15 सितंबर एडवांस टैक्स की डेडलाइन, क्या सैलरीड लोगों को भी देना होगा टैक्स? जानें पूरा नियम
15 सितंबर 2026 एडवांस की दूसरी किस्त जमा करने की आखिरी तारीख है. सैलरी पाने वाले लोगों को हर बार एडवांस टैक्स नहीं लगता, लेकिन सैलरी के अलावा ब्याज, किराया, डिविडेंड, कैपिटल गेन या फ्रीलांस इनकम पर टैक्स देनदारी बढ़ सकती है. टीडीएस और टीसीएस के आधार पर अगर टैक्स 10,000 रुपये से ज्यादा बचता है तो एडवांस टैक्स जरूरी है.
Highlights
- 15 सितंबर 2026 एडवांस टैक्स की दूसरी किस्त जमा करने की आखिरी तारीख है.
- वेतन के अलावा ब्याज, किराया और कैपिटल गेन से इनकम होने पर 10,000 रुपये से ज्यादा टैक्स बचने पर एडवांस टैक्स देना पड़ सकता है.
- 15 सितंबर तक अनुमानित सालाना टैक्स देनदारी का 45 फीसदी जमा करना होता है.
15 सितंबर 2026 एडवांस टैक्स की दूसरी किस्त जमा करने की आखिरी तारीख है. हालांकि हर टैक्सपेयर के लिए एडवांस टैक्स देना जरूरी नहीं है. वेतन पाने वाले लोगों को भी कुछ स्थितियों में एडवांस टैक्स देना पड़ सकता है. अगर वेतन के अलावा इंटरेस्ट, रेंट, डिविडेंड, कैपिटल गेन और इंडिपेंडेंट काम से इनकम होती है तो टैक्स देनदारी की दोबारा कैलकुलेशन करनी चाहिए. TDS और TCS काटने के बाद अगर 10,000 रुपये से ज्यादा टैक्स बाकी रहता है तो एडवांस टैक्स देना जरूरी हो सकता है. समय पर टैक्स नहीं देने पर ब्याज भी देना पड़ सकता है.
किन लोगों को देना होता है एडवांस टैक्स
एडवांस टैक्स उन टैक्सपेयर के लिए जरूरी होता है जिनकी पूरे वित्त वर्ष की अनुमानित टैक्स देनदारी से TDS और TCS घटाने के बाद 10,000 रुपये से ज्यादा टैक्स बचता है. इसमें टैक्स को इनकम रिटर्न दाखिल करते समय एक साथ देने के बजाय वित्त वर्ष के दौरान अलग-अलग किस्तों में जमा किया जाता है. हालांकि ऐसे निवासी वरिष्ठ नागरिक, जिनकी कारोबार या पेशे से कोई इनकम नहीं होती है, उन्हें एडवांस टैक्स से छूट दी गई है. इसलिए हर टैक्सपेयर को अपनी इनकम और टैक्स देनदारी के हिसाब से एडवांस टैक्स की जरूरत देखनी चाहिए.
सैलरीड लोगों को कब देना पड़ सकता है टैक्स
अगर किसी सैलरीड व्यक्ति की इनकम केवल वेतन से है और नियोक्ता की ओर से पर्याप्त TDS काट लिया गया है तो आम तौर पर उसे एडवांस टैक्स देने की जरूरत नहीं होती. लेकिन वेतन के अलावा दूसरी इनकम होने पर स्थिति बदल सकती है. सावधि जमा और बचत खाते से मिलने वाला ब्याज, किराया, डिविडेंड, शेयर या म्यूचुअल फंड से होने वाला कैपिटल गेन और स्वतंत्र काम से होने वाली इनकम इसके उदाहरण हैं. अगर इन सभी इनकम को जोड़ने के बाद TDS और TCS घटाने पर 10,000 रुपये से ज्यादा टैक्स बाकी रहता है तो एडवांस टैक्स देना पड़ सकता है.
15 सितंबर तक कितना एडवांस टैक्स देना होगा
एडवांस टैक्स पूरे वित्त वर्ष में अलग- अलग किस्तों में जमा किया जाता है. 15 सितंबर तक टैक्सपेयर को अपनी पूरे साल की अनुमानित टैक्स देनदारी का कुल 45 फीसदी एडवांस टैक्स के रूप में जमा करना होता है. इसमें जून में जमा की गई एडवांस टैक्स की पहली किस्त भी शामिल होती है. उदाहरण के लिए अगर पूरे साल की TDS और TCS घटाने के बाद टैक्स देनदारी 1 लाख रुपये है तो 15 सितंबर तक कुल 45,000 रुपये एडवांस टैक्स जमा होना चाहिए. जून में जमा की गई रकम को इसमें एडजस्ट किया जाएगा.
एडवांस टैक्स की कैलकुलेशन कैसे करें
एडवांस टैक्स की कैलकुलेशन के लिए सबसे पहले पूरे वित्त वर्ष की अनुमानित आय का हिसाब लगाना चाहिए. इसमें वेतन के साथ ब्याज, किराया, डिविडेंड, कैपिटल गेन और स्वतंत्र काम से होने वाली इनकम जैसी दूसरी इनकम भी शामिल करनी होगी. इसके बाद लागू टैक्स व्यवस्था के अनुसार टैक्स की गणना करनी होगी और 4 फीसदी हेल्थ और एजुकेशन सेस भी जोड़ना होगा. इसके बाद पहले से काटे गए TDS और TCS तथा जून में जमा किए गए एडवांस टैक्स को घटाना होगा. इसके बाद देखना होगा कि 15 सितंबर तक कुल एडवांस टैक्स 45 फीसदी तक पहुंच रहा है या नहीं.
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15 सितंबर की डेडलाइन चूकने पर क्या होगा
अगर टैक्सपेयर 15 सितंबर तक जरूरी एडवांस टैक्स जमा नहीं करता है या तय रकम से कम जमा करता है तो ब्याज देना पड़ सकता है. आयकर अधिनियम 2025 की धारा 425 के तहत एडवांस टैक्स में कमी पर 1 प्रतिशत प्रति माह की दर से ब्याज लगाया जा सकता है. सितंबर की किस्त के मामले में ब्याज की अवधि 3 महीने हो सकती है. इसके अलावा अगर पूरे साल में जमा एडवांस टैक्स अंतिम टैक्स देनदारी के 90 फीसदी से कम रहता है तो धारा 424 के तहत भी ब्याज लग सकता है. इसलिए 15 सितंबर से पहले इनकम और TDS का हिसाब करना जरूरी है.
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