नौकरी चली गई तो कार लोन की EMI कैसे भरें? डिफॉल्ट से पहले करें ये 5 काम, वरना खराब हो सकता है क्रेडिट स्कोर
नौकरी जाने के बाद कार लोन की ईएमआई भरना मुश्किल हो सकता है, लेकिन पहली ईएमआई मिस होने का इंतजार नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में पहले अपनी बचत देखें, लोन प्रोटेक्शन या क्रेडिट इंश्योरेंस की जांच करें और बैंक या एनबीएफसी से तुरंत संपर्क करें. 3 से 6 महीने की ईएमआई का इंतजाम मददगार हो सकता है.
Highlights
- नौकरी जाने के तुरंत बाद लोनदाता से संपर्क करें.
- इमरजेंसी फंड से कुछ समय तक ईएमआई चुकाई जा सकती है.
- अगर कार लोन के साथ लोन प्रोटेक्शन या क्रेडिट इंश्योरेंस लिया है, तो जांच करें कि नौकरी जाने या आमदनी रुकने पर ईएमआई में मदद मिलती है या नहीं.
नौकरी जाने के बाद आमदनी अचानक रुक जाती है, लेकिन घर के जरूरी खर्च और लोन की EMI पहले की तरह जारी रहती है. ऐसे में अगर आपके ऊपर कार लोन चल रहा है और EMI भरना मुश्किल हो रहा है, तो सबसे बड़ी गलती यह होगी कि आप पहली EMI मिस होने का इंतजार करें. समय रहते अपनी बचत, इंश्योरेंस और लोन देने वाले बैंक या एनबीएफसी से बात करके स्थिति संभाली जा सकती है.
नौकरी गई तो सबसे पहले क्या करें?
नौकरी जाने का मतलब यह नहीं है कि कार लोन की EMI तुरंत डिफॉल्ट हो जाएगी. सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि आपके पास कितनी बचत है और उससे घर के जरूरी खर्च और EMI कितने समय तक चल सकती है.
मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसी स्थिति में पहली EMI मिस होने से पहले ही लोन देने वाले बैंक या एनबीएफसी से संपर्क करना चाहिए. समय रहते बात करने पर लोन की शर्तों में बदलाव, रीपेमेंट की अवधि बढ़ाने या कुछ समय के लिए राहत जैसे विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं. इसके लिए टर्मिनेशन लेटर, बैंक स्टेटमेंट या आमदनी रुकने से जुड़े दूसरे दस्तावेज मांगे जा सकते हैं.
EMI न भरने से क्या नुकसान हो सकता है?
अगर आप बिना बैंक को बताए EMI मिस करते हैं, तो इसका असर आपके क्रेडिट प्रोफाइल और क्रेडिट स्कोर पर पड़ सकता है. इससे भविष्य में नया लोन या क्रेडिट लेना मुश्किल हो सकता है और ब्याज दर भी अधिक हो सकती है.
इसलिए आर्थिक परेशानी शुरू होते ही लोनदाता से संपर्क करना बेहतर है. बैंक या एनबीएफसी की नीति के आधार पर रीपेमेंट रिस्ट्रक्चरिंग, लोन की अवधि बढ़ाने या सीमित अवधि के लिए मोरेटोरियम जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है.
अपनी बचत से EMI भरें, लेकिन पूरी रकम खत्म न करें
मुश्किल समय में इमरजेंसी फंड सबसे बड़ा सहारा बन सकता है. अगर कुछ समय के लिए नौकरी नहीं है, तो बचत के एक हिस्से से EMI जारी रखी जा सकती है. लेकिन सिर्फ EMI भरने के लिए अपनी पूरी लिक्विड सेविंग खत्म करना समझदारी नहीं होगी.
रिपोर्ट के मुताबिक, कोशिश होनी चाहिए कि करीब 3 से 6 महीने की EMI के बराबर रकम उपलब्ध रहे. साथ ही घर के जरूरी खर्च और दूसरी आकस्मिक जरूरतों के लिए भी पर्याप्त पैसा बचा होना चाहिए.
Loan Protection या Credit Insurance है तो जरूर चेक करें
अगर आपने कार लोन लेते समय लोन प्रोटेक्शन या क्रेडिट इंश्योरेंस लिया है, तो उसकी शर्तें जरूर देखें. कुछ पॉलिसी नौकरी जाने या आमदनी रुकने जैसी स्थिति में सीमित अवधि के लिए EMI भुगतान में मदद कर सकती हैं. हालांकि, यह सुविधा आपकी पॉलिसी की शर्तों पर निर्भर करेगी. इसलिए यह मानकर न चलें कि हर क्रेडिट इंश्योरेंस नौकरी जाने पर EMI का पेमेंट करेगा.
Car Loan की ब्याज दर कितनी है?
कार लोन एक सिक्योर्ड लोन होता है, जिसमें आम तौर पर खरीदी गई कार लोन के लिए सिक्योरिटी का काम करती है. रिपोर्ट में दिए Paisabazaar के आंकड़ों के मुताबिक, प्रमुख बैंकों और एनबीएफसी में कार लोन की ब्याज दरें 7.35% से 14.05% सालाना तक हैं.
वहीं, 5 लाख रुपये के 5 साल के कार लोन पर EMI करीब 9983 से 11647 रुपये के बीच हो सकती है. वास्तविक ब्याज दर और EMI लोनदाता, लोन की अवधि, लोन राशि और कर्ज लेने वाले व्यक्ति की प्रोफाइल पर निर्भर करेगी.
नौकरी जाने पर कार लोन संभालने का सही तरीका
ऐसी स्थिति में सबसे पहले अपनी बचत और जरूरी खर्च का आकलन करें. इसके बाद लोन की EMI को प्राथमिकता देते हुए बैंक या एनबीएफसी से तुरंत संपर्क करें. साथ ही लोन प्रोटेक्शन या क्रेडिट इंश्योरेंस की सुविधा उपलब्ध है या नहीं, यह भी जांचें.
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सबसे जरूरी बात यह है कि पहली EMI मिस होने के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले कदम उठाएं. समय पर बैंक से बातचीत करने और अपनी वित्तीय स्थिति के दस्तावेज देने से डिफॉल्ट से बचने के विकल्प मिल सकते हैं. इससे आपकी मौजूदा वित्तीय स्थिति संभालने के साथ क्रेडिट स्कोर और भविष्य में कर्ज लेने की क्षमता को भी सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है.
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