शनिवार से शुरू होगा ब्रिक्स सम्मेलन, वैश्विक संकट के बीच फूड एंड एनर्जी सिक्योरिटी पर होगा पर मंथन

भारत की मेजबानी में शनिवार से दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन शुरू होगा. नई दिल्ली में होने वाली इस बैठक में फूड सिक्योरिटी, एनर्जी सुरक्षा, स्वास्थ्य और जरूरी सामान की सप्लाई चेन मजबूत करने पर चर्चा होगी. रूस यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट और अमेरिका की व्यापार नीतियों के बीच यह सम्मेलन अहम है.

शनिवार से दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन शुरू होगा. Image Credit:

भारत की मेजबानी में शनिवार से दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन शुरू होने जा रहा है. नई दिल्ली में होने वाली इस बैठक में दुनिया की 11 बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेता शामिल होंगे. सम्मेलन में फूड सिक्योरिटी, एनर्जी सिक्योरिटी, हेल्थ और जरूरी सामान की सप्लाई को मजबूत करने पर चर्चा होगी. रूस- यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट के बीच यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है. अमेरिका की व्यापार और टैरिफ नीतियां भी बैठक में चर्चा का हिस्सा रहेंगी. सम्मेलन के अंत में नई दिल्ली घोषणा पत्र जारी किया जाएगा.

फूड एंड एनर्जी सिक्योरिटी पर रहेगा जोर

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में फूड एंड एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करने पर खास ध्यान दिया जाएगा. रूस यूक्रेन युद्ध के कारण दुनिया के कई देशों में एनर्जी और फूड सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है. पश्चिम एशिया में जारी संकट और हॉर्मुज स्ट्रेट की स्थिति ने भी एनर्जी सप्लाई से जुड़ी चिंता बढ़ाई है. ऐसे में ब्रिक्स देश संकट के समय एक दूसरे का सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे. भारत की कोशिश है कि सदस्य देशों के बीच फूड और एनर्जी सेक्टर में सहयोग को और मजबूत किया जाए.

जरूरी सामान की सप्लाई चेन पर चर्चा

बैठक में जरूरी सामान की सप्लाई चेन को मजबूत बनाने पर भी बात होगी. भारत चाहता है कि वैश्विक संकट के दौरान जरूरी समान की सप्लाई प्रभावित न हो. इसके लिए फूड, एनर्जी, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा. व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के साथ देशों के बीच संपर्क व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी चर्चा होगी.

कई बड़े देशों के नेता होंगे शामिल

नई दिल्ली में होने वाले सम्मेलन में कई बड़े देशों के नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन बैठक में पहुंच सकते हैं. दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भी इसमें शामिल होंगे. हालांकि पश्चिम एशिया संकट को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मतभेद बने हुए हैं. ऐसे में सभी सदस्य देशों के बीच साझा बयान पर सहमति बनना भी अहम होगा.

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भारत की अध्यक्षता में चार प्रमुख लक्ष्य

भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली है. भारत की अध्यक्षता का मुख्य आधार लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता है. भारत ने इस दौरान हेल्थ, एग्रीकल्चर, फूड, एनर्जी और डिजास्ट रिस्क कम करने जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है. इस साल देश के 25 से ज्यादा शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें और उच्च स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं. इन कार्यक्रमों का मकसद ब्रिक्स देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करना है.