टाटा संस में नया कानूनी पेच, AGM टलने के बाद चंद्रशेखरन के पद पर बना सस्पेंस; क्या बने रहेंगे डायरेक्टर?
टाटा संस की AGM बिना किसी कामकाज के टलने के बाद एन चंद्रशेखरन के डायरेक्टर पद को लेकर कानूनी सवाल खड़े हो गए हैं. बैठक में उनके दोबारा डायरेक्टर बनने का प्रस्ताव रखा जाना था, लेकिन कोरम पूरा नहीं हो सका.
N Chandrasekaran: टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के डायरेक्टर पद को लेकर कानूनी उलझन पैदा हो गई है. कंपनी की सालाना आम बैठक यानी AGM में कोई कामकाज नहीं हो सका और बैठक टल गई. इसके बाद सवाल उठ रहा है कि चंद्रशेखरन टाटा संस के बोर्ड में डायरेक्टर बने रहेंगे या उनके पद को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हो सकता है.
18 अगस्त को हुई टाटा संस की AGM कोरम पूरा न होने के कारण स्थगित करनी पड़ी. इस बैठक के एजेंडे में एन चंद्रशेखरन के डायरेक्टर पद को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव भी शामिल था.
Ratan Tata Trust की वजह से क्यों टली AGM?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सर रतन टाटा ट्रस्ट यानी SRTT महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की ओर से लगाई गई रोक के कारण बैठक नहीं कर सका. इसी वजह से ट्रस्ट अपना प्रतिनिधि नियुक्त नहीं कर पाया. प्रतिनिधि नहीं होने से AGM में जरूरी कोरम पूरा नहीं हो सका. नतीजतन बैठक में किसी भी एजेंडे पर चर्चा या फैसला नहीं हो पाया और इसे स्थगित करना पड़ा. यहीं से एन चंद्रशेखरन के डायरेक्टर पद को लेकर कानूनी सवाल खड़ा हो गया.
आखिर कानूनी पेच क्या है?
ऐसे में जरूरी सवाल यह है कि क्या चंद्रशेखरन तब तक डायरेक्टर बने रहेंगे, जब तक एक लीगल AGM नहीं हो जाती. दूसरी तरफ सवाल यह भी है कि वह ऐसे डायरेक्टर हैं, जिन्हें रोटेशन के आधार पर रिटायर होना था. AGM में उनके दोबारा डायरेक्टर बनने का प्रस्ताव रखा जाना था, लेकिन बैठक में इस प्रस्ताव पर कोई फैसला ही नहीं हो सका. यही वजह है कि कानूनी जानकारों की राय इस मामले में अलग-अलग है.
एक राय यह है कि AGM में प्रस्ताव पर फैसला नहीं हो पाने के बावजूद चंद्रशेखरन का डायरेक्टर पद तब तक जारी रह सकता है, जब तक दोबारा लीगल तरीके से AGM नहीं होती. वहीं, दूसरी राय यह है कि रोटेशन के आधार पर रिटायर होने वाले डायरेक्टर के मामले में समय पर AGM न होने से कानूनी जोखिम पैदा हो सकता है.
कानूनी जानकारों की राय क्यों बंटी हुई है?
कॉरपोरेट कानून के तहत ऐसी स्थिति को लेकर पूरी तरह स्पष्ट स्थिति नहीं है. कुछ अदालतों के फैसलों में यह माना गया है कि डायरेक्टर कंपनी की बैठक बुलाने में नाकामी का फायदा नहीं उठा सकते. वहीं, दूसरी कानूनी सोच कंपनी के कामकाज को लगातार चलाए रखने और मैनेजमेंट में स्थिरता बनाए रखने को प्राथमिकता देती है.
इसी वजह से चंद्रशेखरन के डायरेक्टर पद को लेकर कानूनी ग्रे एरिया यानी अस्पष्ट स्थिति बनी हुई है.
कुछ जानकारों मान रहे हैं कि पद अभी खत्म नहीं हुआ
कुछ कानूनी जानकारों का कहना है कि AGM का टलना अपने आप में डायरेक्टर का पद खाली होने जैसा नहीं है. उनके मुताबिक, चंद्रशेखरन का डायरेक्टर पद इसलिए खत्म नहीं माना जा सकता, क्योंकि उनके दोबारा नियुक्ति से जुड़े प्रस्ताव पर वैध AGM में विचार ही नहीं हुआ.
इस तर्क के अनुसार, जब तक स्थगित AGM दोबारा वैध तरीके से नहीं होती और अधूरा कामकाज पूरा नहीं होता, तब तक उनका डायरेक्टर पद जारी रह सकता है.
हालांकि, अगर SRTT पर लगी रोक लंबे समय तक जारी रहती है तो टाटा संस को Registrar of Companies से समय बढ़ाने की अनुमति लेनी पड़ सकती है. कंपनी National Company Law Tribunal यानी NCLT से भी निर्देश मांग सकती है.
चेयरमैन बने रहने के लिए डायरेक्टर होना जरूरी
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि कंपनी के चेयरमैन का बोर्ड का डायरेक्टर होना जरूरी है. अगर चंद्रशेखरन के डायरेक्टर पद को लेकर कोई कानूनी विवाद पैदा होता है, तो इसका असर कंपनी के चेयरमैन पद पर भी पड़ सकता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, चंद्रशेखरन पहले ही फैसला कर चुके हैं कि वह 20 फरवरी 2027 के बाद टाटा संस के चेयरमैन पद के लिए नया कार्यकाल नहीं लेंगे. ऐसे में नेतृत्व में बदलाव की प्रक्रिया के बीच उनके डायरेक्टर पद को लेकर पैदा हुई यह नई कानूनी उलझन अहम हो गई है.
आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि टाटा संस की लीगल AGM कब होगी और उसमें चंद्रशेखरन के डायरेक्टर पद से जुड़े प्रस्ताव पर क्या फैसला लिया जाएगा. जब तक SRTT बैठक में हिस्सा लेने की स्थिति में नहीं आता और AGM दोबारा नहीं होती, तब तक एन चंद्रशेखरन के डायरेक्टर पद को लेकर कानूनी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो पाएगी.
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