होर्मुज नहीं, ये है दुनिया का सबसे खतरनाक समुद्री रास्ता, 3 महीने में हुए 387 हमले; अनाज की सप्लाई पर बढ़ा खतरा
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने ब्लैक सी को दुनिया का सबसे खतरनाक समुद्री रास्ता बना दिया है. इस साल यहां कम से कम 40 नाविकों की मौत हुई है, जबकि होर्मुज स्ट्रेट में 24 मौतों की पुष्टि हुई है. जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों के बीच समुद्री व्यापार, यूक्रेन के कृषि निर्यात और वैश्विक अनाज आपूर्ति पर भी असर पड़ रहा है.

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले आठ महीने से जारी युद्ध ने होर्मुज स्ट्रेट को दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्तों में शामिल कर दिया है. यहां जहाजों पर हो रहे हमलों से ग्लोबल तेल सप्लाई और समुद्री व्यापार पर खतरा बढ़ा है. अब तक इस रास्ते पर 24 नाविकों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. लेकिन क्या आपको पता है कि दुनिया में एक और समुद्री रास्ता है, जहां हालात इससे भी ज्यादा खतरनाक हैं?
यह रास्ता है ब्लैक सी (Black Sea) है, जहां इस साल 570 से ज्यादा जहाजों पर हमले हो चुके हैं और कम से कम 40 नाविकों की मौत हुई है यानी नाविकों की मौत के मामले में ब्लैक सी होर्मुज स्ट्रेट से भी आगे निकल गया है. रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने इस समुद्री रास्ते को न सिर्फ नाविकों के लिए जानलेवा बना दिया है, बल्कि वैश्विक व्यापार और अनाज की सप्लाई के लिए भी खतरा बढ़ा दिया है.
ब्लैक सी में बढ़े जहाजों पर हमले
बिजनेस टूडे कि रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लैक सी में जहाजों पर हमलों में तेजी आई है. समुद्री जोखिम का आकलन करने वाली कंपनी एम्ब्रे (Ambrey) के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई से सितंबर के बीच करीब 387 जहाजों पर हमले हुए. यह इससे पिछली तिमाही के मुकाबले पांच गुना से भी ज्यादा है. तीसरी तिमाही में हर दिन औसतन चार से ज्यादा हमले हुए.
ब्लैक सी रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध का अहम क्षेत्र बना हुआ है. यहां से यूक्रेन के बंदरगाहों तक पहुंचने वाले जहाजों को लगातार खतरे का सामना करना पड़ रहा है.
अक्टूबर में केमिकल टैंकरों को बनाया गया निशाना
अक्टूबर में ब्लैक सी के आसपास जहाजों पर हमलों की कई घटनाएं सामने आईं. 15 अक्टूबर को ड्रोन ने रोमानिया के तट के पास केमिकल टैंकर वाइन ट्रेडर (Wine Trader) को निशाना बनाया. उसी रात एक दूसरे केमिकल टैंकर यारा जे (Yara J) पर सुलिना नहर के प्रवेश द्वार के पास हमला हुआ.
इस घटना में एक नाविक की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लापता हो गए. इन घटनाओं ने ब्लैक सी से गुजरने वाले जहाजों और उन पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है.
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच जहाजों पर बढ़ा खतरा
ब्लैक सी में जहाजों पर हमलों के पीछे रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष एक अहम वजह है. यूक्रेन का कहना है कि उसने 11 हफ्तों के दौरान 300 से ज्यादा रूसी जहाजों को निशाना बनाया है. दूसरी ओर, एम्ब्रे के मुताबिक, इससे पहले के 45 दिनों में समुद्री जहाजों पर हुए हमलों में करीब 90 फीसदी हमले उन जहाजों पर हुए, जो यूक्रेन के बंदरगाहों पर जा रहे थे.
इसका असर समुद्री कारोबार पर भी पड़ रहा है. आंकड़ों के मुताबिक, पिछले महीने ओडेसा के बड़े बंदरगाहों पर 10 से भी कम जहाज पहुंचे. इसके मुकाबले जुलाई में यहां करीब 400 जहाज आए थे. जहाजों की आवाजाही में आई इस गिरावट से यूक्रेन के समुद्री व्यापार पर दबाव बढ़ा है.
यूक्रेन के अनाज निर्यात पर भी पड़ा असर
ब्लैक सी वैश्विक अनाज सप्लाई के लिहाज से बेहद अहम समुद्री रास्ता है. यूक्रेन के कृषि उत्पादों का निर्यात काफी हद तक इसी क्षेत्र से होने वाली जहाजों की आवाजाही पर निर्भर करता है. लेकिन युद्ध और हमलों के कारण इस कारोबार को नुकसान पहुंचा है.
आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में यूक्रेन का समुद्री रास्ते से कृषि उत्पादों का निर्यात घटकर 14 लाख टन रह गया. यह युद्ध से पहले के स्तर के मुकाबले करीब 75 फीसदी कम है. अगर जहाजों पर हमले और सुरक्षा संबंधी खतरे बढ़ते हैं, तो इसका असर यूक्रेन के निर्यात के साथ-साथ वैश्विक अनाज सप्लाई पर भी पड़ सकता है.
ब्लैक सी में जहाजों का बीमा भी हुआ महंगा
ब्लैक सी में बढ़ते जोखिम का असर जहाजों के बीमा खर्च पर भी पड़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस इलाके में युद्ध जोखिम बीमा की लागत जहाज के कुल मूल्य के 15 फीसदी तक पहुंच सकती है. यह खाड़ी क्षेत्र में लागू दर के मुकाबले करीब दोगुनी है.
बीमा की ऊंची लागत से समुद्री परिवहन कंपनियों का खर्च बढ़ता है. इसके अलावा, युद्ध प्रभावित क्षेत्र में काम करने वाले नाविकों को भी ज्यादा जोखिम उठाना पड़ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, कुछ सीरियाई नाविकों को युद्ध क्षेत्र में काम करने के लिए अतिरिक्त पेमेंट के साथ हर महीने केवल 800 डॉलर तक की पेशकश की गई है.
नाविकों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
ब्लैक सी में हमलों की बढ़ती संख्या ने समुद्री परिवहन से जुड़े संगठनों की चिंता बढ़ा दी है. लगातार हमलों से नाविकों की जान खतरे में है और जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है. इसका असर सिर्फ रूस और यूक्रेन के कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक व्यापार और अनाज की सप्लाई पर भी पड़ सकता है.
अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य पर दुनिया का ध्यान जरूर बना हुआ है, लेकिन ब्लैक सी के आंकड़े एक अलग तस्वीर दिखाते हैं. इस साल यहां जहाजों पर हुए सैकड़ों हमले और नाविकों की मौत बताती है कि रूस-यूक्रेन युद्ध ने इस समुद्री रास्ते को कितना जोखिम भरा बना दिया है.
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