाइन की सुरक्षा के बारे में सही तुलना करने के लिए काफी जानकारी देते हैं.