BRICS: भारत चीन के रिश्तों में होगी नई शुरुआत, शी जिनपिंग के दौरे से ट्रेड डेफिसिट और निवेश पर रहेगा फोकस

भारत और चीन के रिश्तों में आर्थिक सुधार की उम्मीद बढ़ रही है. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ब्रिक्स सम्मेलन के लिए नई दिल्ली आने की उम्मीद है. दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है. वित्त वर्ष 2025 26 में भारत ने चीन से 131.6 अरब डॉलर का आयात किया जबकि निर्यात केवल 19.5 अरब डॉलर रहा.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ब्रिक्स सम्मेलन के लिए नई दिल्ली आने की उम्मीद है.

Highlights

  • भारत चीन रिश्तों में नई शुरुआत की उम्मीद.
  • शी जिनपिंग के भारत दौरे से व्यापार और निवेश पर फोकस.
  • भारत और चीन के बीच 112 अरब डॉलर से ज्यादा का ट्रेड डेफिसिट.

भारत और चीन के रिश्तों में एक बार फिर आर्थिक सुधार की उम्मीद बन रही है. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इस हफ्ते नई दिल्ली आने की उम्मीद है. शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल हो सकते हैं. यह सात साल बाद उनका भारत दौरा होगा. दोनों देशों के बीच 2020 के सीमा विवाद के बाद रिश्तों में तनाव बढ़ा था. अब दोनों देश व्यापार निवेश और सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दों पर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि भारत के सामने चीन पर आर्थिक निर्भरता कम करने की चुनौती भी बनी हुई है.

व्यापार घाटा बना सबसे बड़ी चुनौती

भारत और चीन के बीच व्यापार में बड़ा असंतुलन बना हुआ है. वित्त वर्ष 2025 26 में भारत ने चीन से करीब 131.6 अरब डॉलर का सामान आयात किया. वहीं चीन को भारत का निर्यात केवल 19.5 अरब डॉलर रहा. इससे दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा 112 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया. जुलाई में चीन से भारत का आयात 34.4 फीसदी बढ़कर 14.67 अरब डॉलर हो गया. इसी दौरान भारत का निर्यात 64.6 फीसदी बढ़कर 2.20 अरब डॉलर रहा.

चीन पर जरूरी सामान के लिए निर्भरता

भारत के लिए चीन पर निर्भरता का मुद्दा केवल व्यापार तक सीमित नहीं है. कई जरूरी औद्योगिक सामान और कच्चे माल के लिए भारत चीन पर काफी निर्भर है. स्थायी मैग्नेट इसका बड़ा उदाहरण हैं जिनका इस्तेमाल ऑटो इलेक्ट्रॉनिक्स और क्लीन एनर्जी उपकरणों में होता है. वित्त वर्ष 2024 25 में एक श्रेणी के स्थायी मैग्नेट के लिए भारत की चीन पर निर्भरता 84.8 फीसदी थी. कुछ अन्य मैग्नेट उत्पादों में यह निर्भरता 90 फीसदी से भी ज्यादा थी.

खाद और दूसरे सामान में भी चीन अहम

फर्टिलाइजर के मामले में भी चीन भारत के लिए एक अहम सप्लायर बना हुआ है. वित्त वर्ष 2023 24 में चीन से मैन्युफैक्चर फर्टिलाइजर का आयात करीब 2.25 अरब डॉलर था. वित्त वर्ष 2024 25 में यह घटकर 867 मिलियन डॉलर रह गया था. हालांकि वित्त वर्ष 2025 26 में आयात फिर बढ़कर करीब 2.33 अरब डॉलर हो गया. इससे साफ है कि भारत सप्लाई के दूसरे विकल्प तलाश रहा है लेकिन चीन की भूमिका अभी भी काफी बड़ी है.

चीनी निवेश बढ़ाना होगा अगली बड़ी परीक्षा

भारत और चीन के रिश्तों में सुधार का असर निवेश के क्षेत्र में भी देखने को मिल सकता है. भारत ने 2020 में प्रेस नोट 3 के जरिए पड़ोसी देशों से आने वाले निवेश की जांच कड़ी कर दी थी. इसके तहत ऐसे निवेश के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी की गई थी. मार्च 2026 में सरकार ने इस व्यवस्था में कुछ बदलाव किए. कुछ निवेश के लिए 60 दिन की मंजूरी समय सीमा और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट कैपिटल गुड्स तथा सोलर सेल जैसे क्षेत्रों में निवेश को आसान बनाने के प्रावधान किए गए.

भारत में चीनी निवेश अभी काफी कम

भारत में चीनी निवेश दोनों देशों के बड़े व्यापार के मुकाबले काफी कम है. वित्त वर्ष 2015 में चीन से करीब 494 मिलियन डॉलर का इक्विटी निवेश आया था. वित्त वर्ष 2017 से 2020 के बीच यह औसतन करीब 255 मिलियन डॉलर सालाना रहा. प्रेस नोट 3 के बाद वित्त वर्ष 2022 से 2024 के बीच निवेश घटकर केवल 10 से 40 मिलियन डॉलर सालाना रह गया. पिछले दो साल में यह करीब 100 मिलियन डॉलर सालाना तक पहुंचा है. वित्त वर्ष 2026 तक भारत में चीन का कुल इक्विटी निवेश करीब 2.7 अरब डॉलर रहा.

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स्थानीय करेंसी से भुगतान पर भी नजर

भारत और चीन के बीच रिश्तों में सुधार के दौरान सीमा पार भुगतान का मुद्दा भी अहम हो सकता है. ब्रिक्स सम्मेलन में स्थानीय करेंसी के इस्तेमाल और भुगतान व्यवस्था पर चर्चा होने की उम्मीद है. ब्रिक्स पे को एक वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय भुगतान व्यवस्था के तौर पर पेश किया गया है. हालांकि अभी यह पूरे ब्रिक्स समूह के लिए एक समान और चालू नेटवर्क नहीं बना है. भारत के लिए फिलहाल आसान निवेश बेहतर सप्लाई और भारतीय सामान के लिए चीन में ज्यादा बाजार पहुंच सबसे अहम लक्ष्य हो सकते हैं.