Crude Oil Price: कच्चे तेल में फिर तेजी, Brent 115 डॉलर के पार, क्या और महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?
कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को फिर तेजी आई और Brent Crude 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी पर मिसाइल हमले का दावा किया है. हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने तत्काल इसकी पुष्टि नहीं की. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, अमेरिका के तेल भंडार के अनुमान, OPEC+ की उत्पादन नीति और रूस से तेल शिपमेंट घटने की आशंका से बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है.

कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को एक बार फिर तेजी देखने को मिली. ब्रेंट क्रूड की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जबकि अमेरिकी क्रूड WTI भी 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार करने लगा. कीमतों में इस तेजी की वजह पश्चिम एशिया में तेल सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता है. यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी पर मिसाइल हमला करने का दावा किया है. हालांकि, सऊदी अरब की ओर से तत्काल इस हमले की पुष्टि नहीं की गई. इससे क्षेत्र में जारी संघर्ष के बीच तेल सप्लाई रुकने होने की आशंका फिर बढ़ गई है.
ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर के पार, WTI में भी तेजी
बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.22 डॉलर यानी 1.07 फीसदी बढ़कर 115.10 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई. वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड 0.96 डॉलर या 0.96 फीसदी की तेजी के साथ 100.90 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था.
इससे पहले मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट आई थी. मध्य पूर्व में बातचीत से सप्लाई में रुकावट की आशंका कुछ कम हुई थी. लेकिन सऊदी अरब की रिफाइनरी पर हमले के दावे ने बाजार में फिर से चिंता बढ़ा दी और कीमतों को सहारा मिला.
सऊदी अरब की रिफाइनरी पर हमले का दावा
हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब की एक बड़ी तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया. इस रिफाइनरी की तेल प्रोसेसिंग क्षमता 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन बताई गई है. सऊदी अरब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उत्पादक है. ऐसे में उसकी तेल सुविधाओं पर किसी भी संभावित हमले से सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है.
हालांकि, हमले की स्वतंत्र पुष्टि और उससे हुए नुकसान की जानकारी तत्काल सामने नहीं आई थी. इसलिए बाजार की चिंता फिलहाल हमले के दावे और क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने की आशंका से जुड़ी है.
OPEC+ प्रोडक्शन टारगेट में बदलाव की उम्मीद कम
तेल उत्पादक देशों के समूह OPEC+ की रविवार को होने वाली बैठक में दिसंबर के लिए उत्पादन लक्ष्य में बदलाव नहीं होने की उम्मीद है. मामले की जानकारी रखने वाले तीन लोगों ने रॉयटर्स को बताया कि समूह मौजूदा उत्पादन लक्ष्य बनाए रख सकता है.
हालांकि, समूह के सात प्रमुख सदस्यों सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, अल्जीरिया, कजाखस्तान और ओमान में से अधिकतर का वास्तविक उत्पादन पहले से ही उनके निर्धारित लक्ष्य से कम है. ऐसे में केवल उत्पादन लक्ष्य बनाए रखने से बाजार में वास्तविक सप्लाई कितनी रहेगी, यह भी महत्वपूर्ण होगा.
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रूस से तेल सप्लाई घटने की आशंका
रूस के बाल्टिक सागर और काला सागर स्थित बंदरगाहों से अगले महीने कच्चे तेल की शिपमेंट घट सकती है. कारोबारियों के मुताबिक, रूस की घरेलू रिफाइनरियां अमेरिका के साथ इस महीने हुए समझौते के बाद डीजल उत्पादन बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं. इससे कच्चे तेल के निर्यात पर असर पड़ने की आशंका है.
कुल मिलाकर, मध्य पूर्व में जारी संघर्ष, सऊदी अरब की रिफाइनरी पर हमले का दावा, OPEC+ की उत्पादन नीति और रूस से सप्लाई की संभावित कमी कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं. तेल बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है. हालांकि, मौजूदा तेजी के बावजूद कीमतें संकट के दौरान दर्ज 126 डॉलर प्रति बैरल के शिखर से नीचे हैं.