
Car Market Crisis: कारों की बिक्री पर फिर खतरा, CAFE III ही नहीं, ये फैक्टर भी पड़ेगा भारी!
भारतीय ऑटो सेक्टर एक बार फिर दबाव में नजर आ रहा है, जहां CAFE III (Corporate Average Fuel Efficiency) नियमों के चलते कार कंपनियों के लिए लागत बढ़ने की आशंका है. ये नियम कंपनियों को ज्यादा फ्यूल एफिशिएंट और कम उत्सर्जन वाले वाहन बनाने के लिए मजबूर करेंगे, जिससे प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ सकती है और इसका असर सीधे कारों की कीमतों पर पड़ेगा. इसके अलावा कच्चे माल की बढ़ती कीमतें, ब्याज दरों में ऊंचाई और ग्राहकों की घटती मांग भी बिक्री पर असर डाल रही है. इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की ओर बढ़ता रुझान भी पारंपरिक पेट्रोल-डीजल कारों की बिक्री को प्रभावित कर रहा है.
Society of Indian Automobile Manufacturers (SIAM) के अनुसार, आने वाले समय में कंपनियों को लागत और मांग के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती होगी. अगर कीमतें ज्यादा बढ़ती हैं, तो ग्राहकों की खरीद क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे कार बाजार की ग्रोथ धीमी पड़ सकती है. ऐसे में कंपनियों को नई टेक्नोलॉजी और किफायती मॉडल पर फोकस करना होगा.