ATM सर्विस पर संकट, दिल्ली-UP समेत 4 राज्यों में कई जगहों पर कैश भरने का काम ठप! फीस पर फंसा पेच
दिल्ली, कर्नाटक, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में ATM कैश सर्विस प्रभावित हुई है. बढ़ती मजदूरी और ईंधन की लागत के कारण कैश लॉजिस्टिक्स कंपनियों ने ATM में कैश भरने की सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दीं. इंडस्ट्री का नुकसान 100 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है. कंपनियां अब बैंकों से सर्विस फीस बढ़ाने की मांग कर रही हैं.

ATM Service Affected: देश के चार राज्यों में ATM से जुड़ी कैश सर्विस प्रभावित हुई है. बढ़ती मजदूरी और ईंधन की लागत के चलते कैश मैनेजमेंट और लॉजिस्टिक्स कंपनियों ने दिल्ली, कर्नाटक, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में ATM में कैश भरने और इससे जुड़ी दूसरी सेवाओं को अस्थायी रूप से रोक दिया है. दरअसल, बढ़ती लागत के कारण मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों पर काम करना कंपनियों के लिए आर्थिक रूप से मुश्किल हो गया है.
ATM में कैश की उपलब्धता पर पड़ा असर
The Economic Times की रिपोर्ट के मुताबिक, एक दिन तक ATM में कैश भरने का काम प्रभावित रहने से चारों राज्यों में कई जगहों पर ATM सेवाओं पर असर पड़ा है. नियमित रूप से कैश नहीं भरे जाने के कारण कुछ ATM में लोगों को पैसे निकालने में परेशानी का सामना भी करना पड़ा है.
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जल्द ही सेवाएं फिर शुरू होने की उम्मीद है. कई प्राइवेट बैंकों ने कॉन्ट्रैक्ट और सर्विस फीस में बदलाव को लेकर बातचीत पर सहमति जताई है. वहीं, बाकी बैंकों के साथ भी इस मुद्दे पर बातचीत जारी है.
सरकारी बैंकों को लेकर बढ़ी चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी बैंक अब तक इस बातचीत से दूर हैं. इससे सरकारी बैंकों के ATM की सेवाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है. खासतौर पर टियर-2 और टियर-3 शहरों में इसका ज्यादा असर पड़ सकता है, क्योंकि इन इलाकों में सरकारी बैंकों के ATM का बड़ा नेटवर्क है.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कुछ प्राइवेट बैंकों ने ज्यादा पेमेंट की जरूरत को स्वीकार किया है, जबकि कई बैंक नई कमर्शियल शर्तों पर बातचीत कर रहे हैं. हालांकि, किसी भी सरकारी बैंक ने अब तक कीमतों पर दोबारा चर्चा के लिए सहमति नहीं दी है.
एक साल में 40-50 फीसदी बढ़ी मजदूरी की लागत
ATM और कैश मैनेजमेंट इंडस्ट्री बढ़ती लागत के दबाव से जूझ रही है. राज्यों में न्यूनतम मजदूरी में बदलाव के बाद कर्मचारियों पर होने वाला खर्च तेजी से बढ़ा है. पिछले एक साल में मजदूरी की लागत 40 से 50 फीसदी तक बढ़ गई है. वहीं, ईंधन की बढ़ती कीमतों ने कंपनियों के पहले से कम मार्जिन पर और दबाव बढ़ा दिया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, इससे इंडस्ट्री का कुल नुकसान 100 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है. अब कैश लॉजिस्टिक्स कंपनियां बैंकों से इस नुकसान की भरपाई की मांग कर रही हैं.
पुराने कॉन्ट्रैक्ट बने कंपनियों के लिए मुश्किल
कैश लॉजिस्टिक्स कंपनियां पिछले कई महीनों से सर्विस फीस में बदलाव की मांग कर रही हैं. कंपनियों का कहना है कि कई कॉन्ट्रैक्ट वर्षों पहले तय किए गए थे और मौजूदा ऑपरेटिंग लागत के हिसाब से उनकी कीमतें अब सही नहीं हैं. बैंकों के साथ सर्विस फीस में बढ़ोतरी को लेकर बातचीत चल रही है. फीस में कितना बदलाव होगा, यह अलग-अलग बैंकों और उनके कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों पर निर्भर करेगा.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यह मामला कैश की मांग या ATM के इस्तेमाल से जुड़ा नहीं है. असली समस्या ATM नेटवर्क को चलाने की लागत है. मौजूदा प्राइसिंग मॉडल वर्तमान ऑपरेटिंग खर्च के मुताबिक नहीं हैं. ऐसे में कॉन्ट्रैक्ट में बदलाव नहीं होने पर कैश लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए लंबे समय तक सेवाएं जारी रखना मुश्किल हो सकता है.
RBI और SBI को पहले ही दी थी चेतावनी
ATM और कैश लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री ने पिछले महीने RBI और SBI को ATM इकोसिस्टम पर बढ़ते आर्थिक दबाव को लेकर चेतावनी दी थी. इंडस्ट्री का कहना था कि बढ़ती ऑपरेटिंग लागत, कैश की उपलब्धता में दिक्कत और घटते ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के चलते कई ATM पोर्टफोलियो आर्थिक रूप से घाटे का सौदा बनते जा रहे हैं.
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