पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल के दाम ने मचाया हाहाकार, ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल
पाकिस्तान में महंगे पेट्रोल-डीजल, नई पेट्रोलियम लेवी और बढ़ती महंगाई के खिलाफ ट्रांसपोर्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है. इससे सामान और ईंधन की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा है. IMF को लेकर भी सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है.
Highlights
- पाकिस्तान में महंगे ईंधन से बढ़ा जनता का गुस्सा
- ट्रांसपोर्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी
- IMF को लेकर सरकार पर बढ़ा दबाव
पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. ईंधन की महंगाई, नई पेट्रोलियम लेवी और लगातार बढ़ती महंगाई के खिलाफ विरोध तेज हो गया है. अब देशभर के माल ढुलाई करने वाले ट्रांसपोर्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है.
शनिवार से शुरू हुई इस हड़ताल का असर पूरे देश में सामान की आवाजाही पर पड़ सकता है. ट्रक, ट्रेलर और ऑयल टैंकर चलाने वाली कंपनियां भी इसमें शामिल हैं. सरकार के साथ बातचीत में उनकी मांगों का समाधान नहीं निकलने के बाद उन्होंने हड़ताल का रास्ता अपनाया है. इससे एक दिन पहले जमात-ए-इस्लामी ने भी पेट्रोलियम लेवी और बढ़ती महंगाई के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन किए थे. इससे प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार पर दबाव और बढ़ गया है.
ट्रांसपोर्टरों ने क्यों शुरू की हड़ताल?
पाकिस्तान के ट्रांसपोर्ट सेक्टर का कहना है कि डीजल की बढ़ती कीमतों और दूसरे खर्चों के कारण कमर्शियल वाहन चलाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है. ट्रांसपोर्टरों की प्रमुख मांगों में डीजल की कीमत कम करना, मोटरवे टोल घटाना और विदहोल्डिंग टैक्स में राहत देना शामिल है. वे पूरे देश में एक्सल-लोड नियमों को एक जैसा लागू करने और 10-व्हील वाहनों को 35 टन तक सामान ले जाने की अनुमति देने की भी मांग कर रहे हैं. इसके अलावा कस्टम नियमों में बदलाव, हाईवे पर लगने वाले जुर्माने कम करने और पंजाब हाईवे पेट्रोल को कमर्शियल वाहनों के चालान काटने का अधिकार हटाने की मांग भी की जा रही है. भारी वाहन चलाने के लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को आसान बनाने की मांग भी ट्रांसपोर्टरों ने रखी है.
शुक्रवार को कम्युनिकेशंस मंत्री अलीम खान के साथ हुई बातचीत में कोई समझौता नहीं हो सका. सरकार ने सोमवार को दोबारा बातचीत की पेशकश की है, लेकिन ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि उनकी हड़ताल फिलहाल अनिश्चितकाल के लिए जारी रहेगी.
पाकिस्तान में ईंधन इतना महंगा क्यों हुआ?
पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सबसे ज्यादा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का पड़ा है. होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव और सप्लाई में रुकावट की वजह से वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ी है. मार्च से पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बार-बार बदलाव किया जा रहा है. अप्रैल में पेट्रोल की कीमत रिकॉर्ड 459 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थी, जबकि डीजल 520.35 रुपये प्रति लीटर तक चला गया था.
डीजल की कीमत बढ़ना पाकिस्तान के लिए खास तौर पर बड़ी समस्या है, क्योंकि देश के बड़े हिस्से का सड़क परिवहन डीजल पर निर्भर है. डीजल महंगा होने से सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का खर्च भी बढ़ जाता है.
क्या है पेट्रोलियम लेवी?
पेट्रोलियम लेवी सरकार की ओर से ईंधन पर लगाया जाने वाला एक तरह का टैक्स है. पेट्रोल और दूसरे पेट्रोलियम उत्पादों पर इसे वसूला जाता है और इससे सरकार को राजस्व मिलता है. लेकिन पाकिस्तान में यह लेवी अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है, क्योंकि पहले से महंगे पेट्रोल-डीजल के ऊपर यह अतिरिक्त बोझ डालती है.
जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख हाफिज नईमुर रहमान ने सरकार से पेट्रोलियम लेवी वापस लेने की मांग की है. उनका कहना है कि सरकार की आर्थिक नीतियों का बोझ आम लोगों पर डाला जा रहा है.
हड़ताल का आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
अगर ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल लंबी चलती है, तो देशभर में सामान पहुंचाने का खर्च बढ़ सकता है. ट्रक और ट्रेलर खाने-पीने की चीजों, रोजमर्रा के सामान, औद्योगिक कच्चे माल और दूसरी जरूरी वस्तुओं को एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचाते हैं.
अगर ये वाहन सड़क से हट गए तो कंपनियों को सामान पहुंचाने में देरी और ज्यादा लॉजिस्टिक्स खर्च का सामना करना पड़ेगा. बाद में कंपनियां यह बढ़ा हुआ खर्च ग्राहकों से वसूल सकती हैं. इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ सकता है. ऑयल टैंकर कंपनियों के हड़ताल में शामिल होने से पेट्रोल पंपों तक ईंधन की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ गया है.
IMF भी बना विवाद की बड़ी वजह
पाकिस्तान की आर्थिक नीतियां लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ हुए समझौतों से जुड़ी हुई हैं. आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को IMF से वित्तीय मदद मिली है. सरकार का कहना है कि बजट और आर्थिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कुछ टैक्स और राजस्व बढ़ाने वाले कदम जरूरी हैं. इसी वजह से पेट्रोलियम लेवी को हटाना सरकार के लिए आसान नहीं है.
लेकिन हाफिज नईमुर रहमान ने IMF का हवाला देकर लेवी जारी रखने की सरकार की दलील को खारिज कर दिया. शुक्रवार के प्रदर्शन में उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “आप कहते हैं कि IMF इसकी इजाजत नहीं देगा. तो आप और आपका IMF भाड़ में जाए.”
अब सोमवार की बातचीत पर नजर
अब सबकी नजर सोमवार को सरकार और ट्रांसपोर्टरों के बीच होने वाली बातचीत पर है. अगर दोनों पक्षों के बीच समझौता हो जाता है तो देश में सामान की आवाजाही फिर शुरू हो सकती है. लेकिन बातचीत विफल रहती है और हड़ताल लंबी खिंचती है तो इसका असर सिर्फ ट्रांसपोर्ट सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा. ईंधन की सप्लाई, खाद्य पदार्थों की कीमतों और रोजमर्रा के सामान पर भी इसका असर पड़ सकता है.
शहबाज शरीफ सरकार के सामने अब बड़ी चुनौती है. उसे एक तरफ देश की कमजोर आर्थिक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की बढ़ती कीमतों को संभालना है, तो दूसरी तरफ महंगे ईंधन के कारण जनता में बढ़ते गुस्से को भी शांत करना है. पाकिस्तान में विरोध अब सिर्फ पेट्रोल पंपों तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़कों, सप्लाई चेन और राजनीतिक गलियों तक पहुंच चुका है.
