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एक इंसान के पास कितने बैंक अकाउंट होने चाहिए? ज्यादा खाते पड़ सकते हैं भारी

एक से ज्यादा बैंक अकाउंट रखना आम बात है, लेकिन जरूरत से ज्यादा खाते परेशानी बढ़ा सकते हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक, ज्यादातर लोगों के लिए दो बैंक अकाउंट पर्याप्त हैं. जानिए कितने खाते रखने चाहिए और कई अकाउंट के क्या फायदे हैं.

बैंक अकाउंट

Highlights

  • ज्यादातर लोगों के लिए दो बैंक अकाउंट पर्याप्त माने जाते हैं
  • जरूरत से ज्यादा खाते संभालना मुश्किल हो सकता है
  • हर बैंक अकाउंट का स्पष्ट वित्तीय उद्देश्य होना चाहिए

आज के समय में ज्यादातर लोगों के पास एक से ज्यादा बैंक अकाउंट होते हैं. किसी खाते में सैलरी आती है, किसी से रोजमर्रा के खर्च किए जाते हैं तो किसी में बचत रखी जाती है. लेकिन सवाल यह है कि आखिर एक व्यक्ति के पास कितने बैंक अकाउंट होने चाहिए? विशेषज्ञों के मुताबिक, जरूरत से ज्यादा खाते रखना आपकी वित्तीय व्यवस्था को उलझा सकता है.

दो बैंक अकाउंट ज्यादातर लोगों के लिए पर्याप्त

अगर आपकी आमदनी और खर्च बहुत ज्यादा जटिल नहीं हैं तो दो बैंक अकाउंट काफी हो सकते हैं. पहला अकाउंट सैलरी, बिल और रोजमर्रा के खर्च के लिए रखा जा सकता है. वहीं दूसरे अकाउंट का इस्तेमाल सेविंग या किसी खास वित्तीय लक्ष्य के लिए किया जा सकता है.

इस तरह रोजाना खर्च होने वाला पैसा और बचत अलग रहती है. इससे गैर-जरूरी खर्च पर नियंत्रण रखने और यह समझने में भी आसानी होती है कि हर महीने कितना पैसा बचाया जा रहा है.

तीसरा अकाउंट कब काम आ सकता है?

हर व्यक्ति की जरूरत एक जैसी नहीं होती. अगर किसी व्यक्ति की आय के कई स्रोत हैं, परिवार की वित्तीय जिम्मेदारियां ज्यादा हैं या अलग-अलग लक्ष्यों के लिए पैसा रखना है, तो तीसरा बैंक अकाउंट उपयोगी हो सकता है.

इसके अलावा दूसरे शहर में रहने या किसी खास बैंक की सुविधा की जरूरत होने पर भी तीसरा अकाउंट रखा जा सकता है. लेकिन इससे ज्यादा खाते रखने पर सभी खातों को ट्रैक करना मुश्किल हो सकता है. न्यूनतम बैलेंस, KYC और बैंक चार्ज जैसी चीजों पर भी नजर रखनी पड़ती है.

कई बैंकों में खाते रखने का एक फायदा

एक से ज्यादा बैंकों में अकाउंट रखने से पैसे को एक ही बैंक में रखने का जोखिम कम किया जा सकता है. DICGC के नियमों के तहत किसी बैंक में एक जमाकर्ता के लिए मूलधन और ब्याज समेत पात्र जमा पर ₹5 लाख तक का बीमा कवर मिलता है. एक ही बैंक की अलग-अलग शाखाओं में रखी रकम को इस सीमा के लिए जोड़ा जाता है.

इसलिए अगर किसी व्यक्ति की बैंक जमा राशि ₹5 लाख से ज्यादा है तो अलग-अलग बैंकों में पात्र रकम रखने से प्रत्येक बैंक में अलग बीमा कवर मिल सकता है. हालांकि यह सुरक्षा बैंक के फेल होने के जोखिम के खिलाफ है, धोखाधड़ी या अनधिकृत ट्रांजैक्शन के खिलाफ नहीं.

ज्यादा अकाउंट खोलने से पहले इन बातों पर ध्यान दें

नया बैंक अकाउंट खोलने से पहले यह तय करें कि इसकी जरूरत क्यों है. इसके बाद मिनिमम बैलेंस की शर्त, चार्ज, ब्याज दर, ATM और ट्रांजैक्शन फीस, फंड ट्रांसफर की सुविधा और डिजिटल बैंकिंग फीचर्स जरूर जांचें.

अगर किसी पुराने खाते का अब कोई खास इस्तेमाल नहीं है तो उसे बंद या कंसोलिडेट करना बेहतर हो सकता है. बिना जरूरत कई अकाउंट रखने से चार्ज छूटने, KYC अपडेट और लेनदेन की निगरानी जैसी चीजें मुश्किल हो सकती हैं.

हर अकाउंट का होना चाहिए एक मकसद

बैंक अकाउंट की संख्या से ज्यादा जरूरी यह है कि हर खाते का स्पष्ट उद्देश्य हो. ज्यादातर लोगों के लिए एक मुख्य अकाउंट और एक सेविंग या बैकअप अकाउंट पर्याप्त हो सकता है. जरूरत के हिसाब से तीसरा अकाउंट रखा जा सकता है, लेकिन बिना उद्देश्य के कई खाते खोलना वित्तीय प्रबंधन को आसान बनाने के बजाय मुश्किल कर सकता है.

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