व्हिस्की के लेबल पर ऐसा क्या लिख दिया, FSSAI ने पकड़ा झोल?

Diageo की व्हिस्की के लेबल पर “American oak casks” में mature होने के दावे को FSSAI ने भ्रामक बताया है. नियामक ने कंपनी को चेतावनी दी है कि पैकेजिंग पर दी गई जानकारी ग्राहकों को उत्पाद की वास्तविक प्रक्रिया को लेकर भ्रमित नहीं करे.

Diageo की व्हिस्की Image Credit:

भारत में शराब बनाने वाली कंपनी Diageo को अपनी एक व्हिस्की के लेबल पर किए गए दावे को लेकर सवालों का सामना करना पड़ा है. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कंपनी को चेतावनी दी कि व्हिस्की के लेबल पर यह कहना कि इसे “American oak casks” यानी अमेरिकी ओक की लकड़ी से बने बैरल में पकाया गया है, ग्राहकों को गुमराह कर सकता है.

लेबल पर लिखे दावे को लेकर उठे सवाल

Diageo की ओर से अपनी व्हिस्की के बारे में पैकेजिंग पर बताया गया था कि इसे American oak casks में matured किया गया है. आमतौर पर इस तरह की जानकारी से ग्राहक यह समझ सकता है कि व्हिस्की को अमेरिकी ओक के बैरल में लंबे समय तक रखा गया है, जिससे उसके स्वाद और गुणवत्ता पर असर पड़ा है.

हालांकि, नियामक की जांच में इस दावे को लेकर सवाल उठाए गए. FSSAI का मानना था कि लेबल पर इस्तेमाल की गई भाषा से उत्पाद की वास्तविक प्रक्रिया को लेकर उपभोक्ताओं के बीच गलत धारणा बन सकती है.

FSSAI ने कंपनी को दी चेतावनी

मामले से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, FSSAI ने Diageo को इस तरह के दावों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी. नियामक का फोकस इस बात पर है कि खाद्य और पेय उत्पादों की पैकेजिंग पर दी गई जानकारी साफ और सही होनी चाहिए.

खासकर शराब जैसे उत्पादों में लेबल पर लिखी जानकारी ग्राहकों के लिए काफी अहम होती है. अगर किसी दावे से उत्पाद की गुणवत्ता, बनाने की प्रक्रिया या उसकी खासियत को लेकर अलग अर्थ निकलता है, तो नियामक उस पर आपत्ति जता सकता है.

कंपनी के लिए क्यों अहम है यह मामला?

Diageo दुनिया की बड़ी शराब कंपनियों में शामिल है और भारत में भी इसका कारोबार काफी बड़ा है. कंपनी के पोर्टफोलियो में कई लोकप्रिय व्हिस्की और दूसरे शराब ब्रांड शामिल हैं. ऐसे में लेबलिंग से जुड़ा कोई भी विवाद कंपनी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है.

व्हिस्की की कीमत और प्रीमियम इमेज तय करने में उसकी ageing और maturation process की जानकारी अहम भूमिका निभाती है. ग्राहक अक्सर यह जानना चाहते हैं कि उनकी खरीदी गई व्हिस्की किस तरह के बैरल में रखी गई और उसे कितने समय तक mature किया गया.

ग्राहकों के लिए क्या मतलब?

इस मामले का सीधा असर यह है कि शराब खरीदते समय ग्राहकों को लेबल पर लिखे दावों को ध्यान से पढ़ना चाहिए. किसी खास लकड़ी के बैरल, ageing process या production method का दावा अपने आप में उत्पाद की बेहतर गुणवत्ता की गारंटी नहीं होता.

FSSAI की कार्रवाई का मकसद भी यही है कि कंपनियां पैकेजिंग पर ऐसे दावे न करें, जिनसे उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक प्रकृति या निर्माण प्रक्रिया के बारे में गलत जानकारी मिले. Diageo के मामले में अब निगाह इस बात पर है कि कंपनी इस आपत्ति के बाद अपने लेबल या मार्केटिंग दावों में कोई बदलाव करती है या नहीं.

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